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LDL कोलेस्ट्रॉल क्या है? कितना होना चाहिए और क्यों जरूरी है?

Medically Approved by Dr. Shuchi

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LDL cholesterol in Hindi

स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है कि दिल भी सेहतमंद रहे। नए दौर में ज्यादातर लोग दिल संबंधी बीमारियों की जद में आ रहे हैं जिनमें दिल का दौरा, स्ट्रोक और अन्य कई दिक्कतें शामिल हैं। देखा जाए तो दिल संबंधी कई बीमारियो के लिए शरीर में एलडीएल (ldl cholesterol in hindi) कोलेस्ट्रॉल का ज्यादा स्तर जिम्मेदार माना जाता है। कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर की कोशिकाओं में पाया जाने वाला मोम यानी वैक्स जैसा एक फैटी लिपिड यानी पदार्थ है। हालांकि कोलेस्ट्रॉल ऐसा लिपिड है शरीर के लिए जरूरी भी कहा जाता है क्योंकि इसकी मदद से शरीर में पाचन क्रिया और विटामिन डी के निर्माण संबंधी जरूरी कामकाज पूरे होते हैं। कोलेस्ट्रॉल दो तरह का है, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi)। एचडीएल कोलेस्ट्रॉल जहां गुड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है वहीं एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है क्योंकि अगर इसका स्तर बढ़ जाए तो ये धमनियों में जमा होकर हार्ट ब्लॉकेज के खतरे बढ़ा देता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर की जांच के लिए एलडीएल कोलेस्ट्रॉल टेस्ट की सलाह दी जाती है। इस लेख में जानते हैं कि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल क्या होता है। साथ ही जानेंगे कि उम्र के हिसाब से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना होना चाहिए और इसकी जांच (ldl cholesterol test)किस तरह होती है।

 

एलडीएल LDL कोलेस्ट्रॉल क्या है?

कोलेस्ट्रॉल कोशिकाओं में पाया जाने वाला फैटी लिपिड है जो शरीर के कई कामकाज में जरूरी माना जाता है। कोलेस्ट्रॉल के दो रूप हैं एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल (हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन)। इसमें एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi) को बुरा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है क्योंकि इसका ज्यादा स्तर शरीर को कई गंभीर बीमारियों का शिकार बना देता है। ldl कोलेस्ट्रॉल आर्टरीज यानी रक्त धमनियों में जम जाता है जिससे धमनियां सख्त और संकरी बन जाती हैं। इस वजह से इन धमनियों में रक्त का प्रवाह बाधित होने लगता है जिससे दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की बात करें तो ये शरीर के लिए अच्छा है क्योंकि ये ldl कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi) को कम करने का काम करता है। ऐसे में जरूरी है कि दिल की सेहत बनाए रखने के लिए शरीर में ldl कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रण में रहे।

 

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के लक्षण क्या हैं?

शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi) ज्यादा होने के लक्षण कई बार दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरंदाज नहीं करना चाहिए। ldl कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण इस प्रकार दिखते हैं-

 

  1. सीने में भारीपन महसूस होना
  2. थकान महसूस होना
  3. कमजोरी महसूस होना
  4. सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत होना
  5. जरा सा काम करने में सांस फूलना
  6. आंखों के ऊपर और आस पास पीले धब्बे
  7. ब्लड प्रेशर का हाई होना
  8. हाथ पैरों में झुनझुनाहट महसूस होना

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की अधिकता के कारण क्या हैं?

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi) के कई कारण हैं जो लाइफस्टाइल से जुड़े हुए हैं। जैसे फिजिकल एक्टिविटी की कमी, धूम्रपान करना, ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड का सेवन, ज्यादा तला भुना खाना, बढ़ा हुआ वजन, ज्यादा ब्लड प्रेशर, तनाव, नींद की कमी और असंतुलित डाइट। जिन लोगों के परिवार में मोटापे के साथ साथ दिल के दौरे और स्ट्रोक के मामले ज्यादा रहे हैं, उन लोगों को भी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का ज्यादा रिस्क रहता है।

 

Ldl कोलेस्ट्रॉल कितना होना चाहिए?

डॉक्टर कहते हैं कि व्यक्ति में उम्र के लिहाज से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi)का स्तर अलग अलग होना चाहिए। वयस्कों की बात करें तो शरीर में इसका सामान्य स्तर 100 mg/dl से कम रहना चाहिए। वहीं अगर दिल के रोगियों की बात करें तो उनके लिए ये स्तर 70 mg/dl से नीचे रहना जरूरी माना जाता है।

 

ध्यान देने वाली बात ये है कि एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का ज्यादा स्तर जहां दिल के साथ साथ दूसरी कई दिक्कतें पैदा कर सकता है वहीं एचडीएल का स्तर जितना ज्यादा हो, उतना सेहत के लिए अच्छा होता है। ऐसे में शुरुआती तौर पर जीवनशैली में बदलाव करके एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi) को काबू में रखा जा सकता है। समय समय पर शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करवाना भी इसे नियंत्रण में रखने में सहायक साबित होता है।

 

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की जांच किस तरह होती है?

शरीर में कोलेस्ट्रॉल की जांच (ldl cholesterol test) के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट की सलाह दी जाती है। ये एक ब्लड टेस्ट है जिसके जरिए शरीर में एलडीएल, एचडीएल और ट्राईग्लिसराइड्स के साथ साथ टोटल कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी मापा जाता है। आमतौर पर लिपिड प्रोफाइल कोलेस्ट्रॉल स्तर के साथ साथ हार्ट संबंधी दिक्कतों का भी पता लगाने में मददगार माना जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 20 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा ह्रदय रोगियों, हाई बीपी से ग्रसित लोगों, मधुमेह के शिकार लोगों और ऐसे लोग जिनके परिवार में हार्ट पेशेंट हैं, ऐसे लोगों को साल में दो बार ये टेस्ट करवाना जरूरी कहा जाता है।

 

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (ldl cholesterol in hindi) दिल के लिए एक बड़ा खतरा कहा जाता है। खासकर नए दौर में जब लोग फिजिकल एक्टिविटी कम करने लगे हैं औऱ खान पान असंतुलित हो गया है, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल शरीर में साइलेंटली तेजी से बढ़ने लगता है। अगर किसी मरीज के शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी सलाह लें। डॉक्टरी सलाह के बाद लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

  1. Ldl कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?
    एलडीएल कोलेस्ट्रॉल वो खराब वसा यानी फैट है जो रक्त धमनियों में जमा होकर दिल के दौरे या स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है।
  2. Ldl कोलेस्ट्रॉल कितना होना चाहिए?
    एक सामान्य वयस्क में Ldl कोलेस्ट्रॉल 100 mg/dl से कम होना चाहिए। अगर इस लिमिट से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल होता है तो ये दिल के लिए खतरा पैदा कर सकता है। वहीं एचडीएल कोलेस्ट्रॉल जितना ज्यादा हो, उतना सेहत के लिए अच्छा है क्योंकि ये एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक माना जाता है।
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