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डिहाइड्रेशन – कारण, लक्षण और इलाज

Medically Approved by Dr. Seema

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dehydrationनिर्जलीकरण यानी डिहाइड्रेशन (Dehydration)ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें किसी व्यक्ति के शरीर में तरल पदार्थों (Body fluids) की जरूरत से ज्यादा कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति जितना तरल पदार्थ का सेवन करता है, उससे कहीं ज्यादा तरल पदार्थ उसके शरीर में कम हो जाता है। यानी शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी या तरल पदार्थ की कमी होने पर शरीर शरीर निर्जलीकरण का शिकार हो जाता है।

 

निर्जलीकरण के कारण शरीर में शुगर और नमक का संतुलन भी बिगड़ जाता है जो दूसरी कई सेहत संबंधी परेशानियों की वजह बन सकता है।  डिहाइड्रेशन होने पर शरीर कमजोरी महसूस करता है औऱ सामान्य कामकाज करने में असमर्थ होने लगता है। डिहाइड्रेशन का सबसे आम कारण है दस्त यानी डायरिया (diarrhoea)। शरीर में पानी की कमी होने पर यह किसी को भी हो सकता है लेकिन बच्चों को ये ज्यादा और बार बार होता है।

आपको बता दें कि डिहाइड्रेशन दुनिया भर में बच्चों की सामान्य बीमारी के रूप में गिना जाता है। इतना ही नहीं डिहाइड्रेशन की वजह से दुनिया भर में शिशुओं की मौत का प्रतिशत 14 से बढ़कर 30 फीसदी हो चुका है। छोटे बच्चों के साथ साथ बूढ़े और बीमार लोगों के लिए डिहाइड्रेशन खासतौर पर खतरनाक साबित होता है। कई गंभीर मामलों में समय पर इलाज न होने के कारण डिहाइड्रेशन जानलेवा तक साबित हो सकता है। इस आर्टिकल में हम डिहाइड्रेशन के कारण, लक्षण, इलाज और जांच के बारे में बात करेंगे।

क्या है डिहाइड्रेशन? (What is Dehydration?)

डिहाइड्रेशन ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में फ्लुइड यानी पोषक तरल पदार्थों की ज्यादा कमी हो जाती है। इससे शरीर सामान्य कामकाज करने में दिक्कत महसूस करने लगता है। हालांकि सामान्य डिहाइड्रेशन की स्थिति में ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करके स्थिति को काबू किया जा सकता है। लेकिन गंभीर डिहाइड्रेशन में तुरंत मेडिकल असिस्टेंस और देखभाल की जरूरत होती है।

डिहाइड्रेशन के क्या कारण हैं? (What Causes Dehydration?)

डिहाइड्रेशन अलग अलग उम्र के लोगों में विभिन्न कारणों से हो सकता है। इसके सामान्य सामान्य कारण इस प्रकार हैं –

  1. दस्त (Diarrhoea) – जब मरीज को गंभीर और ज्यादा दस्त लग जाते हैं तो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की ज्यादा कमी हो जाती है। अगर इसके साथ साथ उल्टी भी होने लगें तो शरीर में तरल पदार्थ और मिनरल्स की भी कमी होने लगती है। इससे मरीज डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है।
  2. बुखार – (Fever) तेज बुखार भी डिहाइड्रेशन का कारण बन जाता है। अगर किसी मरीज को दस्त और उल्टी के साथ साथ बुखार हो जाए तो डिहाइड्रेशन की समस्या और बदतर हो जाती है।
  3. ज्यादा पसीना आना (Excessive Sweating) ज्यादा पसीना निकलने से भी शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन जाती है। अगर भारी और कठिन फिजिकल एक्टिविटी करते वक्त ज्यादा तरल पदार्थ न लिए जाएं तो शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है।
  4. ज्यादा यूरिन (Increased Urination) ज्यादा पेशाब की वजह से भी डिहाइड्रेशन हो सकता है। डायबिटीज के बिगड़ने पर यूरिन ज्यादा आने लगता है, इस वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ब्लड प्रेशर की कुछ दवाओं के चलते भी ज्यादा पेशाब आता है। इससे भी डिहाइड्रेशन हो सकता है।

डिहाइड्रेशन के लक्षण क्या हैं? (What Are the Symptoms of Dehydration?)

