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ब्लड कैंसर जांच: CBC, बोन मैरो बायोप्सी और जेनेटिक टेस्टिंग

Medically Approved by Dr. Shuchi

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कैंसर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी कही जाती है। खासतौर पर ब्लड कैंसर काफी गंभीरतम कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकडों पर गौर करें तो हर साल दुनिया भर में करीब 7 लाख से ज्यादा लोगों की मौत ब्लड कैंसर के चलते होती है। अकेले भारत में ही हर साल एक लाख से ज्यादा लोग ब्लड कैंसर के चलते जान गंवा देते हैं। ब्लड कैंसर (blood cancer) शरीर की ब्लड वैसल्स यानी रक्त कोशिकाओं में होता है। जब डीएनए में उत्परिवर्तन के चलते ये कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और दूसरे ऊतकों को
नुकसान पहुंचाती हैं और ट्यूमर (ब्लड कैंसर में क्या परेशानी होती है) बनने लगता है।

 

ब्लड कैंसर के लक्षणों को समय रहते पहचानने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। इन परीक्षणों में CBC,
बोन मैरो टेस्ट (बोन मैरो बायोप्सी) और जेनेटिक टेस्टिंग प्रमुख टेस्ट कहे जाते हैं। इस लेख में ब्लड
कैंसर की जांच के लिए किए जाने वाले टेस्ट CBC, बोन मैरो बायोप्सी और जेनेटिक टेस्टिंग के बारे में
जानते हैं।

CBC टेस्ट क्या होता है?

सीबीसी (CBC Test) टेस्ट का मतलब है कंप्लीट ब्लड काउंट। CBC एक ब्लड टेस्ट है जो रक्त कोशिकाओं के
स्तर की माप करता है। CBC ब्लड टेस्ट के जरिए मरीज के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं,
प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन के स्तर की जांच की जाती है। सीबीसी टेस्ट के जरिए शरीर में एनीमिया और
ब्लड इंफेक्शन का भी पता चलता है।

 

आमतौर पर ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर की जांच के लिए CBC एक सटीक और सुरक्षित टेस्ट कहा जाता है।
अगर इस टेस्ट में लाल रक्त कोशिकाओं या सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या नॉर्मल रेंज से कम या ज्यादा
होती है तो ये ब्लड कैंसर का संकेत माना जा सकता है। हालांकि सीबीसी पूर्ण रूप से शरीर में ब्लड
कैंसर की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे जाकर फ्लो साइटोमेट्री और
पेरिफेरल ब्लड स्मीयर जैसे टेस्ट की अनुशंसा की जाती है।

 

ऐसे में CBC टेस्ट ब्लड कैंसर की शुरूआती संभावित पहचान के लिए महत्वपूर्ण साबित होता है।

बोन मैरो टेस्ट क्या है?

बोन मैरो टेस्ट ब्लड कैंसर की पहचान के लिए किया जाने वाला एक टेस्ट है जिसे बोन मैरो बायोप्सी और
बोन मैरो एस्पिरेशन भी कहा जाता है। इस प्रोसेस में मरीज की हड्डी के अंदर से अस्थि मज्जा यानी
बोन मैरो का एक छोटा सा टिश्यू सैंपल के रूप में निकाला जाता है।

 

बोन मैरो टेस्ट(bone marrow test) से पहले मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है। इसके बाद एक मोटी सिरींज (कोरिंग डिवाइस)
के जरिए बोन मैरो का एक छोटा हिस्सा निकाला जाता है। बोन मैरो टेस्ट में सैंपल आमतौर पर पेल्विस की
पिछली हड्डी या छाती की हड्डी से निकाला जाता है। इस सैंपल को लैब में जांच के लिए भेजा जाता है।

बोन मैरो टेस्ट किसलिए किया जाता है?

