लिम्फोमा: प्रकार, लक्षण और इलाज के विकल्प
- 24 Jan, 2026
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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लिम्फोमा (lymphoma in hindi) एक प्रकार का कैंसर है जो शरीर के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधी प्रणाली में मौजूद लसीका तंत्र में फैलता है। लिम्फोमा लसीका तंत्र की सफेद रक्त कोशिकाओं जिन्हें लिम्फोसाइट्स को प्रभावित करता है। जब ये सफेद रक्त कोशिकाएं असामान्य रूप से फैलने लगती हैं तो ये शरीर में अनियंत्रित हो जाती हैं। इसके चलते शरीर के लिम्फ नोड्स जैसे गर्दन, बगल और कमर में ट्यूमर बन सकता है। आपको बता दें कि लसीका तंत्र मुख्य रूप से इम्यून सिस्टम का अहम हिस्सा है और ये शरीर को संक्रमण से बचाता है, ऐसे में जब लिम्फोमा लसीका तंत्र में फैलता है तो शरीर के बचाव की प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। देखा जाए तो दूसरे कैंसर मामलों की तरह लिम्फोमा (lymphoma in hindi) के भी सटीक कारण ज्ञात नहीं हैं। लेकिन अगर समय रहते लिम्फोमा के पहले चरण के लक्षणों की जानकारी मिल जाए तो इसका इलाज संभव हो सकता है। इस लेख में जानते हैं कि लिम्फोमा क्या है और लिम्फोमा के लक्षण क्या हैं। इसके साथ ही जानेंगे शरीर में लिम्फोसाइट बढ़ने के कारण, लिम्फोमा (lymphoma in hindi)के प्रकार और इसके इलाज के बारे में सब कुछ।
लिम्फोमा क्या है?
लिम्फोमा (lymphoma in hindi) इम्यून सिस्टम के अहम अंग कहे जाने वाले लसीका तंत्र में होने वाला कैंसर है। लसीका तंत्र में लिम्फोसाइट्स (लिम्फोसाइट बढ़ने के कारण) नाम की सफेद रक्त कोशिकाएं जब असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं तो लिम्फ नोड्स के अंगों जैसे गर्दन, बगल और कमर में इन कोशिकाओं की गांठ बनने लगती है। ज्यादा फैलने पर ये कोशिकाएं ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। लिम्फोमा कैंसर के कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में दिक्कतें आती हैं और शरीर बीमारियों का ठिकाना बन सकता है। लिम्फोमा आम तौर पर दो प्रकार का होता है –
- हॉजकिन्स लिम्फोमा (Hodgkin Lymphoma) ये अस्थि मज्जा के बी सेल में पाया जाता है। आमतौर पर लिम्फोमा का ये प्रकार इलाज के योग्य होता है। इस लिम्फोमा में ‘रीड-स्टर्नबर्ग’ नामक विशेष कैंसर सेल्स होते हैं। देखा जाए तो इस लिम्फोमा का इलाज आमतौर पर सफल साबित होता है।
- नॉन-हॉजकिन्स लिम्फोमा (Non-Hodgkin Lymphoma) लिम्फोमा का ये प्रकार पहले प्रकार की अपेक्षा ज्यादा घातक और आक्रामक होता है। ये कैंसर बी और टी सेल्स में फैलता है। इस कैंसर के 80 से ज्यादा उप-प्रकार होते हैं जिनमें बरकिट लिम्फोमा, मेंटल सेल लिम्फोमा, फॉलिकुलर लिम्फोमा शामिल हैं। नॉन हॉजकिन्स लिम्फोमा आमतौर पर ज्यादा उम्र के लोगों को शिकार बनाता है।
लिम्फोमा का क्या कारण है?
फिलहाल विज्ञानी लिम्फोमा (lymphoma in hindi) का कोई ज्ञात कारण पता नहीं लगा पाए हैं लेकिन मुख्य तौर पर ये कैंसर लिम्फोसाइट्स (लिम्फोसाइट बढ़ने के कारण) यानी सफेद रक्त कोशिकाओं के अनियंत्रित फैलाव के चलते होता है। सफेद रक्त कोशिकाएं डीएनए में म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन के चलते असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। लिम्फोसाइट बढ़ने के कारण इस प्रकार हैं –
- डीएनए में उत्परिवर्तन
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
- शरीर में वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण
- कुछ खास रसायनिक तत्वों के संपर्क में आना
- हाई रेडिएशन
- जेनेटिक यानी परिवार में लिम्फोमा का इतिहास
- उम्र और जैंडर – खासतौर पर ज्यादा उम्र के पुरुष इस कैंसर की चपेट में आते हैं।
- कुछ खास मेडिकल स्थितियां जैसे गार्डनर डिजीज।
लिम्फोमा के लक्षण किस प्रकार दिखते हैं?
