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डायलिसिस क्या है? कारण, प्रक्रिया और प्रकार की पूरी जानकारी

Medically Approved by Dr. Seema

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डायलिसिस

 

डायलिसिस (dialysis meaning in hindi) ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है जो किडनी यानी गुर्दे के काम न करने या फेल होने की कंडीशन में की जाती है। डायलिसिस के तहत खून में जमा अपशिष्ट पदार्थों यानी टॉक्सिन और शरीर में जमा एक्स्ट्रा फ्लुइड को आर्टिफिशियल तरीके से मशीनों के जरिए फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाला जाता है। जब किडनी फेल हो जाती है और फिल्टर का काम करने में असमर्थ हो जाती है तो डायलिसिस (dialysis meaning in hindi) की प्रक्रिया के तहत शरीर से खून में जमा टॉक्सिन और फ्लुइड को बाहर निकाला जाता है। इस लेख में जानते हैं कि डायलिसिस क्या है और डायलिसिस क्यों किया जाता है। इसके साथ साथ जानेंगे किडनी डायलिसिस क्या है और डायलिसिस के नुकसान क्या हैं।

 

डायलिसिस क्या होता है?

किडनी का मुख्य काम शरीर में खून को फिल्टर करना और खून में जमा अपशिष्ट यानी वेस्ट पदार्थों को बाहर निकालना है। किडनी शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लुइड को भी बाहर निकालती है। लेकिन जब किडनी अपना काम करने में नाकाम होने लगती है तो खून में वेस्ट और टॉक्सिन जमा होने लगते हैं। इसके साथ साथ शरीर में एक्स्ट्रा फ्लुइड इकट्ठा होने लगता है जिससे सेहत संबंधी कई सारी दिक्कतें पैदा होने का खतरा हो जाता है। ऐसे में किडनी का काम करने के लिए डायलिसिस (किडनी डायलिसिस क्या है) किया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत खास मशीन (डायललाइजर) और खास तकनीकों के जरिए खून में हानिकारक और अपशिष्ट पदार्थों को छानकर बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रोसेस (dialysis meaning in hindi) की मदद से शरीर में फ्लुइड का स्तर संतुलित किया जाता है। इसके साथ साथ ये प्रक्रिया शरीर के ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने का काम करती है और ये उन लोगों के लिए जीवनदायी कही जाती है जिनकी किडनी सही तरीके से काम करने में नाकाम हो जाती हैं।

 

डायलिसिस (dialysis meaning in hindi)के दौरान मरीज के खून को डायलिसिस मशीन में ले जाकर फिल्टर किया जाता है। इसके बाद उसी मशीन के जरिए साफ खून को वापस शरीर डाला जाता है। ये उपचार मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला हेमोडायलिसिस औऱ दूसरा पेरिटोनियल डायलिसिस। हेमोडायलिसिस के दौरान मरीज के खून को डायलिसिस मशीन में फिल्टर करके साफ किया जाता है। वहीं पेरिटोनियल डायलिसिस में पेट के अंदर एक स्पेशल फ्लुइड डालकर टॉक्सिन और एक्स्ट्रा फ्लुइड को पेट अंदर लगी एक नली के जरिए बाहर निकाल दिया जाता है।

डायलिसिस क्यों किया जाता है?

देखा जाए तो ये उपचार (dialysis meaning in hindi)उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जिनकी किडनी काम करना बंद कर देती है। किडनी फेल होने पर खून से अपशिष्ट पदार्थ फिल्टर नहीं हो पाते और खून मे जमा होने लगते हैं। ऐसे में डायलिसिस किडनी का काम करता है और शरीर को सुचारू रूप से काम करने लायक बनाता है। आपको बता दें कि डायलिसिस प्रक्रिया के जरिए लाखों लोग जिनकी किडनी काम नहीं कर पाती, लंबा जीवन जीने में कामयाब हो पाते हैं।

 

डायलिसिस के लक्षण क्या हैं?

