चिकनपॉक्स- कारण, लक्षण, उपचार और बचाव
- 5 Dec, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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चिकनपॉक्स (Chickenpox) एक संक्रामक बीमारी है जिसके चलते शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं जो बाद में फफोले बन जाते हैं। कुछ समय बाद इन फफोलों के सूखने पर इन पर पपड़ी जम जाती है। चिकनपॉक्स को आम भाषा में चेचक कहा जाता है। भारतीय गांवों और कस्बों में चिकनपॉक्स को छोटी माता भी कहते हैं। चिकनपॉक्स यूं तो किसी को भी हो सकता है। लेकिन ये बीमारी आमतौर पर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है। चिकनपॉक्स वेरिसेला-जोस्टर वायरस (VZV) (varicella-zoster virus) के चलते फैलता है और बाद में संक्रमित व्यक्ति के दूसरों तक फैल जाता है। चिकनपॉक्स संक्रमित मरीज के खांसने, छींकने, श्वसन बूंदों और शरीर के फ्लुइड के जरिए फैलता है। चिकनपॉक्स के दाने कई चरणों में दिखाई देते हैं। ये दाने चेहरे, छाती और पीठ से शुरू होकर फिर पूरे शरीर में फैल जाते हैं। चिकनपॉक्स के सटीक मैनेजमेंट के लिए जरूरी है कि इसके लक्षणों को सही समय पर पहचान कर परीक्षण कराया जाए। चलिए इस लेख में जानते हैं कि चिकनपॉक्स के कारण और लक्षण क्या हैं। साथ ही जानेंगे कि इसके उपचार और बचाव के लिए क्या क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं। सटीक मेडिकल जांच और हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स का ऐप डाउनलोड कीजिए।
चिकनपॉक्स क्या है?
चिकनपॉक्स वैरिसेला जोस्टर नामक वायरस के चलते होने वाली संक्रामक बीमारी है, जिसमें शरीर पर जगह जगह लाल चकत्ते और छाले पड़ जाते हैं। इन दानों में बहुत खुजली होती है और पानी भर जाता है। चिकनपॉक्स बीमारी संक्रमित मरीज के सीधे संपर्क या आस पास के वातावरण में उसकी श्वसन बूंदों के जरिए स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकती है।
चिकनपॉक्स का क्या कारण है?
चिकनपॉक्स का मुख्य कारण वैरिसेला जोस्टर नामक वायरस (VZV)है। देखा जाए तो चिकनपॉक्स फैलाने वाले वैरिसेला वायरस के लिए अभी कोई इलाज या टीका नहीं है। लेकिन इसके लक्षणों को मैनेज करके इसकी जटिलताओं को रोका जा सकता है। चिकनपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति इसके छाले निकलने से एक या दो दिन पहले तक संक्रमण फैलाता है, जब तक दाने सूख न जाएं। चिकनपॉक्स वायरस कई तरीकों से फैल सकता है। ये तरीके इस प्रकार हैं –
- संक्रमित व्यक्ति की श्वसन बूंदों से।
- संक्रमित व्यक्ति की लार के जरिए।
- संक्रमित व्यक्ति के छींकने से।
- संक्रमित व्यक्ति के खांसने से।
- संक्रमित व्यक्ति से करीब से बात करने से।
- संक्रमित व्यक्ति की निजी और इस्तेमाल की गई वस्तुओं जैसे तौलिया आदि को छूने से।
- संक्रमित व्यक्ति के डिस्पोजल कचरे से।
- संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर निकले छालों के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से।
- संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुए गए स्थानों को छूने से।
जिन लोगों को कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ है, या फिर जिन लोगों को चिकनपॉक्स की वैक्सीन नहीं लगी है, ऐसे लोगों को ये संक्रामक बीमारी होने का रिस्क ज्यादा रहता है। दूसरे बच्चों के साथ स्कूल, डे केयर में रहने वाले छोटे बच्चों को भी चिकनपॉक्स का हाई रिस्क रहता है।
चिकनपॉक्स के लक्षण क्या हैं?
