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साइनस क्या होता है? इसके कारण, लक्षण और उपचार

Medically Approved by Dr. Seema

Table of Contents

साइनस क्या होता है

 

साइनस (sinus meaning in hindi) बीमारी को साइनसाइटिस भी कहा जाता है। साइनस संक्रमण ऐसी सूजन है जो साइनस नलिकाओं में संक्रमण के कारण होती है। आपको बता दें कि गाल, माथे और नाक की हड्डियों के बीच हवा से भरी खाली जगहों को साइनस (sinus meaning in hindi) कहा जाता है। अक्सर सर्दी, जुकाम, एलर्जी या संक्रमण के चलते साइनस की अंदरूनी परत अवरुद्ध हो जाती है और इसमें सूजन आ जाती है। साइनस (sinus kya hota hai) की सूजन को ही साइनसाइटिस कहा जाता है। इससे चेहरे और गले में दर्द होने लगता है, नाक बंद हो जाती है और बहने लगती है। यूं तो साइनसाइटिस (sinus kya hota hai) की बीमारी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है लेकिन अगर ये गंभीर हो जाए तो साइनस का संक्रमण आंखों और दिमाग तक फैल सकता है। ऐसे में मरीज के लिए स्थिति कई बार गंभीर हो जाती है। इस लेख में जानते हैं कि साइनस क्या होता है और साइनस के लक्षण (sinus ke lakshan) किस प्रकार दिखते हैं। साथ ही जानेंगे साइनस के नुकसान और इसके (sinus kya hota hai) इलाज (sinus meaning in hindi) के बारे में सब कुछ।

 

साइनस क्या होता है?

साइनस (sinus meaning in hindi) को साइनसाइटिस भी कहा जाता है। साइनस चेहरे की (sinus kya hota hai) वो खाली जगहें हैं जो हवा के संचार में मदद करती हैं और म्यूकस यानी बलगम को बनाने का काम करती हैं। साइनस (sinus meaning in hindi) द्वारा बनाया गया म्यूकस यानी बलगम ही नाक के रास्ते को साफ रखता है प्रदूषण, कचरा, धूल और कीटाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। जब बैक्टीरिया, फंगल, एलर्जी या अन्य कई वजहों से इन साइनस में सूजन आती है तो साइनसाइटिस हो जाता है।

 

साइनस के लक्षण क्या हैं?

साइनस के लक्षण (sinus ke lakshan) आमतौर पर सामान्य सर्दी खांसी जैसे दिखते हैं। इसलिए आमतौर पर लोग (sinus meaning in hindi) साइनस के लक्षण को नजरंदाज (sinus kya hota hai) कर देते हैं। साइनस के लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  1. नाक बंद होना
  2. नाक का लगातार बहना
  3. सांसों से बदबू आना
  4. बुखार
  5. थकान हावी होना
  6. सिर में दर्द होना
  7. खांसी होना
  8. बलगम का ज्यादा बनना
  9. दांतों में दर्द
  10. मसूड़ों में दर्द और खिंचाव होना
  11. आंखों से लगातार पानी बहना
  12. सूंघने की क्षमता में कमी आना
  13. चेहरे को छूने में दर्द होना
  14. गले में दर्द होना
  15. गले में रुकावट या बंद होने का अहसास
  16. कुछ खाने या निगलने में कठिनाई होना

 

यूं तो साइनस (sinus meaning in hindi) आमतौर पर 9 से 12 दिन के भीतर ठीक हो जाता है। लेकिन अगर इसके लक्षण (sinus ke lakshan) दो सप्ताह बाद तक दिखते हैं तो डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी हो जाता है। लक्षण गंभीर होने पर इस बीमारी की वजह से आंखों का संक्रमण, मस्तिष्क संक्रमण (sinus kya hota hai) और दूसरी कई गंभीर दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

 

साइनस के कारण क्या हैं?

