मोटापा: कारण, लक्षण, साइड इफ़ेक्ट और हेल्थ असेसमेंट
- 5 Jun, 2026
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम लगातार बढ़ रही हैं, और मोटापा इनमें सबसे आम है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के हालिया अनुमान बताते हैं कि लगभग 40.3% आबादी ज़्यादा वज़न से प्रभावित हो सकती है, जिससे कई पुरानी हेल्थ प्रॉब्लम का खतरा बढ़ जाता है।
मोटापे से जुड़ी लंबे समय की दिक्कतों को रोकने में मदद कर सकते हैं । यह आर्टिकल मोटापे का पता लगाने में मदद करने वाले कारणों, लक्षणों, साइड इफ़ेक्ट्स और डायग्नोस्टिक टेस्ट के बारे में बताता है ।
मोटापा क्या है?
मोटापा एक ऐसी कंडीशन है जिसमें शरीर में इतना ज़्यादा फैट जमा हो जाता है कि यह पूरी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है। डॉक्टर आमतौर पर मोटापे को क्लासिफ़ाई करने के लिए बॉडी मास इंडेक्स (BMI) का इस्तेमाल करते हैं ।
बीएमआई:
- 25-29.9 को ज़्यादा वज़न माना जाता है
- 30 या उससे ज़्यादा उम्र वालों को मोटापा माना जाता है
मोटापा सिर्फ़ एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है। यह एक मुश्किल हेल्थ कंडीशन है जो मेटाबॉलिक बदलाव, हार्मोनल इम्बैलेंस और लाइफस्टाइल से जुड़ी है।
मोटापे के क्या कारण हैं?
मोटापे के कई कारण हो सकते हैं । इनमें शामिल हैं:
- गलत खाने की आदतें: प्रोसेस्ड स्नैक्स, मीठी ड्रिंक्स और फास्ट फूड जैसे ज़्यादा कैलोरी वाले खाने की चीज़ों को बार-बार खाने से वज़न बढ़ सकता है।
- सुस्त लाइफस्टाइल: कम फिजिकल एक्टिविटी से कैलोरी खर्च कम होती है, जिससे फैट जमा होता है।
- जेनेटिक फैक्टर: फैमिली हिस्ट्री मेटाबॉलिज्म, भूख रेगुलेशन और फैट स्टोरेज पैटर्न पर असर डाल सकती है।
- हार्मोनल कंडीशन: थायरॉइड डिसऑर्डर जैसी मेडिकल दिक्कतें मेटाबॉलिज्म को धीमा कर सकती हैं और वज़न बढ़ा सकती हैं।
- मनोवैज्ञानिक कारण: तनाव, भावनात्मक भोजन और नींद की कमी भी मोटापे के खतरे को बढ़ा सकती है ।
मोटापे के लक्षण क्या हैं?
मोटापे के आम लक्षणों में शामिल हैं:
- वज़न में बढ़ोतरी और शरीर में चर्बी का बढ़ना
- शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस फूलना
- अत्यधिक पसीना आना
- थकान और कम ऊर्जा स्तर
- जोड़ों और पीठ दर्द
- खर्राटे या नींद की गड़बड़ी
मोटापे के साइड इफ़ेक्ट क्या हैं?
अगर समय पर मैनेज न किया जाए, तो मोटापे से होने वाली बीमारियां ये हो सकती हैं:
- टाइप 2 मधुमेह
- उच्च रक्तचाप
- दिल की बीमारी
- आघात
- पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस
- फैटी लिवर रोग
- स्लीप एप्निया
मोटापे का पता कैसे लगाया जाता है?
मोटापे और उससे जुड़े हेल्थ रिस्क का पता लगाने के लिए कई क्लिनिकल असेसमेंट का इस्तेमाल करते हैं ।
- BMI माप: BMI यह पता लगाने में मदद करता है कि शरीर का वज़न हेल्दी रेंज में है या नहीं।
- कमर का घेरा: पेट की चर्बी का माप मेटाबोलिक रिस्क के बारे में और जानकारी देता है।
- ब्लड टेस्ट: लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जैसे टेस्ट कोलेस्ट्रॉल लेवल और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क का पता लगाने में मदद करते हैं।
- हार्मोनल इवैल्यूएशन: थायरॉइड की गड़बड़ी की जांच के लिए थायरॉइड टेस्ट की सलाह दी जा सकती है, जिससे वज़न बढ़ सकता है।
मोटापे को कैसे मैनेज किया जा सकता है?
मोटापे को मैनेज किया जा सकता है। बैलेंस्ड डाइट जिसमें कैलोरी कम हो, साथ ही रेगुलर फ़िज़िकल एक्टिविटी जैसे वॉकिंग, योगा या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, ज़्यादा वज़न कम करने में मदद करती है। पूरी नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट भी हेल्दी मेटाबॉलिज़्म में मदद करते हैं।
डॉक्टर अंदरूनी कारणों का पता लगाने के लिए हेल्थ असेसमेंट की सलाह दे सकते हैं, जिसमें BMI माप, लिपिड प्रोफ़ाइल, या थायरॉइड टेस्ट शामिल हैं।
मोटापे के लक्षण या मोटापे से जुड़े कोई भी साइड इफ़ेक्ट दिखने पर , जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से सलाह लें और डॉक्टर से सलाह लें। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट और डॉ. लाल पैथलैब्स में थायरॉइड टेस्ट टेस्ट आसानी से बुक करने के लिए आज ही लाल पैथलैब्स ऐप डाउनलोड करें!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों
1. महिलाओं में मोटापा कैसे कम करें?
महिलाओं में मोटापा कम करने के कुछ तरीके हैं कैलोरी-कंट्रोल्ड डाइट और हर हफ़्ते कम से कम 150 मिनट हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ शामिल करना। और पर्याप्त आराम।
2. मोटापे के लिए थायरॉइड टेस्ट क्यों किया जाता है?
हाइपोथायरायडिज्म या अंडरएक्टिव थायरॉइड शरीर की कैलोरी बर्न करने की दर को धीमा कर देता है और ज़्यादा खाए बिना भी वज़न बढ़ने, थकान और सूजन का कारण बनता है। TSH, T3, और T4 को मापने वाला थायरॉइड टेस्ट इस स्थिति का जल्दी पता लगा लेता है।
3. मोटापे से कौन-कौन सी बीमारियाँ होती हैं?
मोटापे से होने वाली बीमारियों में दिल की बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर की बीमारी, स्लीप एपनिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस और कुछ तरह के कैंसर शामिल हैं। मोटापा डिप्रेशन और एंग्जायटी में भी योगदान देता है।







