एक्जिमा क्या है? जानिए इसके प्रकार, लक्षण और इलाज के तरीके
- 19 Nov, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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त्वचा हमारे शरीर का बेहद नाजुक और संवेदनशील हिस्सा है और अक्सर मौसम बदलने पर या संक्रमण के चलते त्वचा पर बुरा असर पड़ता है। एक्जिमा (eczema in hindi) त्वचा संबंधी ऐसी बीमारी है जिसमें त्वचा रूखी, लाल, दानेदार और खुजलीदार हो जाती है। हालांकि एक्जिमा (eczema in hindi) संक्रामक बीमारी नहीं है लेकिन ये लंबे समय तक रहती है और समय समय पर उभरती है। एक्जिमा को एटोपिक डर्मेटाइटिस कहते हैं। देखा जाए तो एक्जिमा लंबे समय तक रहता है और मौसम बदलने, तापमान में बदलाव और यहां तक कि तनाव के चलते भी ये गंभीर रूप धारण कर लेता है। एक्जिमा में त्वचा पर खुजली होती है, त्वचा पर लाल दाने निकलते हैं जो पानी से भरे होते हैं। इसके अलावा त्वचा रूखी और खुश्क हो जाती है और उस पर पपड़ी जमने लगती है। इस लेख में जानते हैं कि एक्जिमा क्या है, और एक्जिमा के लक्षण क्या हैं। साथ ही जानेंगे एक्जिमा के कारण और उपचार के बारे में सब कुछ।
एक्जिमा क्या है?
एक्जिमा (eczema in hindi)त्वचा से जुड़ी एक आम बीमारी है जिसमें त्वचा पर खुश्की और पपड़ी जमने लगती है। इस बीमारी में त्वचा रूखी हो जाती है और उसमें जलन और सूजन के साथ साथ लालिमा भी दिखने लगती है। कई बार मरीज की स्किन पर लाल चकत्ते और दाने निकलने लगते हैं। इन पर खुजली होती है और उनके फूटने पर फ्लुइड यानी तरल पदार्थ निकलने लगता है। देखा जाए तो एक्जिमा की अवधि अलग अलग होती है। कई बार ये सही इलाज के चलते हफ्तो में ठीक हो जाता है और कई बार ये कभी उपचार योग्य ही नहीं हो पाता। इसके लक्षण मौसम में बदलाव के चलते आते जाते रहते हैं। एक्जिमा त्वचा के बिना ढके हिस्सों पर ज्यादा दिखता है जैसे चेहरा, हाथ पैर, गर्दन और धड़ आदि। कई बार इसका प्रकोप घुटनों,गर्दन, कलाई,कान के पीछे और चेहरे पर दिखता है।छोटे बच्चों के सिर में एक्जिमा का संभावना ज्यादा होती है क्योंकि जगह ज्यादा नर्म और संवेदनशील होती है।
एक्जिमा के कारण क्या हैं?
एक्जिमा (eczema in hindi) के कई कारण हो सकते हैं जो आनुवांशिकी और पर्यावरण से जुड़े होते हैं। एक्जिमा के कारण इस प्रकार हैं –
- फिलाग्रीन जीन – एक्जिमा का मुख्य कारण फिलाग्रीन नामक प्रोटीन है जो मौसम में बदलाव, पर्यावरण में बदलाव एलर्जी, कैमिकल के संपर्क में आने के कारण कम होने लगता है। फिलाग्रीन जीन के कम होने से त्वचा की बाहरी परत कमजोर होने लगती है और त्वचा बैक्टीरिया, वायरस और एलर्जी का शिकार होने लगती है।
- आनुवांशिक कारण – आनुवांशिक कारणों से भी त्वचा में फिलाग्रीन जीन की कमी हो जाती है। कई बार पारिवारिक इतिहास के चलते शरीर में फिलाग्रीन जीन में म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन होने लगता है और त्वचा में इस प्रोटीन की कमी होने लगती है।
- पर्यावरण से जुड़े कारण – पर्यावरण से जुड़े कारण जैसे कैमिकल युक्त साबुन, इत्र, कैमिकल, कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट भी एक्जिमा का कारण बन जाते हैं। इसके साथ साथ हवा में मौजूद परागकण, धूल, धूप और अत्यधिक नमी भी एक्जिमा को ट्रिगर करती है।
- स्ट्रेस – तनाव एक्जिमा को ट्रिगर करता है। भावनात्मक तनाव के दौरान एक्जिमा के लक्षण ज्यादा दिखने लगते हैं।
एक्जिमा कितने प्रकार का होता है?
