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थायरॉइड टेस्ट : टीएसएच, टी3 और टी4 टेस्ट का महत्व

Medically Approved by Dr. Seema

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thyroid-testथायरॉइड (Thyroid) की बीमारी आज के दौर में एक आम बीमारी के तौर पर देखी जाती है। थायरॉइड ग्लैंड यानी ग्रंथि तितली के आकार का एक अंग है जो गर्दन में स्थित होता है। थायरॉइड ग्रंथि शरीर में मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करने के साथ साथ एनर्जी प्रोडक्शन और पूरे शरीर के कामकाज का प्रबंधन करती है। थायरॉइड ग्लैंड (thyroid gland) यानी थायरॉइड ग्रंथि में जब दिक्कत आती है तो शरीर के कई कामकाज पर बुरा असर पड़ता है।

 

जब थायरॉइड ग्रंथि सही से काम नहीं करती है तो शरीर वजन बढ़ना  घटना, थकान, मूड में बदलाव, त्वचा और बालों की समस्या, और हार्ट रिलेटेड डिजीज का शिकार हो सकता है। देखा जाए तो थायरॉइड की बीमारी काफी आम है।  थायरॉइड ग्रंथि के सामान्य कामकाज की शुरूआती जांच से इस बीमारी का सटीक मैनेजमेंट किया जा सकता है। थायरॉइड की जांच के लिए थायरॉइड टेस्ट (Thyroid Test) किया जाता है। चलिए जानते हैं कि थायरॉइड टेस्ट की क्या अहमियत है और ये कितने तरह के होते हैं।

थायरॉइड टेस्ट क्या हैं? (What is Thyroid Test?)

थायरॉइड टेस्ट थायरॉइड ग्लैंड की जांच के लिए किया जाने वाला ब्लड टेस्ट है। इसे थायरॉइड फ़ंक्शन टेस्ट (Thyroid Function Test) कहते हैं। इस टेस्ट के जरिए थायरॉइड ग्लैंड के कामकाज का मूल्यांकन किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए शरीर में शरीर में थायरॉइड को उत्तेजित करने वाले हार्मोन को मापा जाता है। थायरॉइड फ़ंक्शन टेस्ट (Thyroid Function Test) तीन प्रकार का होता है। इसके तीन प्रकार इस प्रकार हैं –

 

  1. थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन Thyroid-Stimulating Hormone (TSH) – इस टेस्ट के जरिए खून में टीएसएच के स्तर को मापा जाता है। टीएसएच ऐसा हार्मोन है जो थायरॉइड ग्लैंड को थायरॉइड हार्मोन जैसे टी3 (ट्राईआयोडोथायोनिन) और टी4 (थायरोक्सिन) बनाने के लिए उत्तेजित करता है।
  2. थायरोक्सिन Thyroxine (T4) – इस टेस्ट के जरिए खून में थायरोक्सिन के स्तर को मापा जाता है। थायरॉइड ग्लैंड इस हार्मोन का सबसे ज्यादा उत्पादन करती है।
  3. ट्राईआयोडोथायोनिन Triiodothyronine (T3) इस टेस्ट के जरिए खून में ट्राईआयोडोथायोनिन हार्मोन स्तर को मापा जाता है। ये हार्मोन टी4 की तुलना में ज्यादा एक्टिव रहता है।
  4. ये सभी टेस्ट थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TFT) के तहत आते हैं। इसे थायरॉइड पैनल टेस्ट भी कहा जाता है। इस पैनल जरिए शरीर में हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायरॉयड) और हाइपरथायरायडिज्म (ओवरएक्टिव थायरॉयड) के डिस्ऑर्डर की जांच की जाती है।

टीएसएच टेस्ट क्यों जरूरी है ? (Why Is the TSH Test Important?)

 थायरॉइड का टीएसएच टेस्ट थायरॉइड के कामकाज का मूल्यांकन करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस टेस्ट के जरिए खून में थायरॉइड उत्तेजक हार्मोन के लेवल का पता लगाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि थायरॉइड सही तरह से काम कर रहा है या नहीं। टीएसएच टेस्ट के जरिए इन बातों का पता लगाया जाता है –

 

  1. शुरूआती पहचान (Early Detection) – ध्यान देने योग्य लक्षण दिखाई देने पर थॉयरॉइड की कमजोर कार्यप्रणाली का पता लगाया जाता है।
  2. थायरॉइड रेगुलेशन (Thyroid Regulation) – इस टेस्ट के जरिए ये आकलन किया जाता है कि थायरॉइड शरीर के संकेतों पर किस तरह से रिएक्ट कर रहा है।
  3. दवा पर नजर रखना (Medication Monitoring) – इस टेस्ट के जरिए ये तय किया जाता है कि थायरॉइड के लिए सही खुराक कैसे दी जाए।
  4. हाई रिस्क वाले मरीजों की पहचान (Screening High-Risk Individuals) – ऑटोइम्यून कंडीशन वाले मरीजों और आनुवांशिक थायरॉइड वाले मरीजों में थायरॉइड की जटिलताओं की जांच करता है।

टी 3 टेस्ट क्यों जरूरी है? (Why Is the T3 Test Important?)

