मौसम बदलते समय ठंड लगकर बुखार आना किसका लक्षण है
- 27 Dec, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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बदलता मौसम अपने आप में कई बदलाव लेकर आता है। इन बदलावों में मानसिक और शारीरिक बदलाव भी शामिल होते हैं। बदलते मौसम में अक्सर ठंड लगकर कंपकंपी आती है और हल्का बुखार आ जाता है। ठंड लगने के कारण होने वाले बुखार को आम भाषा में अंदरूनी बुखार भी (अंदरूनी बुखार क्यों होता है) कहा जाता है। बदलते मौसम में ठंड लगने के बाद बुखार आना मौसमी या वारयल संक्रमण की वजह हो सकता है। जब शरीर को ठंड लगती है तो शरीर अपने तापमान को नियंत्रित करने के लिए खुद को गर्म करने की कोशिश करता है और इसी क्रम में शरीर का तापमान ज्यादा हो जाता है जिसे ठंड में बुखार आना कहते हैं। दरअसल ठंड के साथ साथ मौसम बदलने पर शरीर बाहरी संक्रमण से बचाव के लिए भी खुद को गर्म करता है जिससे बुखार आता है। इस लेख में जानते हैं कि बदलते मौसम में ठंड लगकर बुखार आना किसका लक्षण है और इसके क्या कारण हो सकते हैं। इसके साथ ही जानेंगे अंदरूनी बुखार के लक्षण क्या हैं और बुखार टेस्ट (Fever Test) कब करवाना चाहिए।
ठंड लगने पर बुखार क्यों आता है?
आमतौर पर जब मौसम बदलता है तो शरीर में ठंड की वजह से कंपकंपी आने लगती है। ठंड की वजह से कंपकंपी आने के बाद शरीर बुखार की चपेट में आ जाता है जिसे ठंड का बुखार (ठंड लगने पर बुखार आना किसका लक्षण है) भी कहते हैं। ये बुखार मौसम में बदलाव की वजह से आता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। पहली वजह है कि तेज ठंड में जब शरीर खुद को गर्म करने की कोशिश करता है तो मांसपेशियों में तेजी से सिकुड़न आती है, जिससे शरीर में कंपकंपी महसूस होती है। अंदरूनी बुखार दरअसल कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर को ठंड से बचाने की प्रक्रिया है। ऐसे में शरीर का अंदरूनी तापमान बढ़ता है जिसे अंदरूनी बुखार माना जाता है। दूसरी और खास वजह है बाहरी बैक्टीरिया और संक्रमण का हमला। मौसम में बदलाव की वजह से कई मौसमी संक्रमण और वायरस जैसे फ्लू इंफ्लूएंजा, डेंगू, निमोनिया शरीर पर हमला करते हैं। ऐसे में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्ट्म इन संक्रमणों से लड़ने के लिए शरीर का तापमान बढ़ा देता है जिससे शरीर को ठंड लगती है और बुखार (ठंड लगने पर बुखार आना किसका लक्षण है) आ जाता है। ठंड लगने पर बुखार आने के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं –
- वायरल संक्रमण
- बैक्टीरियल संक्रमण
- ज्यादा ठंड में इम्यून सिस्टम का सक्रिय होना
- यूटीआई (यूरिनली ट्रेक्ट इंफेक्शन)
- फंगल संक्रमण
- कमजोर इम्यून सिस्टम
ठंड लगने पर बुखार के क्या लक्षण हैं?
ठंड लगने पर बुखार के कुछ सामान्य लक्षण (ठंड लगने पर बुखार आना किसका लक्षण है) दिखाई देते हैं जो अलग अलग व्यक्तियों में अलग अलग दिख सकते हैं। ठंड लगने पर बुखार आने के लक्षण इस प्रकार हैं–
- शरीर में दर्द महसूस होना
- मांसपेशियों में दर्द और जकड़न महसूस होना
- सिर में दर्द होना
- नाक बहना
- गला बैठना
- गले में खराश और दर्द होना
- थकान हावी होना
- उदासी और चिड़चिड़ापन महसूस होना
- पेट में दर्द होना
- कुछ मामलों में मरीज को दस्त भी लग सकते हैं।
अंदरूनी बुखार क्यों होता है?
