टीएलसी (Total Leukocyte Count) टेस्ट का महत्व और परिणाम
- 19 Sep, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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किसी भी व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए शरीर में पर्याप्त खून का होना जरूरी है। देखा जाए तो शरीर में दो तरह की ब्लड वैसल्स यानी रक्त कोशिकाएं होती हैं। पहली श्वेत रक्त कोशिकाएं और दूसरी लाल रक्त कोशिकाएं। शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं को ल्यूकोसाइट्स (leukocytes in hindi) भी कहा जाता है। ये सफेद रक्त कोशिकाएं यानी ल्यूकोसाइट्स (Total Leucocyte Count) शरीर के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को कई तरह के संक्रमणों और हेल्थ संबंधी दिक्कतों से बचाने में महत्वपूर्ण रोल अदा करती हैं। ऐसे में इन सफेद रक्त कोशिकाओं की गणना करने के लिए टीएलसी टेस्ट (tlc) यानी टोटल ल्यूकोसाइट काउंट किया जाता है। टीएलसी (tlc kya hota hai) ऐसा ब्लड टेस्ट है जिसके जरिए ल्यूकेमिया, ल्यूकोपेनिया, ल्यूकोसाइट (leukocytes in hindi) डिस्ऑर्डर जैसी दिककतों की पहचान की जाती है। इसके अलावा टीएलसी टेस्ट के जरिए शरीर में कई तरह के ब्लड संबंधी इंफेक्शन का भी पता लगाने में मदद मिलती है। इस लेख में जानते हैं कि टीएलसी (tlc kya hota hai) क्या होता है और टीएलसी बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है। इसके अलावा ये भी जानेंगे कि टीएलसी बढ़ने के क्या लक्षण हैं और शरीर में टीएलसी कितना होना चाहिए।
टीएलसी क्या होता है?
टीएलसी (tlc kya hota hai) शरीर में कुल सफेद रक्त कोशिकाओं की गणना है जिसके जरिए कई छोटी बड़ी बीमारियों का पता लगाने में मदद मिलती है। टीएलसी वो रक्त कोशिकाएं हैं जो ब्लड स्ट्रीम में मौजूद रहती हैं और इम्यून सिस्टम को कई तरह के संक्रमणों और बीमारियों से सुरक्षित रखने में भूमिका निभाती हैं। आपको बता दें कि सफेद रक्त कोशिकाओं में न्यूट्रोफिल, लिम्फोसाइट्स, मोनोसाइट्स, ईोसिनोफिल और बेसोफिल जैसी कोशिकाएं भी शामिल होती हैं जो इम्यून सिस्टम की संरचना में खास भूमिका निभाती हैं। आपको बता दें कि अगर शरीर में टीएलसी (leukocytes in hindi) बढ़ जाए तो शरीर कई दिकक्तों का शिकार हो सकता है।
टीएलसी बढ़ने के क्या लक्षण हैं?
अगर शरीर में टीएलसी (leukocytes in hindi) बढ़ रहा है तो इसके कुछ संकेत पहले ही दिखने लगते हैं। अगर शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स यानी सफेद रक्त कोशिकाएं ज्यादा हो रही हैं इम्यूनिटी पर इसका सीधा असर होता है। शरीर में टीएलसी बढ़ने के लक्षण इस प्रकार हैं –
- बुखार – मरीज को बार बार बुखार आता है।
- थकान – मरीज को ज्यादा कामकाज किए बिना थकान महसूस होने लगती है।
- दर्द – मरीज के कई अंगों में दर्द महसूस होने लगता है।
- सांस लेने में दिक्कत – मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
- बार बार इंफेक्शन – इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर मरीज बार बार इंफेक्शन का शिकार होने लगती है।
- अचानक वजन कम होना – मरीज का अचानक वजन कम होने लगता है।
- रात को सोते समय पसीना आना – मरीज को एकाएक रात को पसीना आ सकता है।
टीएलसी बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है?
शरीर में टीएलसी का बढ़ना खतरनाक माना जाता है। टीएलसी बढ़ने पर इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और शरीर गंभीर बीमारियों से लड़ने में नाकाम होने लगता है। अगर शरीर में टीएलसी (leukocytes in hindi) का स्तर खतरनाक हो जाए तो शरीर , ल्यूकेमिया, ल्यूकेमिया, ब्लड कैंसर औऱ बोन मैरो जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का शिकार हो सकता है।
शरीर में टीएलसी कितना होना चाहिए?
देखा जाए तो शरीर में टीएलसी की रेंज एक माइक्रोलीटर रक्त में 4000 से 11000 के बीच होती है। हालांकि उम्र, मेडिकल कंडीशन और लैब के बीच ये सीमा कुछ अलग हो सकती है। एक वयस्क के शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) की सामान्य सीमा महिला औऱ पुरुषों में कुछ अलग अलग हो सकती है। महिलाओं में टीएलसी की सामान्य सीमा 4500 से 11000 के बीच होती है जबकि पुरुषों में ये सीमा 5000 से 10000 के बीच है तो सामान्य मानी जाती है।
शरीर में कुल ल्यूकोसाइट गिनती 11000 तक सामान्य मानी जाती है। लेकिन अगर कुल ल्यूकोसाइट गिनती 11000 से ज्यादा (कितना टीएलसी खतरनाक है) होती है तो इसे खतरनाक माना जाता है जो ल्यूकोसाइटोटिस का संकेत है। ल्यूकोसाइटोटिस (leukocytes in hindi) शरीर में संक्रमण, सूजन या फिर ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। किसी के शरीर में अगर टीएलसी एक लाख से ज्यादा (कितना टीएलसी खतरनाक है) हो तो वो मरीज हाइपर ल्यूकोसाइटोटिस का शिकार हो सकता है।
टीएलसी टेस्ट कब करवाना चाहिए?
अगर शरीर बार बार संक्रमण का शिकार हो रहा है जैसे बुखार, थकान, ठंड लगना और असामान्य थकान, ऐसे में डॉक्टर टीएलसी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा कुछ पुरानी रक्त संबंधी बीमारियों के इलाज की प्रोग्रेस चैक करने के लिए भी टीएलसी टेस्ट की सलाह दी जाती है। कुछ खास सर्जरी से पहले इम्यून सिस्टम के कामकाज की समीक्षा के लिए भी टीएलसी कराने का सुझाव दिया जाता है। रेडिएशन थैरेपी और कीमोथैरेपी के बाद इम्यून सिस्टम की निगरानी के लिए भी टीएलसी की सलाह दी जाती है। एलर्जी और सांस से जुड़ी बीमारियों में इम्यून सिस्टम की भूमिका की जांच के लिए भी टीएलसी किया जाता है।
देखा जाए तो शरीर में टीएलसी काउंट (leukocytes in hindi) इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के साथ साथ कई तरह के रक्त विकारों से बचाव में मददगार साबित होता है। ऐसे टीएलसी का सामान्य सीमा में रहना बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति में टीएलसी बढ़ने के लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टरी सलाह के बाद टीएलसी टेस्ट (leukocytes in hindi) के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डडॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
1.एक व्यक्ति के शरीर में टीएलसी कितना होना चाहिए?
एक व्यक्ति के शरीर में कुल ल्यूकोसाइट गिनती प्रति माइक्रोलीटर खून में 4000 से लेकर 11000 तक होना चाहिए।
2.टीएलसी बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है?
टीएलसी बढ़ने से ल्यूकेमिया, ल्यूकोसाइटोटिस, हाइपरल्यूकोसाइटोटिस, ब्लड कैंसर और बोन मैरो डिस्ऑर्डर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।