लिम्फोमा कैंसर के लक्षण इसके प्रकार और मरीज की स्थिति के आधार पर अलग अलग दिखते हैं। कई बार लिम्फोमा (lymphoma in hindi) के शुरुआती लक्षण एक वायरल बुखार की तरह दिखते हैं और इसलिए मरीज इन्हें नजरंदाज कर बैठते हैं। लिम्फोमा के लक्षण लिम्फ नोड्स पर दिखते हैं जैसे गर्दन, बगल, कमर, कॉलरबोन के आस पास सूजन के रूप में। लिम्फोमा कैंसर के लक्षण इस प्रकार हैं –
- लिम्फनोड्स में सूजन – लिम्फ नोड्स जैसे कमर, गर्दन, कॉलरबोन और बगल में सूजन आना। ये सूजन आमतौर पर दर्दरहित होती है।
- लिम्फ नोड्स में गांठ महसूस होना – अक्सर मटर जैसी गांठ महसूस होती है।
- थकान – मरीज को अक्सर थकान महसूस होने लगती है।
- कमजोरी- मरीज को कमजोरी महसूस होने लगती है।
- बुखार– मरीज को तेज ठंड के साथ बुखार हो सकता है।
- रात को पसीना आना – रात के समय एकाएक पसीना आना और कपड़े तक भीग जाना लिम्फोमा का लक्षण हो सकता है।
- एकाएक वजन घटना – बिना किसी वजह मरीज का वजन एकाएक गिरने लगता है।
- त्वचा पर लगातार खुजली होना – लिम्फ नोड्स में गांठ के चलते त्वचा पर खुजली होने लगती है।
- सांस लेने में तकलीफ – मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
- पेट में दर्द और सूजन – पेट और आस पास सूजन और दर्द महसूस हो सकता है। मरीज को खांसी भी हो सकती है।
- हाथ पैरों में झुनझुनाहट – मरीज को हाथ पैरों में झुनझुनाहट होने लगती है।
- पाचन संबंधी दिक्कतें – मरीज को पाचन संबंधा दिक्कतें जैसे अपच, हार्टबर्न की परेशानी हो सकती है। मरीज को अक्सर पेट भरा हुआ महसूस होता है।
लिम्फोमा की जांच किस तरह की जाती है?
लिम्फोमा के संभावित लक्षणों के आधार पर डॉक्टर मरीज को बायोप्सी, ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन, पीईटी-सीटी स्कैन और बोन मैरो बायोप्सी
की सलाह देते हैं। इन सभी टेस्ट की मदद से शरीर में इस कैंसर की मौजूदगी और उसके फैलाव का पता लगाने में मदद मिलती है।
लिम्फोमा का इलाज किस तरह होता है?
देखा जाए तो लिम्फोमा (lymphoma in hindi) का इलाज इसके प्रकार, मरीज की स्थिति और बीमारी की स्टेज पर निर्भर करता है। हालांकि अगर सही समय पर इस बीमारी की पहचान कर ली जाए तो इसका इलाज संभव है। अगर शुरुआत में लिम्फोमा के लक्षणों को पहचान लिया जाए और कैंसर छोटा और एक ही जगह पर हो तो सर्जरी के जरिए इसे हटाने में काफी मदद मिलती है। लिम्फोमा के उपचार में कीमोथैरेपी, टार्गेटेड थैरेपी, रेडिएशन इम्यूनोथैरेपी की जाती है। कुछ मामलों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
देखा जाए तो लिम्फोमा एक ऐसा कैंसर है जो लसीका तंत्र को प्रभावित करके इम्यून सिस्टम को खराब कर डालता है। दूसरे कई कैंसर मामलों की तरह इसका भी सटीक कारण पता नहीं है। लेकिन अगर समय रहते लिम्फोमा के लक्षणों को पहचान लिया जाए तो इसका इलाज हो सकता है। इसलिए लिम्फोमा के सटीक और प्रभावी उपचार के लिए इसके लक्षणों की पहचान और सटीक जांच करवाना काफी महत्वपूर्ण साबित होता है। अगर किसी मरीज में लिम्फोमा कैंसर के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें। डॉक्टरी परामर्श के बाद संबंधित टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
- लिम्फोमा क्या है?
लिम्फोमा एक प्रकार का कैंसर है जो लसीका तंत्र में होता है। इस कैंसर में लसीका तंत्र में मौजूद सफेद रक्त कोशिकाएं यानी लिम्फोसाइट्स असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और लिम्फ नोड्स में ट्यूमर की वजह बन जाती हैं। - लिम्फोमा के लक्षण किस तरह दिखते हैं?
लिम्फोमा के लक्षण में लिम्फ नोड्स में सूजन, कमजोरी, थकान,रात में पसीना आना, वजन घटना और बुखार शामिल है।








