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इपोथायरायडिज्म क्या है? कारण, लक्षण और इलाज

Medically Approved by Dr. Shuchi

Table of Contents

bhypothyroidism in hindi

थायरॉइड शरीर में गर्दन में आगे की तरफ तितली के आकार की एक ग्लैंड यानी ग्रंथि है जो शरीर में मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ साथ कई जरूरी काम करती है। शरीर में एनर्जी के स्तर और तापमान को नियंत्रित करने के साथ साथ थायरॉइड ग्रंथि जरूरी कहे जाने वाले टी3 और टी4 हार्मोन का भी उत्पादन करती है। थायरॉइड ग्रंथि अगर इन हार्मोन का उत्पादन कम या ज्यादा करती है तो शरीर में हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidismin hindi) औऱ हाइपर हाइपरथायरायडिज्म नामक स्थितियां पैदा होती हैं। अगर थायरॉइड ग्रंथि बहुत कम हार्मोन बना रही है तो हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism in hindi) होता है और अगर हार्मोन बहुत ज्यादा बन रहा है तो हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति पैदा हो जाती है। हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती जिसके चलते शरीर के कई महत्वपूर्ण कामों पर असर होता है। खासतौर पर महिलाएं हाइपोथायरायडिज्म का ज्यादा शिकार होती हैं। हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों को समय पर पहचान कर इसका सटीक मैनेजमेंट किया जा सकता है। हाइपोथायरॉडिज्म की पहचान के लिए टीएसएच ब्लड टेस्ट (tsh blood test) करवाया जाता है ताकि हार्मोन के स्तर और उसकी स्थिति का पता चल सके। इस लेख में जानते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म क्या है और हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण क्या हैं। इसके साथ साथ जानेंगे महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण और हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidismin hindi) की पहचान के लिए टीएसच ब्लड टेस्ट (tsh blood test) के बारे में भी सब कुछ।

 

हाइपोथायरायडिज्म क्या है?

 

हाइपोथायरायडिज्म थायरॉइड की वो स्थिति है जब थायरॉइड ग्रंथि शरीर में जरूरी मात्रा में टी3 और टी4 हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है। ऐसे में शरीर के कई कामकाज सही तौर पर संचालित नहीं हो पाते हैं0। जैसे एनर्जी का सही उपयोग नहीं हो पाता, मेटाबॉलिज्म स्मूथ नहीं रहता, शरीर का तापमान अनियंत्रित होने लगता है, वजन पर कंट्रोल नहीं रहता और ह्रदय गति सबंधी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism in hindi) के कई कारण हैं जो इस प्रकार हैं –

 

  1. ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर जैसे हाशिमोटो
  2. कुछ सर्जरी
  3. आयोडीन ट्रीटमेंट
  4. शरीर में आयोडीन की कमी
  5. पिट्यूटरी ग्लैंड डिस्ऑर्डर
  6. प्रेग्नेंसी
  7. थायरॉइड में सूजन
  8. वंशानुगत स्थितियां
  9. मानसिक तनाव
  10. कुछ दवाएं

 

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण किस तरह दिखते हैं?

 

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण कई बार शुरुआत में नहीं दिखते हैं जिसके चलते लोग इन्हें नजरंदाज कर बैठते हैं। इसके सामान्य लक्षण अलग अलग लोगों में स्थितियों के अनुसार अलग अलग दिखते हैं। हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  1. थकान हावी होना
  2. बार बार ठंड लगना
  3. वजन बढ़ जाना
  4. बार बार कब्ज होना
  5. मांसपेशियों में दर्द रहना
  6. बालों का लगातार झड़ना
  7. उदासी और चिड़चिड़ापन महसूस होना
  8. नाखूनों का कमजोर होना
  9. चेहरे पर सूजन आना
  10. मानसिक बदलाव जैसे डिप्रेशन और एंजाइटी
  11. मेमेरी में कमी आना
  12. फोकस करने में कठिनाई होना
  13. त्वचा पर खुजली होना और रूखी त्वचा

 

महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण क्या हैं?

