थायरॉइड क्या है : कारण, लक्षण और उपचार
- 8 May, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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थायरॉइड की बीमारी (Thyroid Disease) गर्दन में तितली के आकार की थायरॉइड ग्लैंड (thyroid gland) यानी थायरॉइड ग्रंथि के कामकाज को प्रभावित करने वाली कंडीशन है। थायरॉइड नाम की इस ग्रंथि का मुख्य काम शरीर के चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म (metabolism) को मैनेज करना है। मेटाबॉलिज्म के जरिए भोजन को एनर्जी के रूप में तब्दील किया जाता है। जब थायरॉइड ग्रंथि सही से कामकाज नहीं कर पाती तो मेटाबॉलिज्म असंतुलित होता है जिससे शरीर के कई सारे कामकाज प्रभावित होने लगते हैं। थायरॉइड ग्रंथि मेटाबॉलिज्म को रेगुलेट करने के साथ साथ थायरोक्सिन (Thyroxine) और ट्राईआयोडोथायोनिन (Triiodothyronine) जैसे थाइरॉइड हार्मोन रिलीज करती है जिससे शरीर के कई सारे कामकाज संचालित होते हैं। जब इस ग्रंथि में परेशानी आती है तो शरीर पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है जो आगे जाकर कई गंभीर परेशानियों का कारण बनता है। चलिए इस लेख में जानते हैं कि थायरॉइड क्या है, और इसका कारण क्या होता है। साथ ही जानेंगे इसके लक्षण और उपचार से जुड़े तरीकों के बारे में सब कुछ। सटीक मेडिकल जांच और हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स का ऐप डाउनलोड कीजिए।
थायरॉइड की बीमारी क्या है?
थायरॉइड ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमे थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त स्तर पर थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन करने में नाकामयाब हो जाती है। ये ग्रंथि तितली के आकार की होती है जो गर्दन ठीक नीचे स्थित होती है। इस ग्रंथि द्वारा रिलीज किए जाने वाले हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण और जरूरी कामकाज को मैनेज करते हैं, जैसे मेटाबॉलिज्म की दर, हार्ट रेट, एनर्जी का लेवल, मूड का स्तर, हड्डियों की मजबूती और पाचन की प्रोसेस आदि।
थायरॉइड बीमारी कितने प्रकार की होती है?
थायरॉइड की बीमारी मुख्यतया दो प्रकार की होती है। हाइपोथायरॉयडिज्म (अंडरएक्टिव थायरॉयड) और हाइपरथायरॉयडिज्म (ओवरएक्टिव थायरॉयड)
- हाइपोथायरॉयडिज्म (Hypothyroidism) – इस स्थिति को अंडर एक्टिव थायरॉइड कहा जाता है। हाइपोथायरॉयडिज्म तब होता है जब थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है। अगर इसका समय पर इलाज न हो तो हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल संबंधी बीमारियों का रिस्क पैदा हो जाता है।
- हाइपरथायरॉयडिज्म (Hyperthyroidism) – इस स्थिति को ओवरएक्टिव थायरॉइड कहा जाता है। हाइपरथायरॉयडिज्म तब होता है जब थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन करने लगती है। इससे मेटाबॉलिज्म में तेजी आती है और शरीर पर इसका बुरा असर होता है। मेटाबॉलिज्म तेज होने पर वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना और हाथ कांपने जैसी स्थितियां पैदा होने लगती है।
थायरॉइड बीमारी के क्या कारण हैं?