साइनस संक्रमण (sinus meaning in hindi) के कई कारण हैं जो इस प्रकार हैं –

 

  1. वायरल इंफेक्शन (Viral Infection) – सामान्य सर्दी यानी फ्लू के चलते साइनस में सूजन आ जाती है जिससे साइनस में संक्रमण होने लगता है।
  2. बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial Infections) – साइनस में बैक्टीरिया के हमले के चलते भी संक्रमण होता है और साइनस में सूजन आ जाती है।
  3. फंगल इंफेक्शन (Fungal infection) – फंगल इंफेक्शन के चलते भी साइनस सूज जाते हैं और इसमें बलगम जमने लगता है।
  4. एलर्जी (Allergy) – कई लोग एलर्जी के चलते भी साइनसाइटिस के शिकार हो जाते हैं। धूल, पराग के कण या मोल्ड से होने वाली एलर्जी साइनस (sinus meaning in hindi) का कारण बनती है।
  5. नाक का टेढ़ापन (Crooked nose) – नाक की संरचना में कुछ असामान्यता जैसे टेढ़ी नाक या पॉलीप्स भी साइनस की जगह को अवरुद्ध कर डालते हैं.
  6. कमजोर इम्यून सिस्टम (Weak immune system) – जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है वो बार बार संक्रमण का शिकार होते हैं।
  7. मौसम में बदलाव (Change in weather) – मौसम में अचानक होने वाले बदलाव जैसे रूखी हवा, ज्यादा शुष्क मौसम, ज्यादा सर्दी या ज्यादा गर्मी भी सांस लेने की नलियों को प्रभावित करते हैं जिससे साइनस संक्रमण होता है।

 

साइनस के नुकसान क्या हैं?

साइनस (sinus meaning in hindi) एक आम बीमारी है जिसके लक्षण (sinus ke lakshan) 10 से 13 दिनों तक दिखते हैं। लेकिन कई बार लक्षण नजरंदाज किए जाने पर साइनसाइटिस गंभीर (sinus meaning in hindi) रूप धारण कर लेता है जिससे शरीर को गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। साइनस के नुकसान इस प्रकार हैं –

 

  1. आंखों का संक्रमण – साइनसाइटिस अगर गंभीर हो जाए तो इसका संक्रमण आंखों तक फैल जाता है और आंखों के आस पास के टिश्यूज में संक्रमण होने लगता है। इससे आंखों के आस पास सूजन आ जाती है जिसका असर आंखों की रोशनी पर पड़ता है और नजर कमजोर होने का साथ दुर्लभ मामलों में अंधापन भी हो सकता है।
  2. मस्तिष्क संक्रमण – साइनस के संक्रमण के ज्यादा गंभीर होने पर मस्तिष्क में संक्रमण हो सकता है जो मेनिनजाइटिस का रूप ले सकता है। इससे भ्रम होता है और सिर में तेज दर्द होने लगता है।
  3. ऑस्टियोमाइलाइटिस – साइनस गंभीर हो जाए तो हड्डियों तक ये संक्रमण पहुंच सकता है और मरीज ऑस्टियोमाइलाइटिस का शिकार हो सकता है।
  4. सेल्युलाइटिस – ये त्वचा का एक संक्रमण है जो साइनसाइटिस के कारण होता है।
  5. खर्राटे – लगातार साइनस के चलते व्यक्ति को लगातार खर्राटे आते हैं।
  6. मरीज की सूंघने की क्षमता में कमी आ जाती है।
  7. स्लीप एपनिया – रात को नींद लेने में दिक्कत आती है।
  8. बहरापन – साइनस के गंभीर होने पर व्यक्ति को बहरेपन का भी खतरा हो सकता है।

 

साइनस के इलाज के बारे में जानकारी

साइनस का इलाज संभव है। आम मामलों में कुछ घरेलू उपचार जैसे भाप लेने, गर्म सिकाई, पर्याप्त पानी पीने और नमक के पाने के गरारे करने और नेजल ड्रॉप की मदद लेने से मरीज को आराम मिलता है। वहीं गंभीर मामलों में डॉक्टर मरीज को एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं। इसके गंभीरतम मामलों में सर्जरी यानी साइनसोटमी की जरूरत महसूस होती है।

 

आमतौर पर घरेलू उपचार के जरिए साइनस कुछ दिनों में ठीक हो सकता है। इसके सटीक मैनेजमेंट के लिए जरूरी है कि इसके लक्षणों (sinus ke lakshan) को सही समय पर पहचान कर प्रभावी कदम उठाएं जाएं। अगर किसी व्यक्ति में साइनस के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी परामर्श लें। डॉक्टरी परामर्श के बाद संबंधित टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

साइनस क्यों होता है?
साइनस फ्लू, एलर्जी, फंगल इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन के चलते होता है।

 

साइनस के नुकसान क्या हैं ?
साइनस गंभीर होने पर आंखों और मस्तिष्क में संक्रमण के खतरे बढ़ जाते हैं। इससे व्यक्ति बहरेपन और अंधेपन का भी शिकार हो सकता है।

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