डर्मेटोमायोसिटिस क्या है? इसके लक्षण और कारण और बचाव
- 11 Apr, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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डर्मेटोमायोसिटिस (Dermatomyositis) स्किन संबंधी एक दुर्लभ मेडिकल कंडीशन है जिसमें मांसपेशियों की क्षति (muscle degeneration) होने लगती है और त्वचा पर लाल और बैंगनी चकत्ते पड़ जाते हैं। डर्मेटोमायोसिटिस एक ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर (Auto Immune Disorder) है और फिलहाल इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। सावधानी और समय पर लक्षणों की पहचान के जरिए इस बीमारी को मैनेज किया जा सकता है। देखा जाए तो डर्मेटोमायोसिटिस किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकता है, लेकिन आमतौर पर ये बीमारी 40 से 60 साल के डर्मेटोमायोसिटिस लोगों और 5 से 15 साल के बच्चो को अपना ज्यादा शिकार बनाती है। इसमें भी महिलाएं पुरुषों की तुलना में इस बीमारी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं। चलिए इस लेख में जानते हैं कि डर्मेटोमायोसिटिस क्या है और इसके कारण और लक्षण क्या हैं। साथ ही जानेंगे कि इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
डर्मेटोमायोसिटिस क्या है? (What is Dermatomyositis?)
डर्मेटोमायोसिटिस एक प्रकार मायोपैथी यानी मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी है जिसमें मांसपेशियों और त्वचा के भीतर की रक्त धमनियों यानी ब्लड वैसल्स पर असर पड़ता है। डर्मेटोमायोसिटिस को ऑटोइम्यून बीमारी कहा जाता है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम गलती से शरीर के ऊतकों यानी टिश्यूज पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देता है। डर्मेटोमायोसिटिस मांसपेशियों औऱ त्वचा के साथ साथ अन्य कई सेहत संबंधी दिक्कतों को जन्म दे सकती है। डर्मेटोमायोसिटिस के गंभीर होने पर ह्दय रोग, कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, रूमेटाइड अर्थराइटिस, ल्यूपस और स्क्लेरोडर्मा जैसी बीमारियों के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। डर्मेटोमायोसिटिस मुख्य तौर पर मांसपेशियों औऱ त्वचा पर गहरा असर डालती है। इसके चलते मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और उनमें सूजन आने लगती है, वहीं त्वचा पर चकत्ते आने लगते हैं।
डर्मेटोमायोसिटिस कितने प्रकार का होता है?
How many Types of Dermatomyositis?
डर्मेटोमायोसिटिस दो प्रकार का होता है। पहला जुवेनाइल डर्मेटोमायोसिटिस (JDM) और दूसरा पैरानियोप्लास्टिक डर्मेटोमायोसिटिस। जुवेनाइल डर्मेटोमायोसिटिस जहां बच्चों को होने वाला डर्मेटोमायोसिटिस है वहीं पैरानियोप्लास्टिक डर्मेटोमायोसिटिस कैंसर के खतरे को जन्म देता है।
डर्मेटोमायोसिटिस का क्या कारण है?
What Causes Dermatomyositis?
डर्मेटोमायोसिटिस बीमारी का फिलहाल मूल कारण ज्ञात नहीं हो पाया है। हालांकि वैज्ञानिकों की नजर में इसका कारण ऑटो इम्यून डिस्ऑर्डर है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम मांसपेशियों के टिश्यूज पर हमला करके उन्हें कमजोर और नष्ट करता है। इसके अलावा आनुवांशिक यानी जेनेटिक कारण भी अहम कहे जा सकते हैं। लंबे समय तक धूप में रहना, कुछ ववायरल संक्रमण, कुछ खास दवाएं और पेट या फेफड़े का कैंसर जैसे कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं।
डर्मेटोमायोसिटिस के लक्षण क्या हैं?
What are the Symptoms of Dermatomyositis?
डर्मेटोमायोसिटिस के लक्षण अलग अलग व्यक्तियों में बीमारी की गंभीरता के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार है –
- मांसपेशियों में दर्द होना
- धड़ के आस पास की मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
- बैठने, उठने और मूव करने में दिक्कत होना
- जोड़ों में दर्द और अकड़न होना
- चीजों को उठाने और हाथों को ऊपर उठाने में दर्द होना
- थकान महसूस होना
- बुखार होना
- वजन कम होना
- सांस लेने में तकलीफ होना
- निगलने में दिक्कत होना
- आवाज में बदलाव आना
- सूरज के एक्सपोजर में जाने से दिक्कत होना
- स्किन पर खासकर गर्दन, कंधे, ऊपरी छाती, घुटने, कोहनी और हाथ के पोरों पर लाल और बैंगनी चकत्ते
- पलकों पर लाल और बैंगनी रंग की सूजन
- उंगलियों, कोहनी और पैर की उंगलियों पर लाल चकत्ते और सूजन
- त्वचा पर पपड़ी जमना
- त्वचा का रूखा और सूखा होना
- त्वचा पर खुजली होना
- नाखूनों के आस पास की त्वचा का सूजना
- स्किन के नीचे कठोर गांठ महसूस होना
डर्मेटोमायोसिटिस की जांच कैसे की जाती है?