एक्जिमा (eczema in hindi)कई प्रकार का होता है और इसके सभी प्रकार अपनी खास दिक्कतें और ट्रिगर पैदा करते हैं। एक्जिमा के प्रकार इस तरह हैं –
- एटोपिक डर्मेटाइटिस
- डिहाइड्रोटिक एक्जिमा
- कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस
- न्यूरोडर्माटाइटिस
- न्यूमुलर एक्जिमा
- सेबोरहाइट डर्मेटाइटिस
- स्टेटिस डर्मेटाइटिस
एक्जिमा के लक्षण किस तरह दिखते हैं?
एक्जिमा के लक्षण त्वचा के किसी भी हिस्से पर दिख सकते हैं। ये लक्षण एक सप्ताह से लेकर महीनों तक बने रहते हैं और कई बार आते जाते रहते हैं। एक्जिमा के लक्षण इस प्रकार हैं –
- रूखी त्वचा – त्वचा अचानक रूखी और बेजान दिखने लगती है।
- त्वचा का संवेदनशील होना -त्वचा बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाती है और इस पर हर चीज जल्दी असर करती है।
- त्वचा पर लगातार खुजली होना – त्वचा पर बहुत ज्यादा और लगातार खुजली होने लगती है।
- त्वचा पर पानीदार दाने – खुजली के बाद त्वचा पर पाने से भरे दाने निकलने लगते हैं।
- त्वचा पर लाल, बैंगनी या नारंगी रंग के दाने – त्वचा पर लाल दाने निकलते हैं।
- त्वचा पर लालिमा आना – त्वचा पर जगह जगह रैडनेस यानी लालिमा दिखने लगती है।
- त्वचा में सूजन आना – बार बार खुजाने पर त्वचा में सूजन आ जाती है।
- त्वचा पर पपड़ी जमना – रूखी त्वचा पर पपड़ी जमने लगती है।
- त्वचा के दानों से पानी रिसना – त्वचा के दानों पर निकलने वाला पानी संक्रमण को और ज्यादा ट्रिगर कर देता है।
- त्वचा पर चमड़े जैसे रैशेज दिखना – त्वचा के रूखेपन के चलते उस पर चमडे जैसे रैशेज दिखाई देते हैं।
- त्वचा पर कुछ जगहों पर नीले या काले पैचेज दिखाई देना
- कई बार त्वचा ज्यादा रूखी होने पर फटने भी लगती है।
- छोटे बच्चों और शिशुओं के गालों और कोहनी पर खुजली और पपड़ी जमना
- बच्चों के सिर में रूखी और खुजलीदार त्वचा के पैचेज
एक्जिमा की जांच किस तरह की जाती है?
एक्जिमा (eczema in hindi) एक लंबी और त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी के तौर पर देखा जाता है। एक्जिमा के सटीक मैनेजमेंट के लिए सही समय पर इसकी पहचान होना काफी महत्वपूर्ण हैं। एक्जिमा की जांच के लिए डॉक्टर फिजिकल जांच के साथ साथ कुछ खास टेस्ट भी करते हैं। एक्जिमा की जांच इन तरीकों से होती है –
- फिजिकल टेस्ट – डॉक्टर शरीर पर दिख रहे लक्षणों जैसे खुजली, दाने, लालिमा और पैचेज की जांच करते हैं।
- ब्लड टेस्ट – एलर्जी की संभावना का पता लगाने के लिए कई बार ब्लड टेस्ट का सुझाव दिया जाता है।
- एलर्जी टेस्ट – एलर्जी की जांच के लिए कई तरह के एलर्जी टेस्ट जैसे पैच टेस्ट और फूड टेस्ट किए जाते हैं।
- स्किन बायोप्सी – अगर एलर्जी टेस्ट के बाद भी स्पष्ट नहीं हो रहा है तो स्किन बायोप्सी की सलाह दी जाती है।
अगर किसी व्यक्ति में एक्जिमा के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टरी परामर्श के बाद डॉ. लाल पैथलैब्स में संबंधित टेस्ट बुक करवाएं। टेस्ट बुक करवाने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
एक्जिमा क्या है?
एक्जिमा त्वचा संबंधित रोग है जिसमें त्वचा पर खुजली, दाने, लालिमा, खुश्की होने लगती है।
एक्जिमा के कारण क्या हैं?
एक्जिमा फिलाग्रीन नाम प्रोटीम की कमी के चलते होता है जो आनुवांशिक और दूसरे कारणों से त्वचा का बाहरी परत में कम होता है और त्वचा बाहरी हमलों का जल्दी शिकार होती है।








