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गर्मियों में फूड पॉइजनिंग : कारण, लक्षण और बचाव

Medically Approved by Dr. Seema

Table of Contents

गर्मियों में फूड पॉइजनिंग

 

गर्मी के मौसम में अक्सर लोग फूड पॉइजनिंग (Food poisoning) यानी खादय विषाक्तता का शिकार हो जाते हैं। फूड पॉइजनिंग दूषित खान पान से होने वाली एक आम बीमारी है। ऐसा दूषित भोजन जो बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और विषाक्त पदार्थों (bacteria, viruses, or parasites) के कारण संक्रमित हो जाता है। खासतौर पर गर्मियों के मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले एकाएक बढ़ जाते हैं क्योंकि गर्म मौसम में बैक्टीरिया और परजीवी तेजी से पनपते हैं। गर्म मौसम और नमी के चलते भोजन को बनाने, संभालने और उसे स्टोर करने में ज्यादा देखभाल और सावधानी की जरूरत पड़ती है। चलिए इस लेख में हम जानते हैं कि फूड पॉइजनिंग क्या है। साथ ही इसके लक्षण और कारण के साथ साथ इसके बचाव के तरीके भी जानते हैं।

 

फूड पॉइजनिंग क्या होती है? (What is Food Poisoning?)

 

फूड पॉइजनिंग बैक्टीरिया और वायरस द्वारा संक्रमित भोजन और पानी के चलते होती है। दूषित भोजन के जरिए बैक्टीरिया और परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जिससे पेट और आंतों में सूजन आ जाती है। देखा जाए तो भारत जैसे देश में फूड पॉइजनिंग एक आम बीमारी है और गर्म मौसम में ये तेजी से फैलती है। आमतौर पर फूड पॉइजनिंग से उबरने के लिए किसी तरह के खास इलाज की जरूरत महसूस नहीं होती है। लेकिन अगर फूड पॉइजनिंग गंभीर हो जाए तो इसकी वजह से सेहत संबंधी कई परेशानियां पैदा हो सकती हैं जैसे किडनी डैमेज (kidney damage), नर्व और ब्रेन डैमेज (nerve and brain damage) आदि। फूड पॉइजनिंग के ज्यादा गंभीर होने पर साथ मेनिन्जाइटिस (meningitis) बीमारी का खतरा पैदा हो जाता है जिसके लिए तुरंत डॉक्टरी इलाज की जरूरत पड़ती है।

 

फूड पॉइजनिंग के क्या कारण हैं?(What Cause Food Poisoning?)

 

फल और सब्जियां उगाने के दौरान अगर संक्रमित पानी से सिंचाई की जाए तो उस फूड में कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस पनपने लगते हैं। कई बार भोजन पकाते समय भी दूषित हो जाता है। इसे सही से स्टोर न किया जाए तो भी गर्म मौसम में इसमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी पनपने का खतरा पैदा हो जाता है। अधपका, कच्चा और दूषित भोजन करने से भी व्यक्ति फूड पॉइजनिंग से संक्रमित हो जाता है।

 

फूड पॉइजनिंग कितने प्रकार की होती है? (How many Types of Food Poisoning?)

 

बैक्टीरिया और परजीवी के संक्रमण के आधार पर फूड पॉइजनिंग कई प्रकार की होती है। इसके कुछ आम प्रकार इस तरह हैं।

 

  • बैक्टीरियल फूड पॉइजनिंग – ये फूड पॉइजनिंग बैक्टीरिया के इंफेक्शन के चलते होती है। ये बैक्टीरिया कई तरह के होते हैं जैसे साल्मोनेला, ई। कोली, लिस्टेरिया, स्टेफिलोकोकस ऑरियस, कैम्पिलोबैक्टर और हेपेटाइटिस ए आदि। ये सभी बैक्टीरिया अधपके, बिना पके, कच्चे, अंकुरित फूड में पाए जाते हैं। कभी कभी इनको बनाने में गंदे हाथ इस्तेमाल होने पर भी बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
  • वायरल फूड पॉइजनिंग – वायरल फूड पॉइजनिंग वायरस जनित फूड के सेवन से होती है। जैसे नोरोवायरस और हेपेटाइटिस ए।
  • परजीवी फूड पॉइजनिंग – ये फूड पॉइजनिंग परजीवियों संक्रमण के चलते होती है। इसके लिए आमतौर पर गियार्डिया और टोक्सोप्लाज्मा गोंडी जैसे परजीवी जिम्मेदार कहे जाते हैं।
  • धातु और रसायन विषाक्तता – पकई विषाक्त धातुओं जैसे पारा, सीसा, कैडमियम के चलते भी फूड पॉइजनिंग हो सकती है जो लिवर और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है।

 

फूड पॉइजनिंग के लक्षण क्या हैं?(What Symptoms of Food Poisoning?)

