प्रोलैक्टिन क्या होता है? प्रोलैक्टिन बढ़ने के कारण और उपाय
- 23 Nov, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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एक नवजात शिशु के लिए मां की ब्रेस्टफीडिंग यानी स्तनपान उसके संपूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। देखा जाए तो डिलीवरी के बाद मां के स्तनों में दूध का पर्याप्त उत्पादन ही बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। प्रोलैक्टिन वो हार्मोन है मां के शरीर में दूध का उत्पादन करने के लिए जिम्मेदार होता है। दूध के उत्पादन के साथ साथ प्रोलैक्टिन स्तन ऊतकों के विकास और महिला की प्रजनन प्रणाली को भी मैनेज करता है। इसके अलावा प्रोलैक्टिन इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म को भी रेगुलेट करता है। आपको बता दें कि प्रोलैक्टिन एक महिला और खासतौर पर एक गर्भवती महिला के लिए बहुत महत्वपूर्ण हार्मोन है। शरीर में प्रोलैक्टिन के स्तर की जांच के लिए प्रोलैक्टिन टेस्ट (prolactin test in hindi) किया जाता है। इस टेस्ट کے जरिए अनियमित पीरियड, असंतुलित प्रजनन क्षमता, बांझपन और स्तनपान के दौरान कम दूध उत्पादन जैसी दिक्कतों का पता लगाया जाता है। इस लेख में जानते हैं कि प्रोलैक्टिन क्या होता है और प्रोलैक्टिन हार्मोन क्यों बढ़ता है। इसके साथ साथ ये भी जानेंगे कि प्रोलैक्टिन परीक्षण (prolactin test in hindi) कैसे किया जाता है और शरीर में प्रोलैक्टिन कितना होना चाहिए।
प्रोलैक्टिन क्या होता है?
प्रोलैक्टिन ऐसा हार्मोन है जो पिट्यूबरी ग्रंथि द्वारा रिलीज किया जाता है और खून में पाया जाता है। इसका मुख्य काम महिला के शरीर में स्तन ऊतकों का विकास करना और दूध का उत्पादन करना है। इसके साथ साथ प्रोलैक्टिन इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म को भी रेगुलेट करता है। प्रेग्नेंसी में प्रोलैक्टिन का शरीर में स्तर बढ़ जाता है, इसी वजह से डिलीवरी के बाद मां बच्चे को स्तनपान यानी ब्रेस्टफीडिंग करवा पाती है। हालांकि जब मां ब्रेस्टफीडिंग बंद कर देती है तो प्रोलैक्टिन का स्तर शरीर में सामान्य हो जाता है। कई बार स्तनपान न कराने वाली महिलाओं और यहां तक कि पुरुषों के शरीर में भी प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में प्रोलैक्टिन का स्तर मापने के लिए प्रोलैक्टिन टेस्ट(prolactin test in hindi) किया जाता है।
प्रोलैक्टिन हार्मोन क्यों बढ़ता है?
पिट्यूबरी ग्रंथि अगर ज्यादा प्रोलैक्टिन (प्रोलैक्टिन बढ़ने के कारण और उपाय) का उत्पादन कर रही है तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। प्रोलैक्टिन टेस्ट हार्मोन बढऩे के कारण इस प्रकार हैं –
- प्रोलैक्टिनोमा – अगर पिट्यूबरी ग्रंथि में ट्यूमर यानी प्रोलैक्टिनोमा पनप रहा है तो ज्यादा प्रोलैक्टिन का उत्पादन होने लगता है और शरीर में इसका स्तर बढ़ जाता है। हालांकि प्रोलैक्टिनोमा एक नॉन कैंसरिक ट्यूमर है लेकिन इसके चलते प्रोलैक्टिन के उत्पादन पर बुरा असर होता है।
- प्रेग्नेंसी पीरियड – प्रेग्नेंसी पीरियड के दौरान मां के शरीर को दूध उत्पादन के लिए तैयार करते वक्त प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ जाता है।
- हाइपोथायरॉडिज्म – अगर शरीर में थायरॉइड ग्रंथि सही से काम नहीं कर रही है तो इसका स्तर प्रोलैक्टिन के स्तर पर पड़ता है।
- किडनी की समस्या – किडनी संबंधी दिक्कतें इस हार्मोन का स्तर बढ़ाने के लिए जिम्मेदार कही जाती हैं।
- लिवर संबंधी दिक्कतें – लिवर सिरोसिस होने पर प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ जाता है।
- कुछ दवाएं – डिप्रेशन संबंधी कुछ दवाएं भी शरीर में इस हार्मोन का लेवल बढ़ा देती हैं।
- मेंटल स्ट्रेस – मानसिक तनाव इस हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है।
- पीसीओएस – पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की स्थिति में भी शरीर में इस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है।
प्रोलैक्टिन टेस्ट क्यों किया जाता है?