ठंड के मौसम में जब कंपकंपी आने के बाद बुखार होता है तो उसे अंदरूनी बुखार कहा जाता है। अंदरूनी बुखार अक्सर बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण के चलते (अंदरूनी बुखार क्यों होता है) होता है और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली इसकी वजह हो सकती है। इस बुखार की खास बात ये है कि इस दौरान थर्मामीटर से तापमान लेने पर शरीर का तापमान सामान्य दिखता है लेकिन शरीर को ठंड लगती है और कंपकंपी आती है। शरीर का तापमान बाहर से सामान्य होता है लेकिन शरीर में अंदर से बेचैनी महसूस होती है और ऐसा प्रतीत होता है कि शरीर बुखार की चपेट में है। ऐसा अक्सर तब होता है जब शरीर पर बाहरी संक्रमण जैसे वायरल संक्रमण या बैक्टीरियल संक्रमण का हमला होता है और शरीर का इम्यून सिस्टम इन हमलों के खिलाफ लड़ रहा होता है। इसी दौरान शरीर का तापमान अंदरूनी तौर पर बढ़ जाता है जिसे अंदरूनी बुखार कहते हैं। कई बार शरीर में हार्मोन में उतार चढ़ाव की वजह से भी अंदरूनी बुखार (अंदरूनी बुखार क्यों होता है) आ जाता है। इसके अलावा किसी बीमारी से रिकवरी की प्रक्रिया के दौरान या शरीर के ज्यादा कामकाज करने के बाद हुई थकान के चलते भी शरीर का तापमान (अंदरूनी बुखार क्यों होता है) अंदर से बढ़ जाता है।
अंदरूनी बुखार के लक्षण क्या हैं?
अंदरूनी बुखार के लक्षण आमतौर पर फ्लू और सामान्य सर्दी खांसी की तरह दिखते हैं। अंदरूनी बुखार के लक्षण इस प्रकार हैं –
- शरीर में कंपकंपी छूटना
- ठंड लगना
- थर्मामीटर में तापमान सामान्य दिखना
- शरीर में दर्द होना
- मांसपेशियों में जकड़न औऱ अकड़न महसूस होना
- थकान और कमजोरी महसूस होना
- सिर में दर्द बना रहना
- कई बार अचानक पसीना आना
- बार बार गला सूखना
- सांस लेने में तकलीफ महसूस होना
- जोड़ों में दर्द होना
- छाती या पेट में दर्द होना
कई बार अंदरूनी बुखार लंबा चलने पर टाइफाइड या निमोनिया जैसी बीमारियों का भी खतरा पैदा हो जाता है। आमतौर पर वायरल बुखार तीन से सात दिन तक चलता है। लेकिन अगर बुखार इससे ज्यादा समय तक रहे तो मरीज को कुछ टेस्ट (fever test) करवाने की सलाह दी जाती है ताकि अंदरूनी संक्रमण की स्थिति का पता चल सके।
अंदरूनी बुखार से बचाव कैसे किया जा सकता है?
अंदरूनी बुखार तब होता है जब शरीर पर बाहरी संक्रमण के हमले के खिलाफ इम्यून सिस्टम प्रतिक्रिया देता है। देखा जाए तो अंदरूनी बुखार बाहरी संक्रमण से हमले के दौरान होने वाली एक सामान्य प्रोसेस है जिसमें शरीर का तापमान कुछ समय बाद अपने आप सामान्य हो जाता है। आमतौर पर घरेलू उपचार से अंदरूनी बुखार से आराम पाया जा सकता है। इस दौरान मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए। इस दौरान शरीर को निर्जलीकरण से बचाना चाहिए और पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए। इस दौरान सादा और हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर की सलाह पर कुछ दवाओं का सेवन भी किया जा सकता है।
अंदरूनी बुखार यूं तो कुछ दिन में खुद ही ठीक हो जाता है लेकिन अगर बुखार लंबे समय तक रहे और इस दौरान मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो या ज्यादा कमजोरी महसूस हो तो डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिए। डॉक्टरी सलाह के पश्चात फीवर टेस्ट (fever test) के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप।
FAQ
- ठंड लगकर बुखार आने के क्या लक्षण हैं?
ठंड लगकर बुखार आने पर सिर में दर्द होता है और शरीर भी दर्द करता है। इस दौरान तेज ठंड के साथ कंपकंपी आती है और मरीज को थकान महसूस होती है। - अंदरूनी बुखार के लक्षण क्या हैं?
अंदरूनी बुखार के लक्षणों में तेज ठंड लगना, सिर और शरीर में दर्द, मांसपेशियों की अकड़न और थतकावट शामिल हैं।