 

बोन मैरो टेस्ट के जरिए ल्यूकेमिया और लिम्फोमा (lymphoma) जैसे ब्लड कैंसर की पहचान की जाती है।
बोन मैरो टेस्ट ब्लड कैंसर की जांच और उसकी स्टेज का आकलन करने में मददगार होता है।

 

बोन मैरो टेस्ट से पता चलता है कि ब्लड कैंसर कितना फैला है और क्या यह बोन मैरो तक पहुंचा है। इसके
साथ ही यह भी पता चलता है कि क्या बोन मैरो में कोई ट्यूमर पनप रहा है या नहीं। ब्लड कैंसर के इलाज की
प्रोग्रेस पर नजर रखने के लिए भी डॉक्टर समय-समय पर बोन मैरो टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

जेनेटिक टेस्टिंग क्या है?

 

जेनेटिक टेस्टिंग एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसे आम भाषा में डीएनए टेस्टिंग भी कहा जाता है। जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए ब्लड कैंसर के संभावित खतरे और ब्लड कैंसर के प्रकार की पहचान का जाती है। जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए ब्लड कैंसर युक्त कोशिकाओं में विशिष्ट जीन परिवर्तन की जांच की जाती है। ऐसे लोग जिनके परिवार और पारिवारिक इतिहास में ब्लड कैंसर के मरीज रहे हैं, ऐसे लोगों में जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए व्यक्ति के डीएनए में विशिष्ट जीन परिवर्तन की जांच की जाती है। जेनेटिक टेस्टिंग के लिए सीबीसी और बोन मैरो टेस्ट के सैंपल की जांच की जाती है। इन सैंपल के जरिए व्यक्ति के डीएनए में होने वाले आनुवांशिक बदलाव की जानकारी मिलती है। ये टेस्ट सटीक तौर पर वंशानुगत जीन उत्परिवर्तन का पता लगाता है जो कैंसर का रिस्क पैदा कर सकते हैं।

 

जेनेटिक टेस्टिंग के लिए सीबीसी और बोन मैरो बायोप्सी के नमूनों को लैब भेजा जाता है। लैब में एक्सपर्ट इन सैंपल में कैंसर कोशिकाओं के डीएनए में जीन परिवर्तन की जांच करते हैं। इस टेस्ट के जरिए न केवल कैंसर के प्रकार की जांच होती है बल्कि साथ ही ये भी पता लगाया जा सकता है कि इस स्थिति में कौन सा इलाज सटीक और उपयुक्त साबित होगा।

जेनेटिक टेस्टिंग के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं

 

  1. मोलेक्यूलर टेस्ट – यह एक या एक से अधिक जीन में होने वाले विशिष्ट उत्परिवर्तन की पहचान करता है।
  2. क्रोमोसोमल टेस्ट – इसमें क्रोमोसोम सीक्वेंस का विश्लेषण कर संरचनात्मक असामान्यता या क्रोमोसोम की संख्या ज्यादा/कम होने की पहचान की जाती है।
  3. बायोकैमिकल जेनेटिक स्टडी – इसमें क्रोमोसोम असामान्यता के कारण प्रोटीन की एक्टिविटी मापी जाती है। प्रोटीन स्तर में असंतुलन कैंसर रिस्क का संकेत देता है।

 

ब्लड कैंसर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है जिसमें सही समय पर सटीक जांच इलाज के लिए काफी महत्वपूर्ण
साबित होती है। यदि किसी व्यक्ति में इस बीमारी के संकेत दिखाई दें या एहतियातन टेस्ट करवाना हो तो
डॉक्टरी सलाह अवश्य लें। डॉक्टरी सलाह के पश्चात CBC, बोन मैरो टेस्ट और जेनेटिक टेस्टिंग के लिए
डॉ. लाल पैथलैब्स में शेड्यूल बुक करें। शेड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

FAQ

1.ब्लड कैंसर में क्या परेशानी होती है?

ब्लड कैंसर में बार-बार संक्रमण होना, थकान, हड्डियों में दर्द, लगातार बुखार, वजन कम होना आदि परेशानी
हो सकती है।

2.बोन मैरो टेस्ट किसलिए किया जाता है?

बोन मैरो टेस्ट ब्लड कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। इसके जरिए बोन मैरो से जुड़ी बीमारियों और
ब्लड डिस्ऑर्डर का भी पता लगाया जा सकता है।

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