Hypersomnia (अनिद्रा) के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके
- 26 Sep, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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अच्छी सेहत के लिए भरपूर और गहरी नींद जरूरी कही जाती है। लेकिन अनिद्रा यानी इन्सोम्निया नींद संबंधी ऐसा विकार है जिसमें सोने में दिक्कत आती है। अनिद्रा यानी इन्सोम्निया में जहां नींद कम आती है वहीं इससे उलट हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज को बहुत ज्यादा नींद आती है। हाइपरसोम्निया ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज को रात भर भरपूर नींद लेने के बावजूद दिन में बार बार झपकी आती है। इसकी अधिकता से शरीर में थकान हावी होती है और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई आती है। हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) के कई कारण हो सकते हैं जैसे मेंटल स्ट्रेस या कुछ खास दवाएं। इसके अलावा नींद से जुड़ी कुछ परेशानियां भी हाइपरसोम्निया को बढ़ा देती हैं। ऐसे में हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) के सटीक प्रबंधन के लिए इसके लक्षणों और कारणों की पहचान होना जरूरी हो जाता है। इस लेख में जानते हैं कि हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) क्या है और ज्यादा नींद आने के कारण और उपाय क्या हैं।
हाइपरसोम्निया क्या होता है ?
हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) नींद से जुड़ा एक डिस्ऑर्डर है जिसमें मरीज को बहुत ज्यादा नींद आती है। इस स्थिति में मरीज रात भर सोने के बाद भी दिन में कई कई घंटे सोता है। व्यक्ति रात भर सोने के बावजूद दिन में नींद की जरूरत महसूस करता है। ऐसा मरीज दिन में स्कूल, कॉलेज, दफ्तर या रास्ते में वाहन के अंदर भी सो जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को पता नहीं चलता कि कब वो नींद की आगोश में चला गया है। हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) दो प्रकार का होता है, पहला प्राइमरी हाइपरसोम्निया और दूसरा सैकेंडरी हाइपरसोम्निया। प्राइमरी हाइपरसोम्निया के पीछे नर्वस सिस्टम में क्षति को कारण कहा जा सकता है जबकि सैकेंडरी हाइपरसोम्निया के लिए लाइफस्टाइल संबंधी कारक इसकी वजह माने जाते हैं। आपको बता दें स्वस्थ लोगों की तुलना में कैंसर पीड़ित बच्चों और किशोरों में हाइपरसोम्निया का विकार ज्यादा देखा जाता है। हाइपरसोम्निया होने पर ज्यादा नींद की वजह से फोकस में कमी, थकान, कमजोरी, कामकाज के बीच सामंजस्य बिठाने में दिक्कत आने लगती है।
हाइपरसोम्निया के लक्षण क्या हैं?
अनिद्रा यानी हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) के लक्षण हालांकि ज्यादा स्पष्ट तौर पर नहीं दिखते हैं। इसके लक्षण थकावट औऱ नींद की जरूरत से जुड़े दिखते हैं। हाइपरसोम्निया के लक्षण इस प्रकार हैं –
- दिन के दौरान ज्यादा नींद आना
- जागते रहने या उठे रहने में दिक्कत महसूस होना
- बार बार झपकी आना
- जागने के बाद भी मतिभ्रम या मदहोशी रहना
- रात में ज्यादा समय तक सोना
- नींद में बेचैनी महसूस होना
- किसी भी चीज पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत महसूस होना
- हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होना
- खास कामकाज के दौरान दिक्कत और उलझन महसूस होना
हाइपरसोम्निया के क्या कारण हैं?
देखा जाए तो शरीर ऐसे कई संकेत देता है जो हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) यानी नींद के चक्र में बाधा का कारण बनते हैं। हाइपरसोम्निया (ज्यादा नींद आने के कारण और उपाय) के कारण इस प्रकार हैं –
- हार्मोनल बदलाव
- ट्यूमर, शॉक, सर्जरी, रेडिएशन थैरेपी, दिमाग की कोई पुरानी चोट
- दर्द की कुछ खास दवाओं का सेवन
- डमेंटल स्ट्रेस, एंजाइटी और अवसाद
- ज्यादा शराब का सेवन
- किसी नशीली दवा का सेवन
- नींद संबंधी गलत आदतें जैसे ज्यादा मोबाइल या टीवी देखना, देर से सोना
- मस्तिष्क कैंसर से पीड़ित बच्चे इस बीमारी के ज्यादा शिकार बनते हैं
हाइपरसोम्निया की जांच कैसे की जाती है?
हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) की पहचान करने के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच के साथ साथ मरीज के नींद संबंधी पैटर्न की भी जांच करते हैं। इसके लिए मरीज के परिवार से बातचीत भी की जाती है और मरीज की नींद के शैड्यूल को लेकर स्लीप डायरी बनाई जाती है। इस डायरी में मरीज की नींद के समय और अंतराल को ट्रैक किया जाता है। मरीज की नींद की स्थिति की जांच के साथ साथ ब्लड टेस्ट भी किया जाता है। इस ब्लड टेस्ट के जरिए शरीर में ब्लड वैसल्स यानी रक्त कोशिकाओं की संख्या, शरीर के हार्मोन के काम करने का तरीका और दूसरे अंगों के कामकाज की समीक्षा की जाती है। इसके अलावा अगर मरीज किसी तरह की दवा ले रहा है तो उन दवाओं की भी समीक्षा की जाती है कि कहीं ज्यादा नींद उन दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल के चलते तो नहीं आ रही। हाइपरसोम्निया (hypersomnia in hindi) की जांच के दौरान पॉलीसोम्नोग्राफी की जाती है। इसके तहत रात में नींद के दौरान मरीज के दिमाग, मांसपेशियों, दिल की गति और सांस लेने की गति का अध्ययन किया जाता है। हाइपरसोम्निया की जांच के लिए मल्टीपल स्लीप लटेंसी टेस्ट भी किया जाता है। इस टेस्ट से पता चलता है कि मरीज को लेटने के कितनी देर बाद नींद आती है।
हाइपरसोम्निया का मैनेजमेंट किस तरह होता है?
हाइपरसोम्निया के कारण और लक्षणों की पहचान करके इसका सटीक प्रंबधन (ज्यादा नींद आने के कारण और उपाय) किया जा सकता है। हाइपरसोम्निया के उपचार में सबसे बड़ी भूमिका लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव की है। लाइफस्टाइल मे बदलाव करना, नींद के पैटर्न को सही रखना, तनाव को दूर रखना, सही डाइट का पालन, पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी के साथ साथ कुछ दवाएं भी हाइपरसोम्निया के उपचार में कारगर साबित होती हैं। इसके अलावा कैफीन के कम सेवन, शराब के सेवन में कमी करके और खतरनाक एक्टिविटीज से परहेज करने पर भी इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
हाइपरसोम्निया एक तरह की अनिद्रा है जिसमें व्यक्ति 24 घंटों में 16 से ज्यादा घंटों तक सो सकता है। इससे उसका नींद का साइकिल बिगड़ता है जिससे उसकी दिनचर्या ही नहीं सेहत पर भी कई तरह से बुरा असर पड़ता है। ऐसे में हाइपरसोम्निया के कारण और लक्षणों को समझ कर इसकी सटीक जांच करवाना काफी महत्वपूर्ण साबित होता है। अगर किसी व्यक्ति में हाइपरसोम्निया के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टरी परामर्श के बाद हाइपरसोम्निया संबंधित टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डडॉ। लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
ज्यादा नींद आना किस बीमारी का लक्षण है?
ज्यादा नींद आना हाइपरसोम्निया के लक्षण हैं। इसमें मरीज को रात में भरपूर नींद लेने के बावजूद दिन में काफी नींद आती है।
ज्यादा नींद आने के क्या कारण हैं?
ज्यादा नींद आना यानी हाइपरसोम्निया के कई कारण हैं जैसे हार्मोनल बदलाव, ट्यूमर, दिमाग में चोट, दिमाग की सर्जरी, गलत लाइफस्टाइल आदि।