थायरॉइड के यूं तो कई कारण कहे जाते हैं लेकिन इसके दोनों प्रकार के कारण अलग अलग होते हैं। हाइपोथायरायडिज्म के सामान्य कारण इस प्रकार हैं –
- ऑटोइम्यून बीमारी – हाशिमोटो एक ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर है जिसके तहत शरीर का इम्यून सिस्टम अनजाने में ही थायरॉइड ग्लैंड पर हमला करने लगता है। इससे थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है और शरीर हाइपोथायरॉयडिज्म का शिकार हो जाता है।
- रेडिएशन थैरेपी (Radiation therapy) – सिर और गर्दन के कैंस के लिए की जाने वाली रेडिएशन थैरेपी से निकलने वाला हानिकारक रेडिएशन थायरॉइड ग्लैंड पर बुरा असर डालता है। इससे हाइपोथायरॉयडिज्म का रिस्क बढ़ जाता है।
- आयोडीन की कमी (less Iodine) – शरीर में आयोडीन की कमी से भी हाइपोथायरॉडिज्म हो सकता है। दरअसल शरीर में थायरॉइड हार्मोन उत्पादन के लिए आयोडीन की जरूरत पड़ती है जो नमक से मिलता है। अगर डाइट में आयोडीन और दूसरे खनिजों की कमी होती है तो हाइपोथायरॉडिज्म हो जाता है। जिन क्षेत्रों में आय़ोडीन युक्त नमक नहीं मिलता, वहां इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है।
हाइपरथायरॉयडिज्म के सामान्य कारण इस प्रकार हैं –
- ग्रेव्स रोग (Graves’ disease) – ग्रेव्स रोग भी ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम थायरॉइड ग्रंथि को निशाना बनाता है। थायरॉइड ग्रंथि पर हमला होने पर ये असंतुलित होती है और जरूरत से ज्यादा थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन करने लगती है। ऐसी स्थिति में शरीर हाइपरथायरॉयडिज्म का शिकार हो जाता है।
- थायरॉडिटिस (Thyroiditis) – ये ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है जिससे ग्रंथि में स्टोर हार्मोन खून में लीक होने लगता है। इस स्थिति में शरीर हाइपरथायरॉयडिज्म का शिकार हो जाता है।
- जरूरत से ज्यादा आयोडीन का सेवन (Excessive Iodine) – जब शरीर में जरूरत से ज्यादा आयोडीन जाता है तो थायरॉइड ग्रंथि ज्यादा हार्मोन रिलीज करने लगती है। आयोडीन नमक के अलावा कुछ दवाओं के सेवन से भी शरीर में ज्यादा आयोडीन चला जाता है।
थायरॉइड बीमारी के लक्षण क्या हैं?
थायरॉइड बीमारी के लक्षण थायरॉइड की स्थिति, व्यक्ति की उम्र के आधार पर मरीजों में अलग अलग दिख सकते हैं।
हाइपोथायॉडिज्म के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –
- थकान महसूस होना
- हार्टबीट कम होना
- बिना किसी वजह से वजन बढ़ना
- मूड में बार बार परिवर्तन होना
- पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होना
- ठंडे मौसम के प्रति सेंसेटिविटी बढ़ना
- स्किन का रूखापन
- बालों का मोटा होना
हाइपरथायरॉडिज्म के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –
- हार्ट बीट यानी दिल की धड़कन तेज होना
- बिना किसी वजह के वजन में कमी आना
- मूड स्विंग
- बैचेनी महसूस करना
- अनियमित पीरियडस्
- पीरियड्स में ब्लीडिंग कम होना
- सोने में दिक्कत आना
- त्वचा पर चिपचिपापन
- गर्म मौसम के प्रति सेंसेटिविटी
थायरॉइड की बीमारी यूं तो सामान्य है लेकिन इसके लक्षणों को पहचान कर अगर सही समय पर उपचार न किया जाए तो कभी गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जैसे दिल संबंधी परेशानियां, हड्डियों की कमजोरी औऱ इंफर्टिलिटी (बांझपन) आदि। देखा जाए तो कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां थायरॉइड का कारण बनती है जिन्हें रोकना नामुमकिन है, लेकिन लक्षणों को जानकर इसका सटीक मैनेजमेंट राहत प्रदान कर सकता है। अगर किसी मरीज को थायरॉइड के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टरी सलाह के बाद थायरॉइड टेस्ट के लिए डा. लाल पैथलैब्स में टेस्ट का शैड्यूल बुक करना चाहिए। टेस्ट बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
प्रश्न – क्या थायरॉइड एक गंभीर बीमारी है ?
थायरॉइड यूं तो सामान्य बीमारी है लेकिन इसका सही इलाज न मिलने पर कई जटिलताएं पैदा होती हैं। थायरॉइड शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है और इसका सही उपचार और इसके लक्षणوں में राहत देने के साथ साथ इसकी गंभीरता कम करने में मददगार साबित होता है।
प्रश्न – क्या थायरॉइड रोग को रोका जा सकता है ?
नहीं, थायरॉइड रोग को रोकना नामुमकिन है क्योंकि अक्सर ये बीमारी ऑटोइम्यन डिस्ऑर्डर की कंडीशन के चलते होती है, जिन्हें रोकना असंभव है।








