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एमआरआई टेस्ट क्या है और यह क्यों किया जाता है?

Medically Approved by Dr. Seema

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एमआरआई टेस्ट क्या है

 

शरीर को सेहतमंद रखने और कई तरह की बीमारियों का समय रहते पता लगाने के लिए डॉक्टर समय समय पर कई तरह के टेस्ट और परीक्षणों का सुझाव देते हैं। इन्हीं में से एक है एमआरआई टेस्ट। एमआरआई का फुल फॉर्म (mri full form hindi) है मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic Resonance Imaging)। हिंदी में इसे चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (टेस्ट (mri full form hindi) भी कहते हैं लेकिन आम भाषा में इसे एमआरआई टेस्ट कहा जाता है। एमआरआई टेस्ट शरीर के अंदरूनी स्ट्रक्टर की विस्तृत तस्वीरें यानी डिटेल इमेजिंग मुहैया कराता है। आपको बता दे कि विज्ञान के क्षेत्र में एमआरआई को एक बेहद उन्नत डाय्ग्नोस्टिक तकनीक कहा गया है जो बिना किसी दर्द और रेडिएशन के खतरे के शरीर के अंदरूनी अंगों को लेकर सटीक जानकारी देती है।

 

एमआरआई टेस्ट कई बड़ी बीमारियों जैसे मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, दिल और जोडों से जुड़ी बीमारियों का आकलन करने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट (mri test in hindi) की मदद से स्ट्रोक, कैंसर, शरीर में किसी स्थान पर ट्यूमर, दिल की बीमारी, लिगामेंट्स की समस्या और मल्टीपल स्क्लेरोसिस का पता लगाने में मदद मिलती है। देखा जाए तो गंभीर बीमारियों की जल्द और सटीक पहचान के लिए नए दौर में एमआरआई टेस्ट एक अहम डायग्नोस्टिक टूल साबित हो रहा है। चलिए इस लेख में जानते हैं कि एमआरआई टेस्ट क्या होता है और एमआरआई टेस्ट क्यों किया जाता है। साथ ही जानेंगे एमआरआई टेस्ट के सभी प्रकारों और इसकी प्रक्रिया के बारे में सब कुछ।

 

एमआरआई टेस्ट क्या होता है?

एमआरआई टेस्ट ऐसा डायग्नोस्टिक स्कैन (mri full form hindi) है जिसके जरिए शरीर के अंदरूनी अंगों की साफ और बारीक तस्वीरें ली जाती हैं। एमआरआई टेस्ट (mri test in hindi) ऐसा इमेजिंग टेस्ट है जो मैग्नेटिक और रेडियो वेव्स यानी तरंगों की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों की हाई रिजोल्यूशन इमेज लेता है। इस टेस्ट के दौरान शरीर में किसी तरह की सर्जरी या इंजेक्शन नहीं दिया जाता है। यानी एमआरआई टेस्ट नॉन इनवेसिव टेस्ट है। जब किसी बीमारी की पहचान या उसकी सटीक स्टेज पता करने के लिए एक्सरे या अल्ट्रासाउंड की मदद नहीं ली जा सकती है तो एमआरआई टेस्ट की सलाह दी जाती है।

 

एमआरआई टेस्ट क्यों किया जाता है?

कई गंभीर बीमारियों की पहचान और इलाज की प्रगति का आकलन करने के लिए डॉक्टर इस टेस्ट (mri test in hindi) की सलाह देते हैं। एमआरआई टेस्ट की सलाह इन कारणों से दी जाती है।

 

  1. ब्रेन और नर्वस सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों जैसे सिर में दर्द रहना, ब्रेन ट्यूमर, लकवा, स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, मिर्गी आदि के कारणों को समझने के लिए इस टेस्ट की सलाह दी जाती है।
  2. दिल से जुड़ी कई बीमारियों का आकलन करने के लिए इस टेस्ट की सलाह दी जाती है, जैसे दिल की धमनियों यानी आर्टरीज में रुकावट या ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए, दिल की आनुवांशिक समस्याओं का पता लगाने के लिए आदि। कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए, कैंसर की स्टेज और इलाज की प्रगति के आकलन के लिए ये टेस्ट करवाना जरूरी कहा गया है।
  3. रीढ़ की हड्डी और जोड़ों से संबंधित दिक्कतों के आकलन के लिए इस टेस्ट का सुझाव दिया जाता है। जैसे स्लिप डिस्क, अर्थराइटिस, स्पोर्ट्स इंजुरी, लिगामेंट का फटना और लिगामेंट इंजुरी के मामले आदि। इसके अलावा साइटिका, कमर में दर्द, कंधे या गर्दन में दर्द, घुटनों और हिप जॉइंट्स में दर्द के मामलों में भी एमआरआई टेस्ट की सलाह दी जाती है। जोड़ों के अलावा मसल्स डिजीज यानी मांसपेशियों से जुड़ी दिक्कतों की पहचान के लिए भी ये टेस्ट काफी मददगार साबित होता है।
  4. अंदरूनी अंगों की जांच और आकलन के लिए भी एमआरआई टेस्ट (mri test in hindi) को बेहद कारगर माना गया है। ब्लैडर, पैनक्रियाज, किडनी और लिवर से जुड़ी किसी भी परेशानी में ये टेस्ट बहुत मददगार माना गया है। इसके अलावा शरीर के किसी हिस्से में इंफ्लेमेशन यानी सूजन का कारण जानने में भी इसकी मदद ली जाती है। शरीर में कहीं सिस्ट यानी गांठ बन रही है या ट्यूमर के संकेत हैं तो ये टेस्ट बहुत सटीक आकलन करके जानकारी देता है। इसके अलावा गर्भाशय और ओवरी से जुड़ी समस्याओं की शुरूआती पहचान के लिए भी इस टेस्ट को काफी हेल्पफुल माना गया है।

