पर्निशियस एनीमिया: कारण, लक्षण और उपचार
- 16 Apr, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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शरीर में खून की कमी को एनीमिया कहा जाता है। लेकिन जब शरीर में खून की कमी ज्यादा हो जाए और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाए पर्निशियस एनीमिया (Pernicious Anemia) की बीमारी हो जाती है। पर्निशियस एनीमिया को घातक एनीमिया भी कहा जाता है। पर्निशियस एनीमिया एक ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर (Autoimmune Disorder) है जिसमें शरीर में मौजूद विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं को सही से अवशोषित करने में नाकामयाब होने लगता है। विटामिन 12 की अवशोषण की क्षमता कम होने का असर लाल रक्त कोशिकाओं के प्रोडक्शन पर पड़ता है और उनकी संख्या कम होने लगती है। ऐसे में शरीर में खून की बहुत ज्यादा कमी हो जाती है। पर्निशियस एनीमिया का अगर सही समय पर उपचार न किया जाए शरीर में घातक एनीमिया हो सकता है जिससे खून की भारी कमी हो सकती है। खून की ज्यादा कमी के चलते दूसरी कई सेहत संबंधी दिक्कतें सिर उठा सकती हैं और इससे शरीर के नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो जाता है। चलिए आज इस लेख में जानते हैं कि पर्निशियस एनीमिया क्या है और इसके कारण और लक्षण क्या हैं। साथ ही जानेंगे कि इसका उपचार कैसे किया जा सकता है।
पर्निशियस एनीमिया क्या है?(What Is Pernicious Anemia?)
पर्निशियस एनीमिया एक ऑटो इम्यून डिस्ऑर्डर है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम उन कोशिकाओं को नष्ट कर देता है जो इंट्रिंसिक फैक्टर (intrinsic factor) नाम के प्रोटीन का उत्पादन करती हैं। ये प्रोटीन विटामिन B12 को अवशोषित करने में मदद करता है। इस प्रोटीन की कमी होने से छोटी आंत में स्थित विटामिन बी 12 का सही से अवशोषण नहीं हो पाता है। ऐसे में शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन पर असर पड़ता है और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है। इसके चलते शरीर के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की सही से आपूर्ति नहीं हो पाती है जिससे डाइजेशन, नर्वस सिस्टम और हार्ट पर बुरा असर पड़ सकता है।
पर्निशियस एनीमिया के क्या कारण होते हैं? (What Causes Pernicious Anemia?)
पर्निशियस एनीमिया मुख्यतौर पर शरीर में विटामिन बी12 और लाल रक्त कोशिकाओं की कमी के चलते होता है। विटामिन बी12 के अवशोषण में मदद करने वाला प्रोटीन जब कम होता है तो विटामिन बी 12 की अवशोषण की क्षमता कम हो जाती है और शरीर में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। पर्निशियस एनीमिया ऑटोइम्यून कारण, पेट में कोई दिक्कत के साथ साथ कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसके कारण इस प्रकार हैं –
- ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर (Autoimmune Attack) – पर्निशियस एनीमिया का मुख्य कारण ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर कहा जाता है। शरीर की रक्षा करने वाला इम्यून सिस्टम ही पैरिएटल कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे शरीर विटामिन B12 के अवशोषण के लिए ज़रूरी प्रोटीन बनना बंद हो जाता है।
- जेनेटिक (Genetic History ) – कभी कभी पर्निशियस एनीमिया की बीमारी पारिवारिक इतिहास के कारण भी हो सकती है। इसके अलावा घर में ऐसे लोग जो थायरॉइड और डायबिटीज से पीड़ित रहे हों ऐसे घर के लोगों में इस बीमारी के होने का रिस्क रहता है।
- पेट संबंधी समस्याएं – पेट संबंधी कुछ दिक्कतें जैसे पेट की सर्जरी, गैस्ट्रिक सर्जरी, बाइपास सर्जरी या पेट का कोई इंफेक्शन विटामिन बी 12 के अवशोषण को डिस्टर्ब कर सकते हैं।
- उम्र संबंधी (Ageing ) – उम्र बढ़ने पर यानी ऐसे लोग जिनकी उम्र साठ साल से ज्यादा होती है, उनके पेट में एसिड की मात्रा कम होने लगती है। इसके चलते भोजन से विटामिन बी 12 रिलीज होने में दिक्कत आने लगती है।
- कुछ खास दवाओं का सेवन (Medications) – संक्रमण के लिए ली जाने वाली कुछ एंटीबायोटिक्स दवाएं भी इसका कारण हो सकती है। इसके अलावा शुगर और दौरे के लिए ली जाने वाली दवा भी विटामिन बी 12 के अवशोषण को कम करने में भूमिका निभाती है।
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पर्निशियस एनीमिया के लक्षण क्या हैं? (What are the Symptoms of Pernicious Anemia?)
