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सिफलिस: लक्षण, कारण, चरण और जांच

Medically Approved by Dr. Shuchi

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Syphilis in hindi

 

सिफलिस (Syphilis) एक घातक और खतरनाक यौन संचारित संक्रमण (STI) है जो असुरक्षित यौन संबंधों के चलते फैलता है। सिफलिस को हिंदी में उपदंश भी कहा जाता है। ये बीमारी बेहद संक्रामक कही जाती है और यौन संपर्क के साथ साथ संक्रमित मां से भ्रूण तक को शिकार बना सकती है। हालांकि सटीक इलाज के बल पर सिफलिस का इलाज संभव है लेकिन अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज के ह्रदय और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंचने के खतरे बढ़ जाते हैं। इस लेख में जानते हैं कि सिफलिस क्या है और सिफलिस के लक्षण किस तरह दिखाई देते हैं। साथ ही जानेंगे सिफलिस टेस्ट और इससे बचाव के बारे में सब कुछ।

सिफलिस क्या है?

सिफलिस (उपदंश) )एक यौन संचारित बैक्टीरियल इंफेक्शन है। ये संक्रमण ट्रेपोनेमा पैडिलम नामक बैक्टीरिया के चलते एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। असुरक्षित यौन संबंध के जरिए फैलने वाला ये संक्रमण जननांगों और त्वचा पर घाव और चकत्तों के रूप में दिखता है। सिफलिस (उपदंश) का संक्रमण योनि, गुदा और मुख मैथुन के जरिए फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के जननांग सहित होठ और मुंह पर सिफलिस के घावों के जरिए ये संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। अगर किसी मरीज की त्वचा पर संक्रमित घाव है तो उसे छूने पर भी दूसरा व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। सिफलिस गर्भवती महिला मरीज के जरिए उसके बच्चे तक भी फैल सकता है जिसे जन्मजात सिफलिस कहा जाता है।

सिफलिस के लक्षण किस तरह दिखते हैं?

सिफलिस (सिफलिस क्या है) का बैक्टीरिया बहुत ही साइलेंट तरीके से शरीर पर असर दिखाता है। सिफलिस के लक्षण कुछ चरणों में दिखते हैं। कई बार लक्षण दिखने बंद हो जाते हैं लेकिन बैक्टीरिया शरीर में जीवित रहता है। सिफलिस के (उपदंश के लक्षण)चरण बद्ध लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  • पहला चरण – जननांगों के आस पास घाव दिखना। अक्सर ये घाव दर्द रहित होते हैं औऱ आमतौर पर तीन से छह सप्ताह के बाद दिखने बंद हो जाते हैं।
  • दूसरा चरण – त्वचा पर चकत्ते दिखाई देना। पूरे शरीर पर चकत्ते दिखने लगते हैं। यहां तक कि हथेलियों और पैरों के तलवों पर भी चकत्ते दिखते हैं।

 

सिफलिस के अन्य लक्षण (उपदंश के लक्षण) इस प्रकार दिखते हैं –

 

  • लिंफ नोड्स में सूजन
  • गले में खराश पैदा होना
  • मरीज को थकान का अनुभव होना
  • बुखार आना
  • बालों का झड़ना
  • एकाएक वजन में गिरावट होना
  • सिर में दर्द होना
  • मांसपेशियों में दर्द होना

 

कई बार सिफलिस लक्षण रहित होता है और सालों तक बैक्टीरिया शरीर में जीवित रहता है। इस चरण को लेटेंट सिफलिस कहा जाता है। सिफलिस का सबसे गंभीर चरण टेरटियेरी सिफलिस कहलाता है जिसमें संक्रमण सालों बाद फिर से एक्विट होकर शरीर के कई अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। ये दौर जानलेवा तक साबित हो सकता है क्योंकि इस दौरान आंखों, दिल, दिमाग और खून की नलिकाओं को क्षति पहुंचती है।

 

