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ब्रेन हेमरेज: कारण, लक्षण और निदान

Medically Approved by Dr. Shuchi

Table of Contents

ब्रेन हेमरेज

 

ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage in hindi) एक घातक मेडिकल इमरजेंसी है जो मस्तिष्क में रक्त धमनी के फटने पर पैदा होती है। इस स्थिति में सटीक और जल्द इलाज मुहैया न होने पर मरीज की जान खतरे में आ सकती है। इसे हेमेरेजिक स्ट्रोक और मस्तिष्क आघात भी कहा जाता है। ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage in hindi) ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज के मस्तिष्क की ब्लड वैसल यानी रक्त धमनी एकाएक फट जाती है और मस्तिष्क में ब्लीडिंग यानी रक्तस्राव होने लगता है। ये एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसके चलते मस्तिष्क में दबाव पैदा होता है और ऑक्सीजन के प्रवाह में बाधा आती है। ब्रेन हेमरेज में मरीज के लिए तत्काल सीटी स्कैन और एमआरआई टेस्ट की जरूरत होती है। आपको बता दें कि जहां ब्रेन स्ट्रोक (इस्केमिक) में मस्तिष्क की रक्त धमनी में खून का थक्का जम जाता है वहीं ब्रेन हेमरेज (हेमेरेजिक स्ट्रोक) में मस्तिष्क की रक्त धमनी फट जाती है। हालांकि दोनों ही स्थितियां मरीज के लिए घातक होती हैं लेकिन ब्रेन स्ट्रोक की अपेक्षा ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage meaning in hindi) ज्यादा घातक और जानलेवा होता है। चलिए इस लेख में जानते हैं कि ब्रेन हेमरेज क्या होता है और ब्रेन हेमरेज के कारण और लक्षण (brain hemorrhage symptoms in hindi)किस प्रकार दिखते हैं। साथ ही जानेंगे ब्रेन हेमरेज रिकवरी टाइम और ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage in hindi) की जांच के लिए सीटी स्कैन व एमआरआई स्कैन के महत्व के बारे में सब कुछ।

ब्रेन हेमरेज क्या होता है?

ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage meaning in hindi) वो सिचुएशन है जब मरीज के मस्तिष्क की रक्त धमनी फट जाती है और खून मस्तिष्क में निकल आता है। ऐसे में मस्तिष्क में दबाव बनने लगता है और ऑक्सीजन का भी प्रवाह रुक जाता है। रक्त धमनी के फटने से बाहर निकला खून ऊतकों में भर जाता है जिससे ऊतकों को क्षति पहुंचने लगती है। ये एक आपातकालीन और जानलेवा स्थिति है जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत महसूस होती है। अगर समय पर सटीक इलाज न मिले तो मरीज स्थाई रूप से विकलांग हो सकता है या फिर उसकी मौत तक हो सकती है।

ब्रेन हेमरेज के कारण क्या हैं?

ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage in hindi)के कई कारण हो सकते हैं जो जीवनशैली, चोट या अन्य आपात स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं। ब्रेन हेमरेज के कारण इस प्रकार हैं –

 

  • सिर में चोट लगना – किसी एक्सीडेंट या गिरने की वजह से मरीज के सिर में चोट लग सकती है जिससे मस्तिष्क की रक्त धमनी फट सकती है।
  • उच्च रक्तचाप लगातार हाई ब्लड प्रेशर रहने की वजह से मस्तिष्क की रक्त धमनियों पर दबाव बनता है और उनके फटने के खतरे बढ़ जाते हैं।
  • खून पतला करने वाली दवाओं का ज्यादा सेवन – जो लोग खून पतला करने वाली दवाओं का लगातार सेवन करते हैं, उन्हें दूसरे लोगों की तुलना में इस स्थिति का ज्यादा खतरा होता है।
  • कमजोर नसें – इस स्थिति को सेलेब्रल एन्यूरिज्म कहते हैं। ऐसे में मस्तिष्क में रक्त धमनी की दीवार कमजोर होने पर बीच बीच में खून का गुब्बारा सा बन जाता है जो दबाव पड़ने पर कभी भी फट जाता है।
  • ट्यूमर – मस्तिष्क में ट्यूमर की स्थिति भी ब्रेन हेमरेज का खतरा पैदा करती है।
  • आर्टेरिओविनस मेलफोर्मेशन – ये एक जन्मजात विकृति है जिसमें मरीज के मस्तिष्क की रक्त धमनियां जन्मजात रूप से कमजोर होती हैं।
  • विटामिन के की कमी – अगर शरीर में विटामिन के की कमी (ब्रेन हेमरेज किस विटामिन की कमी से होता है ) हो जाए तो शरीर में रक्त के थक्के जमने में दिक्कत आती है जिससे दिमाग में ब्लीडिंग का खतरा पैदा हो जाता है। विटामिन के शरीर में रक्त के थक्के जमने के लिए जरूरी माना जाता है

ब्रेन हेमरेज के लक्षण किस तरह दिखते हैं?

ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage in hindi) होने पर मरीज के शरीर पर कई तरह के लक्षण दिखते हैं। ये लक्षण (brain hemorrhage symptoms in hindi) इस प्रकार हैं –

 

  • अचानक सिर में तेज दर्द होना- इसे थंडरक्लैप भी कहते हैं क्योंकि ये अचानक और बहुत तीव्र स्तर पर होता है।
  • उल्टी होना – मरीज को मिचली और उल्टी आने लगती है।
  • बेहोशी – मरीज बेहोश हो सकता है।
  • कमजोरी – मरीज को बेहद कमजोरी और थकावट महसूस होने लगती है।
  • सुन्नपन – मरीज के शरीर के कुछ हिस्से सुन्न हो सकते हैं। मरीज के शरीर के कुछ हिस्सों को लकवा भी मार सकता है।
  • बोलने में दिक्कत – मरीज को बोलने में दिक्कत होने लगती है और जुबान लड़खड़ाने लगती है।
  • संतुलन बिठाने में दिक्कत – कई बार मरीज को उठने और बैठने में भी संतुलन बिठाने में दिक्कत (brain hemorrhage symptoms in hindi) होने लगती है।
  • चक्कर आना -मरीज को चक्कर आने लगते हैं।
  • धुंधली नजर – मरीज की नजर धुंधली होने लगती है।
  • मानसिक भ्रम – मरीज बोलने के साथ साथ समझने में असमर्थ होने लगता है।

 

ब्रेन हेमरेज रिकवरी टाइम कितना होता है?

ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage meaning in hindi)रिकवरी टाइम कुछ सप्ताह से लेकर कुछ महीने या फिर कुछ साल तक भी चल सकता है। ब्रेन हेमरेज रिकवरी समय दरअसल ब्रेन को हुए नुकसान, सर्जरी और मरीज की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। ब्रेन हेमरेज में ब्रेन की सर्जरी के बाद हल्के मामले आमतौर पर चार से छह सप्ताह में ठीक हो जाते हैं जबकि गंभीर मामलों में रिकवरी के लिए पहले छह माह काफी देखभाल से भरे होते हैं। इसके बाद कई तरह की थेरेपी (फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी) और रिहेबिलिटेशन की प्रक्रिया में कम से कम दो साल लग सकते हैं।

ब्रेन हेमरेज की जांच किस तरह होती है?

ब्रेन हेमरेज (brain hemorrhage meaning in hindi) होने पर तुरंत जांच की जरूरत होती है और ऐसे में डॉक्टर सबसे पहले सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन करते हैं। ये दोनों ही टेस्ट ब्रेन हेमरेज की पुष्टि, मरीज की स्थिति और दिमाग को हुई क्षति के आकलन के लिए काफी महत्वपूर्ण कहे जाते हैं। इसके अलावा सेरेब्रल एंजियोग्राफी और लंबर पंचर जैसे कई टेस्ट भी उपयोगी साबित होते हैं।

 

देखा जाए तो ब्रेन हेमरेज ऐसी आपातकालीन स्थिति है जिसमें तुरंत जांच और इलाज की जरूरत पड़ती है। अगर किसी मरीज में ब्रेन हेमरेज के लक्षण दिख रहे हैं तो तत्काल आपातकालीन सहायता लें। सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें

FAQ

1. ब्रेन हेमरेज क्या है?

ब्रेन हेमरेज वो स्थिति है जिसमें दिमाग की रक्त धमनी फट जाती है और खून निकल कर ऊतकों फैल जाता है। इससे मस्तिष्क पर दबाव बनता है और स्थिति जानलेवा हो सकती है।

2.ब्रेन हेमरेज में किस तरह की जांच होती है?

ब्रेम हेमरेज में तत्काल जांच के रूप में सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन की सलाह दी जाती है।

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