 

चूंकि हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism in hindi) की शिकार महिलाएं ज्यादा होती हैं, ऐसे में उन्हें इसके लक्षणों पर खासतौर पर ध्यान देना चाहिए। हाइपोथायरायडिज्म के सामान्य लक्षणों के अलावा महिलाओं में कुछ अतिरिक्त लक्षण भी दिखते हैं। महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  1. थकावट
  2. मासिक धर्म का अनियमित होना
  3. पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना
  4. वजन में एकाएक कमी
  5. बालों और नाखूनों का कमजोर होना
  6. त्वचा पर सूजन और खुजली
  7. मूड स्विंग और उदासी
  8. चेहरे पर सूजन, खासतौर पर आंखों के आस पास पफीनेस

 

हाइपोथायरायडिज्म की जांच किस तरह होती है?

 

हाइपोथायरायडिज्म की जांच के लिए डॉक्टर शरीर में टी3 और टी4 हार्मोन के स्तर की जांच करते हैं। इसके लिए थायरॉइड स्टिमुलेटिंग टेस्ट (tsh blood test) यानी टीएसएच नामक ब्लड टेस्ट किया जाता है। हाइपोथायरायडिज्म की जांच के लिए tsh blood test सबसे पहला और जरूरी टेस्ट है जिससे शरीर में हार्मोन के स्तर का पता चलता है। अगर टेस्ट में टीएसएच का स्तर ज्यादा है तो इसका मतलब है कि थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में T3 और T4 हार्मोन नहीं बना पा रही है। ये हाइपोथायरॉडिज्म का संकेत कहलाता है। ब्लड टेस्ट में tsh की सामान्य रेंज 0.5-5.0 mIU/L मानी जाती है। tsh blood test में अगर असामान्यता आती है तो इसके आगे फ्री थायरोक्सिन टेस्ट की सलाह दी जाती है। इसके अलावा थायरॉइड एंटीबॉडी भी किया जाता है जो ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर की पहचान करने में मददगार साबित होता है।

 

हाइपोथायरायडिज्म का इलाज किस तरह होता है?

 

हाइपोथायरायडिज्म (हाइपोथायरायडिज्म के इलाज के बारे में जानकारी) का सटीक मैनेजमेंट हो सकता है। हालांकि कई मामलों में हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति जिंदगी भर रह सकती है लेकिन दवा के सेवन से हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। हाइपोथायरायडिज्म को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है कि समय समय पर टीएसएच स्तर की जांच (tsh blood test) करवाएं और डॉक्टरी सलाह के अनुसार नियमित दौर पर दवा का सेवन करें। इसके साथ साथ लाइफस्टाइल में संतुलित बदलाव करके इसके लक्षणों जैसे तनाव, वजन बढ़ना आदि को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए नियमित तौर पर व्यायाम और योग करें, संतुलित भोजन करें, हरी सब्जियों का सेवन करें। अपनी डाइट में ज्यादा तला भुना और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करके भी इसमें फायदा मिलता है। इसके अलावा हार्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी के जरिए भी इस बीमारी का मैनेजमेंट किया जा सकता है।

 

हाइपोथायरायडिज्म थायरॉइड की ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का एनर्जी लेवल और मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है। खासतौर पर महिलाएं इसका ज्यादा शिकार होती हैं। ऐसे में इसके लक्षणों को पहचान कर इसकी जांच (tsh blood test) करवाना काफी महत्वपूर्ण है ताकि इसका सटीक मैनेजमेंट संभव हो सके। अगर किसी व्यक्ति में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी सलाह लें। डॉक्टरी सलाह के बाद टीएसएच ब्लड के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

 

1.हाइपोथायरायडिज्म क्या है?

हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब शरीर की थायरॉइड ग्रंथि टी4 और टी4 हार्मोन का उत्पादन कम कर देती है। इसकी कई कारण हो सकते हैं, जैसे हाशिमोटो, थायरॉइड सर्जरी या कुछ दवाओं का सेवन आदि।

 

2.हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण क्या हैं?

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में ठंड लगना, वजन बढ़ना, बाल और नाखून कमजोर होना, रूखी त्वचा और अनियमित मासिक धर्म शामिल है।

 

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