How is Dermatomyositis Diagnosed?
डर्मेटोमायोसिटिस की जांच से पहले डॉक्टर फिजिकल एक्जामिनेशन करते हैं। इसके बाद डर्मेटोमायोसिटिस के लक्षणों की पहचान की जाती है और मरीज की मेडिकल हिस्टरी चैक की जाती है। इसके बाद डर्मेटोमायोसिटिस का संदेह बनता है तो डॉक्टर नीचे लिखे टेस्ट की सिफारिश कर सकते हैं –
- ब्लड एनालिसिस (Blood analysis) ब्लड एनालिसिस के जरिए शरीर में ऑटोएंटीबॉडी और मसल्स एंजाइम की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
- इलेक्ट्रोमायोग्राफी (Electromyography) इलेक्ट्रोग्राफी के जरिए मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाले विद्युत आवेगों को रिकॉर्ड किया जाता है।
- एमआरआई स्कैन (MRI Scan) – एमआरआई स्कैन में मांसपेशियों की सूजन का आकलन किया जाता है।
- स्किन और मसल्स बायोप्सी (Skin and Muscle Biopsy) -स्किन और मांसपेशियों की बायोप्सी त्वचा में आए बदलाव परिवर्तन और मांसपेशियों की सूजन का पता करने के लिए की जाती है।
डर्मेटोमायोसिटिस का मैनेजमेंट कैसे किया जाता है?
How to Manage Dermatomyositis?
देखा जाए तो डर्मेटोमायोसिटिस का इलाज उपलब्ध नहीं है। इसके लक्षणों को पहचान उन्हें मैनेज करना ही एकमात्र विकल्प है। डर्मेटोमायोसिटिस के लक्षणों को मैनेज करने के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं –
- नियमित एक्सरसाइज – अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा सुझाए गए व्यायाम और एक्सरसाइज नियमित रूप से करें।
- डॉक्टरों द्वारा प्रिस्क्राइब की गई दवाओं को समय पर लें।
- बहुत देर तक धूप में रहने से बचें। बाहर जाने पर छाता, स्कार्फ और धूप का चश्मा यूज करें। बाहर निकलते वक्त पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- घर से बाहर निकलते वक्त एसपीएफ 50 या उससे ज्यादा ब्रॉड स्पेक्ट्रम वाली सनस्क्रीन लगाएं।
- सनस्क्रीन को हर दो घंटे में लगाएं।
- हेल्दी डाइट फॉलो करें।
- तनाव कम करने की कोशिश करें।
- एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन न करें
- पर्याप्त नींद लें।
- ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करने से बचें। अगर थकान महसूस हो रही है तो पर्याप्त आराम करें।
डर्मेटोमायोसिटिस मांसपेशियों को कमजोर करने वाली एक दुर्लभ बीमारी है। इसके चलते मांसपेशियों कमजोर होती है और त्वचा पर बुरा असर पड़ता है। गंभीरता से न लिए जाने पर ये बीमारी दूसरी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। चूंकि इस बीमारी का इलाज संभव नहीं है, इसलिए इसके लक्षणों को समय रहते पहचान कर उन्हें मैनेज करना महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति में डर्मेटोमायोसिटिस के लक्षण दिख रहे हैं तो हेल्थ केयर प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए। डर्मेटोमायोसिटिस संबंधी जांच के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स के साथ एमआरआई स्कैन बुक करवाना चाहिए।
FAQ
कौन कौन से टेस्ट डर्मेटोमायोसिटिस की जांच में सहायक होते हैं? (What tests confirm dermatomyositis?)
डर्मेटोमायोसिटिस की जांच के लिए ब्लड एनालिसिस, एमआरआई स्कैन, इलेक्ट्रोमायोग्राफी और स्किन एंड मसल्स बायोप्सी जैसे टेस्ट किए जाते हैं।
डर्मेटोमायोसिटिस का क्या कारण है? (What is the cause of dermatomyositis?)
डर्मेटोमायोसिटिस के कारणों में ऑटो इम्यून डिस्ऑर्डर, जेनेटिक्स, वायरल संक्रमण, धूप का ज्यादा एक्सपोजर। कुछ खास दवाएं और पर्यावरण से संबंधित फैक्टर शामिल हैं।