डिहाइड्रेशन के लक्षण उम्र और स्थितियों के आधार पर बदलते रहते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –

शिशुओं में डिहाइड्रेशिन के लक्षण

  1. मुंह और जीभ का सूखना
  2. रोते समय आंसू न निकलना
  3. धंसी हुई आंखें
  4. गाल पिचक जाना
  5. शिशु में सुस्ती आना
  6. शिशु का चिड़चिड़ा हो जाना
  7. खोपड़ी पर बीच में नरम स्थान का धंस जाना
  8. शिशु का बार बार रोना
  9. शिशु को बुखार हो जाना
  10. शिशु की त्वचा रूखी और सूखी होना
  11. शिशु का थकान महसूस करना
  12. शिशु का तेज सांस लेना
  13. शिशु को पानी वाले दस्त लगना

वयस्कों में डिहाइड्रेशन के लक्षण

  1. बार बार प्यास लगना
  2. होंठ और जीभ का सूख जाना
  3. यूरिन की मात्रा कम हो जाना
  4. यूरिन का रंग गहरा हो जाना
  5. अत्यधिक थकान महसूस करना
  6. चक्कर आना
  7. चिड़चिड़ापन
  8. त्वचा का रूखापन
  9. सिर में दर्द बने रहना
  10. मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द महसूस होना
  11. दिल की धड़कन तेज हो जाना
  12. सांस फूलना औऱ सांस लेने में दिक्कत होना
  13. तनाव और चिंता हावी होना

डिहाइड्रेशन के रिस्क फैक्टर क्या हैं? (What Are the Risk Factors of Dehydration?)

डिहाइड्रेशन के रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं –

  1. उम्र – शिशुओं और छोटे बच्चों को दस्त और बुखार के चलते डिहाइड्रेशन होने के ज्यादा रिस्क हो जाते हैं। ये हाई रिस्क फैक्टर है जो गंभीर होने पर जानलेवा तक साबित हो सकता है।

इसके अलावा वृद्ध लोगों को कम प्यास लगना भी डिहाइड्रेशन का रिस्क फैक्टर है। वृद्धो को कम प्यास लगने पर उनके शरीर की पानी को स्टोर करने की क्षमता कम हो जाती है, इससे डिहाइड्रेशन की संभावना बढ़ जाती है।

  1. पुरानी बीमारियां – अनियंत्रित डायबिटीज, किडनी यानी गुर्दे की बीमारी और दूसरी कई बीमारियां भी डिहाइड्रेशन के रिस्क बढ़ा देती हैं।

डिहाइड्रेशन की जांच कैसे की जाती है? (How is Dehydration Diagnosed?)

डिहाइड्रेशन की जांच के लिए हेल्थ प्रोफेशनल कई तरह के लैब टेस्ट की सलाह देते हैं। इन टेस्ट में शामिल हैं –

  1. ब्लड टेस्ट (Blood Test) – ब्लड टेस्ट के जरिए शरीर में इलेक्ट्रोलाइट के स्तर और किडनी के कामकाज की जांच की जाती है।
  2. यूरिन टेस्ट (Urine Test) – यूरिन टेस्ट के जरिए शरीर में डिडाइड्रेशन के संभावित कारणों की जांच और पहचान की जाती है।

शरीर में पर्याप्त तरल पदार्थों की कमी डिहाइड्रेशन का कारण बन जाती है। हालांकि ये कई अलग अलग कारणों से हो सकता है लेकिन इसे गंभीर बनने से रोकने के लिए जरूरी है कि समय पर इसके लक्षणों की पहचान की जाए और सही सही मैनेजमेंट किया जाए। अगर किसी मरीज में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टरी परामर्श बहुत जरूरी है। डिहाइड्रेशन की जांच के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स में टेस्ट बुक करवाएं।

FAQs

1.  हाइड्रेट रहने के लिए एक दिन में कितना पानी पीना चाहिए?

किसी भी व्यक्ति के लिए पानी का सेवन, उम्र, वजन, फिजिकल एक्टिविटी और मौसम पर निर्भर करता है।हालांकि स्टेंडर्ड यानी मानक देखें तो एक दिन में एक व्यक्ति को आठ गिलास पानी पीना चाहिए। हालांकि शुगर या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों को इस संबंध में खास सावधानी बरतनी चाहिए।

2. डिहाइड्रेशन का इलाज किस तरह होता है?

आमतौर पर हल्के डिहाइड्रेशन के लिए ज्यादा तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट का सेवन करके ठीक किया जा सकता है। वहीं मध्यम और गंभीर डिहाइड्रेशन के मामलों में तत्काल इलाज औऱ डॉक्टरी परामर्श की जरूरत होती है।

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