 

एमआरआई टेस्ट कितने प्रकार का होता है?

एमआरआई टेस्ट स्थिति की जरूरत के अनुसार अलग अलग तरह के होते हैं। मुख्य रूप से एमआरआई टेस्ट के प्रकार इस तरह हैं –

 

  1. ब्रेन एमआरआई
  2. जॉइंट एमआरआई
  3. स्पाइन एमआरआई
  4. एब्डोमिनल यानी पेट का एमआरआई
  5. पेल्विस एमआरआई
  6. कार्डिएक यानी ह्रदय का एमआरआई
  7. एमआर एंजियोग्राफी

 

एमआरआई टेस्ट किस तरह किया जाता है?

देखा जाए तो एमआरआई टेस्ट की प्रोसेस बेहद आसान और दर्दरहित है। इस टेस्ट के दौरान मरीज के शरीर को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। इस टेस्ट से रेडिएशन का खतरा नहीं होता है और किसी तरह की सर्जरी या इनवेजन यानी चीर फाड़ की जरूरत नहीं पड़ती है। एमआरआई टेस्ट के दौरान मरीज को एक टेबल पर लिटाया जाता है। इस टेबल को ट्यूब जैसी दिखने वाली एक खास स्कैन मशीन के अंदर भेजा जाता है। मशीन के अंदर मैग्नेटिक और रेडियो वेव्स के दौरान मरीज के शरीर के अंदरूनी अंगों की डिटेल तस्वीरें कंप्यूटर के जरिए निकाली जाती हैं। करीब 20 से 70 मिनट की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को स्थिर और शांत रहने की सलाह दी जाती है। आमतौर पर इस टेस्ट से पहले मरीज के खाने पीने पर रोक नहीं होती लेकिन अगर पेट का एमआरआई हो रहा है तो मरीज को टेस्ट से 6 घंटे पहले कुछ भी खाने पीने से रोक दिया जाता है। इसके अलावा मरीज को एमआरआई टेस्ट से पहले डॉक्टर को अपनी सभी शारीरिक स्थितियों जैसे प्रेग्नेंसी, किसी तरह की एलर्जी, कोई खास मेडिकल स्थिति आदि के बारे में जानकारी जरूर देनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को क्लास्ट्रोफोबिया यानी छोटी जगह में रहने से घुटन और घबराहट की दिक्कत है तो स्कैन से पहले डॉक्टर को जरूर बताएं।

 

देखा जाए तो एमआरआई टेस्ट बहुत ही आसान और सटीक डायग्नोस्टिक टेस्ट है जो बड़ी और गंभीर बीमारियों के सटीक आकलन में मददगार साबित होता है। अगर किसी मरीज में अंदरूनी बीमारियों के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी परामर्श लें। डॉक्टरी परामर्श के बाद डॉ. लाल पैथलैब्स में एमआरआई टेस्ट बुक करें। टेस्ट बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

एमआरआई का फुल फॉर्म क्या है?

एमआरआई का फुल फॉर्म (mri full form hindi) है मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग। इसके जरिए शरीर में मैग्नेटिक और रेडियो तरंगों के जरिए शरीर के अंदरूनी अंगों की डिटेल तस्वीरें ली जाती हैं।

 

एमआरआई टेस्ट किस तरह होता है?

इस टेस्ट की प्रोसेस बहुत ही आसान और दर्दरहित है।इस दौरान मरीज के एक टेबल पर लिटाकर एक खास मशीन के अंदर भेजा जाता है। जहां मैग्नेटिक और रेडियो तरंगों की मदद से उसके शरीर के अंदरूनी अंगों की तस्वीरे रिकॉर्ड की जाती हैं और कंप्यूटर को भेजी जाती हैं।

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