ट्राईआयोडोथायोनिन यानी टी3 टेस्ट मरीज के खून में एक्टिव थायरॉइड हार्मोन के लेवल को मापता है। टी3 टेस्ट मेटाबॉलिज्म, एनर्जी प्रोडक्शन के साथ साथ शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करता है। इस टेस्ट का मुख्य मकसद हाइपरथायरायडिज्म (शरीर में थायरॉइड हार्मोन के ज्यादा उत्पादन) की जांच करना है। इस टेस्ट में टी3 (बाउंड और फ्री) और फ्री टी3 (अनबाउंड और एक्टिव) हार्मोन के टेस्ट होते हैं। इस टेस्ट के जरिए ग्रेव्स बीमारी और थायरॉइड नोड्यूल जैसी कंडीशन की भी पहचान की जाती है।

 

टी3 टेस्ट की मदद से ये परिणाम सामने आते हैं।

  1. इस टेस्ट की मदद से हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति का पता लगाया जाता है। आमतौर पर ये टेस्ट पहला टेस्ट है जो ग्रेव्स बीमारी और थायरॉइड नोड्यूल में असामान्यता का पता लगाता है।
  2. इसकी मदद से थायरॉइड डिस्फंक्शन की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
  3. इस टेस्ट की मदद से मरीज में अलग अलग थायरॉइड कंडीशन के बीच अंतर करने में मदद मिलती है।

टी4 टेस्ट क्यों जरूरी है? (Why Is the T4 Test Important?)

टी4 टेस्ट में थायरॉइड कामकाज का आकलन करने के लिए खून मे थायरोस्किन का लेवल मापा जाता है। इस टेस्ट के जरिए कुल टी4 (बाउंड और फ्री) और फ्री टी4 (एक्टिव) दोनों का ही मूल्यांकन किया जाता है। ये टेस्ट थायरॉइड डिस्ऑर्डर की जांच,  इलाज और मैनेजमेंट की निगरानी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।

 

टी3 टेस्ट के ये फायदे होते है –

  1. प्रारंभिक हार्मोन का माप लेना (Primary Hormone Measurement) ये टेस्ट ब्लड फ्लो में थायरोक्सिन को मापता है।
  2. टी 3 में कंवर्जन (Conversion to T3) ये टेस्ट जरूरत के अनुसार टी4 को एक्टिव टी3 बदल कर हार्मोन संतुलन बनाने की जरूरत बताता है।
  3. थायरॉइड डिजीज मैनेजमेंट (Thyroid Disease Management) इस टेस्ट के जरिए मरीज में हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म की जांच करने के साथ साथ सटीक इलाज को ट्रैक करने में मदद मिलती है।
  4. थायरॉइड फंक्शन मॉनिटरिंग (Thyroid Disease Management) ये टेस्ट थायरॉइड के कामकाज को पूरी तरह मॉनिटर करता है ताकि ये तय हो सके कि थायरॉइड ग्लैंड शरीर की जरूरतों के आधार पर पर्याप्त हार्मोन का प्रोडक्शन कर रही है या नहीं।

थायरॉइड टेस्ट कब करवाना चाहिए? (When To Get Tested?)

थायरॉइड फंक्शन टेस्ट के जरिए थायरॉइड डिस्ऑर्डर और थायरॉइड ग्रैंड की जटिलताओं का जल्द पता लगाने में मदद मिलती है। खासकर ऐसे लोग जो बिना किसी कारण वजन बढ़ने, थकान, अनियमित हार्ट बीट महसूस कर रहे हैं। ऐसे लोगों को भी समय समय पर थायरॉइड फंक्शन टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है जिनके परिवार में किसी को पहले से थायरॉइड की बीमारी है, ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर या प्रेग्नेंसी से संबंधित थायरॉइड समस्याएं हैं। सटीक थायरॉइड फंक्शन टेस्ट और एक्सपर्ट की सलाह के लिए डॉ। लाल पैथलेब्स में टेस्ट बुक करवाना चाहिए।ध्यान रहे टेस्ट करवाने से पहले डॉक्टरी परामर्श जरूरी है।

 

FAQs

 

1. थायरॉइड फंक्शन टेस्ट कितनी बार करवाना चाहिए|

जिन लोगों को थायरॉइड की समस्या है या जो लोग इसके रिस्क में आते हैं, उन्हें साल में एक बार या फिर डॉक्टर की सलाह पर थायरॉइड टेस्ट करवाना चाहिए।

2.क्या स्ट्रेस थायरॉइड हार्मोन के लेवल को प्रभावित कर सकता है।

हां, पुराना स्ट्रेस थायरॉइड हार्मोन के प्रोडक्शन के साथ साथ मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकता है।

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