देखा जाए तो चिकनपॉक्स के प्रारंभिक लक्षण आमतौर पर फ्लू और सर्दी खांसी जैसे होते हैं। इसलिए आमतौर पर लोग इन लक्षणों को नजरंदाज कर बैठते हैं। चिकनपॉक्स के शुरूआती लक्षण इस प्रकार हैं –
- बुखार आना
- थकान हावी होना
- भूख न लगना या कम लगना
- पेट में दर्द होना
- सिर में दर्द होना
- मांसपेशियों में ऐंठन होना
ऊपर लिखे लक्षण दिखने के एक या दो दिन बाद मरीज के शरीर पर उभरे हुए लाल छोटे छोटे दाने दिखने लगते है। ये दाने कई चरणों में दिखते हैं। ये चरण इस प्रकार हैं –
- पहला चरण – चेहरे, पीठ और छाती पर लाल धब्बे दिखते हैं।
- दूसरा चरण – इन दानों में खुजली होने लगती है।
- तीसरा चरण – इन दानों में पानी जैसा तरल पदार्थ भर जाता है और ये फफोले बन जाते हैं।
- चौथा चरण- कुछ समय बाद ये दाने सूखने लगते हैं औऱ इन पर पपड़ी जम जाती है।
आपको बता दें कि बच्चों की तुलना में वयस्कों में चिकनपॉक्स के लक्षण ज्यादा गंभीर होते हैं।
चिकनपॉक्स के रिस्क फैक्टर क्या हैं?
चिकनपॉक्स के रिस्क फैक्टर कई उम्र और स्थिति वाले लोगों में दिखते हैं।
- कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग चिकनपॉक्स का जल्दी शिकार होते हैं।
- नवजात शिशुओं में चिकनपॉक्स का ज्यादा रिस्क होता है
- गर्भवती महिलाओं को सामान्य लोगों की तुलना में चिकनपॉक्स का खतरा ज्यादा होता है।
आपको बता दें कि चिकनपॉक्स का सही समय पर सटीक इलाज न किया जाए तो ये दूसरी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जैसे एन्सेफलाइटिस, निमोनिया और बैक्टीरियल स्किन इंफेक्शन।
चिकनपॉक्स से बचाव कैसे किया जा सकता है?
चिकनपॉक्स से बचाव के लिए वैक्सिनेशन यानी टीकाकरण एक जरूरी और प्रभावी बचाव है। वैक्सीन लगवाना ही इसकी रोकथाम का का सबसे जरूरी तरीका है। इसके अलावा चिकनपॉक्स के संक्रमण के रिस्क को कम करने के लिए कुछ सावधानी भरे तरीके अपनाए जा सकते हैं। ये इस प्रकार हैं –
- संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना।
- नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना।
- सावर्जनिक और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतहों और वस्तुओं को छूने से बचना।
- खांसते या छींकते समय मुंह पर रूमाल रखना।
- जब तक छाले सूखा न जाए, घर पर ही आराम करना।
- घर और बाहर हाइजीन बनाए रखना।
- संक्रमित व्यक्ति की निजी और इस्तेमाल की गई वस्तुओं को छूने से बचना।
देखा जाए तो चिकनपॉक्स ऐसी संक्रामक बीमारी है जिसके लक्षणों को सही समय पर पहचान कर इसे फैलने से रोका जा सकता है। किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखने पर डॉक्टरी परामर्श औऱ वैरिसेला जोस्टर वायरस का टेस्ट महत्वपूर्ण है। इस टेस्ट की मदद से संक्रमण की पुष्टि हो सकती है। इससे इस संक्रामक बीमारी का सही समय पर उपचार संभव हो सकता है। चिकनपॉक्स की जांच के लिए आज ही संपर्क करें डॉ लाल पैथलेब्स को और अधिक जानकारी के लिए आज डॉ. लाल पैथलेब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
प्रश्न – क्या चिकनपॉक्स दाने दिखने से पहले भी संक्रामक हो सकता है?
जी हां, दाने दिखने से एक या दो दिन पहले ही चिकनपॉक्स संक्रमण फैला सकता है।
प्रश्न – चिकनपॉक्स आमतौर पर कितने दिन तक रहता है?
चिकनपॉक्स का संक्रमण लक्षण दिखने से लेकर छालों के सूखने तक यानी 5 से 10 दिन तक रह सकता है।
प्रश्न – क्या किसी व्यक्ति को एक से ज्यादा बार चिकनपॉक्स हो सकता है?
किसी व्यक्ति को एक से ज्यादा बाद चिकनपॉक्स होने दुर्लभ होता है। एक बार संक्रमण होने के बाद अधिकतर लोगों के शरीर में इसका इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो जाती है।