प्रोलैक्टिन टेस्ट (prolactin test in hindi) महिलाओं की प्रजनन संबंधी दिक्कतों का पता लगाने में मददगार साबित होता है। अनियमित पीरियड्स, बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान के दौरान दूध का कम उत्पादन, स्तन ऊतकों की दिक्कत या फिर बांझपन यानी इंफर्टिलिटी जैसी समस्याओं का पता लगाने में प्रोलैक्टिन टेस्ट (prolactin test in hindi) काफी महत्वपूर्ण कहा जाता है। आपको बता दें कि पुरुषों का भी प्रोलैक्टिन टेस्ट होता है जिसके जरिए कम यौनेच्छा या इंफर्टिलिटी की जांच की जाती है। प्रोलैक्टिन टेस्ट प्रोलैक्टिनोमा नामक ट्यूमर की पहचान करता है जो पिट्यूबरी ग्रंथि में पनपता है।
प्रोलैक्टिन परीक्षण कैसे किया जाता है?
प्रोलैक्टिन टेस्ट (prolactin test in hindi) एक ब्लड टेस्ट है। इसमें हेल्थ प्रोफेशनल व्यक्ति की बांह की नस से ब्लड सैंपल लेते हैं औऱ लैबोरेटरी में प्रोलैक्टिन हार्मोन की जांच के लिए भेजा जाता है। ये एक बेहद साधारण (prolactin test in hindi) टेस्ट है जिसके लिए किसी खास तैयारी की जरूरत महसूस नहीं होती है। हालांकि अगर मरीज कोई दवा पहले से खा रहा है तो उसे डॉक्टर को जानकारी देनी चाहिए। आपको बता दें कि गर्भनिरोधक दवाएं, हाई ब्लड प्रेशर की दवा या फिर एंटीडिप्रेसेंट दवाएं प्रोलैक्टिन टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रोलैक्टिन कितना होना चाहिए?
देखा जाए तो प्रोलैक्टिन का स्तर जैंडर यानी लिंग और फिजिकल कंडीशन के आधार पर अलग अलग हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में इस हार्मोन का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जो काफी सामान्य है।
अगर कोई महिला प्रेग्नेंट नहीं है और उसके शरीर में प्रोलैक्टिन की रेंज ज्यादा आ रही है तो इसकी वजह प्रोलैक्टिनोमा, हाइपोथायरॉडिज्म या फिर कुछ दवाएं हो सकती हैं। पुरुषों में अगर इस हार्मोन का स्तर सामान्य सीमा से ज्यादा आ रहा है तो इसकी वजह इंफर्टिलिटी, प्रोलैक्टिनोमा या हाइपोथायरॉडिज्म हो सकता है। वहीं अगर प्रोलैक्टिन का स्तर सामान्य रेंज से कम आ रहा है तो पिट्यूबरी ग्रंथि से जुड़े एक दुर्लभ सिंड्रोम यानी शीहान सिंड्रोम का संकेत हो सकता है।
प्रोलैक्टिन ऐसा हार्मोन है जो महिला की प्रजनन प्रणाली को रेगुलेट करता है और बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान के दौरान दूध उत्पादन में मदद करता है। शरीर में इस हार्मोन का सामान्य से ज्यादा या कम स्तर कई बीमारियों का संकेत माना जा सकता है। डॉक्टरी परामर्श के पश्चात प्रोलैक्टिन टेस्ट (prolactin test in hindi) के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
प्रोलैक्टिन क्या होता है?
प्रोलैक्टिन ऐसा हार्मोन है जो पिट्यूबरी ग्रंथि में बनता है। इस हार्मोन का मुख्य काम स्तनपान के दौरान दूध उत्पादन करना और स्तन ऊतकों का विकास करना है।
प्रोलैक्टिन टेस्ट किस तरह किया जाता है?
प्रोलैक्टिन टेस्ट (prolactin test in hindi) के दौरान ब्लड सैंपल लिया जाता है और उसे लैबोरेटरी में भेजा जाता है, जहां प्रोलैक्टिन के स्तर की जांच की जाती है।