डायलिसिस के लक्षण तब नजर आते हैं जब किडनी काम करना बंद करने लगती है और डायलिसिस की जरूरत महसूस होने लगती है। ये लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  1. थकान महसूस होना।
  2. भूख कम हो जाना
  3. मतली और उल्टी महसूस होना
  4. शरीर के अंगों में सूजन खासकर पैरों और फेफड़ों में
  5. सांस लेने में दिक्कत महसूस होना
  6. मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द होना
  7. ब्लड प्रेशर का बार बार कम होना
  8. त्वचा पर खुजली होना
  9. दिल की धड़कन अनियमित होना
  10. यूरिन कम आना
  11. भ्रम और फोकस में कमी

क्रिएटिनिन कितना होने पर डायलिसिस होता है?

देखा जाए तो डायलिसिस (dialysis meaning in hindi) करने का फैसला क्रिएटिनिन की कम या ज्यादा संख्या पर निर्भर नहीं करता है। जब शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ता है तो उल्टी, थकान, शरीर में सूजन, यूरिन की कमी जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। क्रिएटिनिन के सामान्य स्तर की बात करें तो पुरुषों में इसका सामान्य स्तर 0.7-1.3 mg/dL और महिलाओं में सामान्य स्तर 0.6-1.1 mg/dL होताजब क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ता है तो किडनी का फिल्टरेशन रेट (eGFR) कम होने लगता है।

डायलिसिस के नुकसान क्या हैं?

हालांकि डायलिसिस (dialysis meaning in hindi) जीवनदायी मेडिकल उपचार है लेकिन इसके भी कुछ नुकसान होते हैं। इसके लगातार उपयोग से शरीर में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डायलिसिस के चलते दिल संबंधी बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर के भी रिस्क बढ़ जाते हैं। डायलिसिस के बाद मरीज को दिल की धड़कन अनियमित होने, बीपी में उतार चढ़ाव, मांसपेशियों में ऐंठन, त्वचा में खुजली होना, थकान और मानसिक तनाव का अनुभव होता है। पेरिटोनियल डायलिसिस की प्रक्रिया के बाद पेट की झिल्ली में संक्रमण हो सकता है वहीं हेमोडायलिसिस के बाद खून में थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है। पेरिटोनियल डायलिसिस के चलते पेट की मांसपेशियां कमजोर होती हैं जिससे हर्निया का रिस्क बढ़ जाता है।

किडनी फंक्शन टेस्ट

डायलिसिस (dialysis meaning in hindi) से पहले मरीज का किडनी फंक्शन टेस्ट (kidney function test) किया जाता है जिसके जरिए खून में क्रिएटिनिन, यूरिया, नाइट्रोजन और इलेक्ट्रोलाइट की जांच की जाती है। किडनी फंक्शन टेस्ट (kidney function test) में ही eGFR का स्तर मापा जाता है। किडनी फंक्शन टेस्ट ये निर्धारित करता है कि किडनी कितना काम कर रही है।

 

डायलिसिस (dialysis meaning in hindi) किडनी के फेल होने की स्थिति में एक जीवनदायी प्रक्रिया है जिसके चलते मरीज लंबा जीवन जीते हैं। अगर किसी मरीज की किडनी के कमजोर होने के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी परामर्श लेना चाहिए। डॉक्टरी परामर्श के बाद किडनी फंक्शन टेस्ट (kidney function test) के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

डायलिसिस क्या होता है?

डायलिसिस (dialysis meaning in hindi) वो मेडिकल प्रक्रिया है जिसके जरिए शरीर में खून को फिल्टर करके साफ किया जाता है और शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लुइड को बाहर निकाला है। जब किडनी फेल होने लगती है तो इस प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है।

 

 

क्रिएटिनिन कितना बढ़ने पर डायलिसिस होता है?

अगर शरीर में क्रिएटिनिन का स्तर ज्यादा हो रहा है तो इसका मतलब है कि किडनी फिल्टरेशन के काम में फेल हो रही है। ऐसे में इस प्रक्रिया (क्रिएटिनिन कितना होने पर डायलिसिस होता है) की जरूरत होती है।

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