आमतौर पर पर्निशियस एनीमिया के लक्षणों को सामान्य एनीमिया समझ कर नजरंदाज कर दिया जाता है। इसके लक्षण धीरे धीरे डेवलप होते हैं और हल्के से गंभीर हो सकते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –
- सिर में दर्द
- त्वचा पर पीलापन
- थकान हावी होना
- कमजोरी महसूस होना
- भूख में कमी
- वजन में कमी आना
- सांस फूलना
- जीभ में लालिमा और सूजन आना
- दस्त या कब्ज होना
- दिल की धड़कन अनियमित हो जाना
- चक्कर और बेहोशी आना
- हाथ पैरों में ठंडापन
- सीने में दर्द महसूस होना
- याद्दाश्त कमजोर होना
- मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
- चलते हुए अस्थिरता महसूस होना
- हाथ पैरों का सुन्न होना और झुनझुनाहट होना
- मतिभ्रम यानी हेलिसुनेशन
पर्निशियस एनीमिया की जांच कैसे होती है? (How is Pernicious Anemia Diagnosed?)
डपर्निशियस एनीमिया की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर ब्लड टेस्ट (Blood Test), ब्लड काउंट (CBC), विटामिन बी12 के लेवल (vitamin B12 levels) को मापते हैं। इसके साथ साथ एंटी-इंट्रिंसिक फैक्टर एंटीबॉडी टेस्ट (antibodies against intrinsic factor and parietal cells) भी किए जाते हैं।
पर्निशियस एनीमिया को कैसे रोका जा सकता है? (How to Prevent Pernicious Anemia?)
पर्निशियस एनीमिया को रोकने में ये तरीके प्रभावी साबित हो सकते हैं-
- शुरूआती स्टेज में गैस्ट्राइटिस या एच। पाइलोरी संक्रमण जैसी डाइजेशन संबंधी दिकक्तों का समय पर इलाज करना।
- डाइट में बदलाव – अपनी डाइट में विटामिन बी 12 रिच फूड्स जैसे अंडे, मांस, मछली और डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करना।
- अल्कोहल के सेवन पर रोक – अल्कोहल का सेवन कम करना या बंद कर देना। अल्कोहल के सेवन से शरीर में विटामिन बी12 और अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा आती है।
- थकान, कमजोरी, हाथ पैरों में सुन्नता आने पर डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी हो जाती है।
अगर किसी व्यक्ति में पर्निशियस एनीमिया के लक्षण दिख रहे हैं तो उन्हें डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिए। पर्निशियस एनीमिया से संबंधित सटीक जांच के लिए डॉ। लाल पैथलेब्स में टेस्ट बुक करवाना चाहिए।
FAQ
क्या पर्निशियस एनीमिया और विटामिन बी12 की कमी एक समान है? (Is pernicious anaemia the same as vitamin B12 deficiency?)
नहीं, हालांकि दोनों ही स्थितियों में शरीर में विटामिन बी12 का स्तर कम होता है। जहां पर्निशियस एनीमिया एक ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर है, वहीं दूसरी तरफ विटामिन बी12 की कमी असंतुलित डाइट या दूसरी कुछ वजहों से होती है।
क्या पर्निशियस एनीमिया वंशानुगत होता है? (Is pernicious anaemia hereditary?)
कुछ हद तक पर्निशियस एनीमिया वंशानुगत यानी जेनेटिक हो सकता है क्योंकि ये बीमारी परिवार में चलती है। हालांकि इसे पूरी तरह जेनेटिक नहीं कहा जा सकता है। अगर परिवार में पर्निशियस एनीमिया से पीड़ित लोग हैं तो इसके होने के चांस बढ़ जाते हैं।