 

फूड पॉइजनिंग के लक्षण संक्रमण और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  • पेट खराब होना
  • पेट में ऐंठन होना
  • दस्त लगना
  • मल के साथ खून आना
  • मतली और उल्टी
  • सिर में दर्द महसूस होना
  • हल्का बुखार
  • भूख न लगना
  • बदन दर्द
  • हाथ पैरों में सुन्नाहट या झुनझुनाहट होना
  • कमजोरी महसूस होनाी
  • डिहाइड्रेशन

 

अगर फूड पॉइजनिंग गंभीर है तो ये नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  • तीन दिनों से अधिक दस्त
  • दस्त में लगातार पानी आना
  • तेज बुखार आना
  • नजर धुंधली होना
  • निगलने में कठिनाई होना
  • यूरिन कम आना
  • मुंह सूखा होना
  • कमजोरी के साथ चक्कर आना

 

फूड पॉइजनिंग से बचाव कैसे करें? (How to Prevent Food Poisoning?)

 

  • भोजन करने से पहले 20 सैंकेंड तक साबुन से हाथ धोएं
  • टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद के कम से कम 20 सैकेंड तक साबुन से हाथ धोएं
  • भोजन ससाफ वातावरण में पकाएं
  • भोजन को बनाने में शुद्ध और साफ पानी का इस्तेमाल करें।
  • भोजन बच जाए तो सही तरीके से ढककर रखें।
  • भोजन बचने के बाद उसे फ्रिज में रखना न भूलें।
  • भोजन को केवल चार दिनों के लिए ही फ्रिज में रखा जाना चाहिए।
  • भोजन को कच्चा या अधपका न खाएं
  • अंडे, मांस और मछली जैसे भोजन को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं
  • भोजन पकाने से पहले सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
  • कच्चे भोजन के संपर्क में आने वाले किसी भी बर्तन को अच्छी तरह धोएं
  • बफफूंद लगे और बासी भोजन को तुरंत फेंक दें, इसका सेवन भूलकर भी न करें।

 

देखा जाए तो फूड पॉइजनिंग हर साल गर्मियों में होने वाली एक खाद्य संबंधी बीमारी है जो कुछ ही दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि अगर समय पर इसके लक्षणों को पहचान कर इसका उपचार न किया जाए तो ये खतरनाक होने के साथ साथ दूसरी कई सेहत संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है। इसके लिए जरूरी है कि भोजन पकाते, खाते और स्टोर करते समय पर्याप्त सफाई और हाइजीन बरती जाए। भोजन की आदतों में साफ सफाई बरत कर इसकी रोकथाम की जा सकती है।

 

फूड पॉइजनिंग के लक्षणों और मरीज के खान पान का इतिहास जानकर डॉक्टर इसे मैनेज करते हैं। कई गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह पर ब्लड टेस्ट (Blood Test) और स्टूल टेस्ट (stool test) करवाया जाता है ताकि संक्रमण का पता चल सके। अगर किसी व्यक्ति में फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो हेल्थ केयर प्रोफेशनल से सलाह लेनी चाहिए। फूड पॉइजनिंग के लिए डा. लाल पैथलेब्स में स्टूल टेस्ट और ब्लड टेस्ट बुक करवाना चाहिए।

 

FAQ

 

गर्मियों में फूड पॉइजनिंग से बचाव कैसे करना चाहिए?

 

फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए जरूरी है कि कुछ भी खाने या पकाने से पहले उसे अच्छी तरह साफ करें। भोजन करने से पहले और टॉयलेट से आने के बाद अपने हाथ अच्छी तरह साबुन से धोएं। कच्चा, अधपका भोजन न खाएं। कच्ची सब्जियां और फल खाने से पहले अच्छी तरह धो लें।

 

फूड पॉइजनिंग के सामान्य लक्षण क्या हैं

 

फूड पॉइजनिंग के लक्षणों में दस्त, उल्टी, पेट में दर्द, बुखार, सिर में दर्द औऱ भूख न लगना शामिल हैं।

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