महिलाओं में सिफलिस के लक्षण पुरुषों की अपेक्षा कुछ अलग होते हैं। महिलाओं में सिफलिस के लक्षण लिंफ नोड्स में सूजन, बुखार, बाल झड़ने, थकान, जननांगों में घाव और मस्से, जोड़ों में दर्द के रूप में दिखते हैं। वहीं पुरुष में सिफलिस के लक्षण लिंग और आस पास मस्से जैसे घाव के रूप में दिखते हैं जो अक्सर दर्द रहित होते हैं। मुंह और होठों के आस पास, मलाशय के आस पास दिखने वाले ये घाव और मस्से कुछ समय बाद दिखने बंद हो जाते हैं लेकिन बैक्टीरिया शरीर में जीवित रहता है।

सिफलिस कितने प्रकार का होता है?

सिफलिस दो प्रकार का होता है। पहला न्यूरोसिफलिस और दूसरा ऑक्यूलर सिफलिस। न्यूरो सिफलिस में जहां बैक्टीरिया का संक्रमण रीढ़ की हड्डी और दिमाग पर असर डालता है। वहीं ऑक्यूलर सिफलिस में आंख और कान संक्रमण की चपेट में आते हैं।

सिफलिस की जांच किस तरह होती है?

सिफलिस की जांच (सिफलिस टेस्ट) के लिए मरीज का ब्लड टेस्ट किया जाता है। इस ब्लड टेस्ट के तहत मरीज के VDLR और RPR टेस्ट किए जाते हैं। इन टेस्ट के जरिए मरीज के शरीर में सिफलिस बैक्टीरिया से लड़ने वाली एंटीबॉडीज की जांच की जाती है। ब्लड टेस्ट के अलावा सिफलिस की जांच के लिए ट्रेपोनेमल टेस्ट भी किया जाता है। ब्लड टेस्ट के साथ साथ स्बैव टेस्ट के जरिए भी शरीर में सिफलिस के बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच की जाती है। इस टेस्ट में मरीज के मुंह से तरल पदार्थ का सैंपल लिया जाता है औऱ उसकी माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है।

 

सिफलिस के इलाज में एंटीबायोटिक्स का बहुत महत्व है। एंटीबायोटिक्स के तौर पर मरीज को पेनसिलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं। अगर किसी मरीज को पेनसिलिस से एलर्जी है तो दूसरे एंटीबायोटिक्स भी उपचार में सहायक होते हैं।

सिफलिस से बचाव किस तरह किया जा सकता है?

देखा जाए तो सिफलिस (सिफलिस क्या है) एक यौन संक्रमण है और ऐसे में असुरक्षित यौन संबंधों से दूरी बनाकर इससे बचाव किया जा सकता है। इसके साथ साथ यौन संबंधों के सुरक्षित माध्यम जैसे कंडोम आदि उपयोग करना इसमें महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। एक ही साथी से यौन संबंध बनाना और नियमित तौर पर जांच करवाना भी इसके बचाव में मददगार साबित होते हैं।

 

सिफलिस एक गंभीर यौन संक्रामक बीमारी है। इसके लक्षणों को सही समय पर पहचान कर इसका सटीक उपचार संभव है। अगर किसी व्यक्ति में सिफलिस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो डॉक्टरी सलाह लें। डॉक्टरी सलाह के पश्चात टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें

FAQ

सिफलिस किस तरह फैलता है?

सिफलिस का संक्रमण असुरक्षित यौन संबंधों के चलते फैलता है। योनि, गुदा और मुख मैथुन के साथ साथ संक्रमित त्वचा के घाव के जरिए भी ये दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। इसके अलावा संक्रमित मां के जरिए ये होने वाले शिशु को भी संक्रमित कर सकता है।

सिफलिस के लक्षण किस प्रकार दिखते हैं?

सिफलिस के लक्षणों में जननांगों के आस पास मस्से और घाव दिखते हैं। इसके पश्चात त्वचा पर चकत्ते दिखते हैं। मरीज को बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, वजन में कमी के साथ साथ बाल झड़ने की भी समस्या होती है।

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