चिकनगुनिया – कारण, लक्षण, जांच और बचाव
- 9 Jun, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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चिकनगुनिया (Chikungunya) एक वायरस जनित संक्रामक बीमारी (viral disease ) है जो संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। चिकनगुनिया (chikungunya in hindi) के वायरस से संक्रमित मच्छर जैसे एडीस एजिप्टी (Aedes aegypti) और एडीस एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) के काटने पर मरीज तेज बुखार की चपेट में आ जाता है। इस बीमारी में संक्रमण होने के तीन से सात दिन के भीतर मरीज को तेज बुखार के साथ साथ शरीर और जोड़ों में तेज दर्द होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि शुरुआत में चिकनगुनिया का वायरस केवल अफ्रीका और एशिया तक सीमित था, लेकिन अब ये वायरस दुनिया भर के 110 से अधिक देशों में फैल चुका है। देखा जाए इस वायरस का सही तरीके से उपचार किया जाए तो अधिकांश मरीज एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। इस लेख में बात करते हैं कि चिकनगुनिया क्या है (चिकनगुनिया के लक्षण और उपाय) और इसके कारण क्या हैं। साथ ही जानेंगे इसके लक्षणों (chikungunya symptoms in hindi) और जांच के बारे में सब कुछ।
चिकनगुनिया क्या है?
चिकनगुनिया (chikungunya in hindi) संक्रमित मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलने वाली एक वायरल बीमारी है। संक्रमित मच्छर जब स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं तो चिकनगुनिया का वायरस उनके अंदर प्रवेश कर जाता है। इसके बाद संक्रमित व्यक्ति के खून के माध्यम से ये वायरस दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। आपको बता दें कि चिकनगुनिया का वायरस शारीरिक संपर्क और लार के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित नहीं कर सकता है। इस वायरस के शरीर में प्रवेश करने पर तेज बुखार और शरीर दर्द जैसे कई लक्षण (Chikungunya symptoms in Hindi) उभरते हैं जो तीन सप्ताह तक रहते हैं। हालांकि कई मामलों में शरीर और जोड़ों में दर्द लंबे समय तक रहता है।
चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं?
चिकनगुनिया के लक्षण (chikungunya symptoms in hindi) संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से सात दिन के भीतर शरीर में दिखने लगते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार है –
- सिर दर्द (Headache) – मरीज के सिर में दर्द रहने लगता है।
- तेज बुखार (High Fever) – मरीज को तेज बुखार आता है जो अक्सर 102 डिग्री से 104 डिग्री तक हो सकता है।
- मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain)– मांसपेशियों दर्द होने लगता है।
- मांसपेशियों में सूजन (Muscle swelling) – कई मामलों में मांसपेशियों में सूजन आ जाती है।
- थकान और कमजोरी (Fatigue and weakness) – मरीज को लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है।
- मतली और उल्टी (Nausea and vomiting) – मरीज को उल्टी और मतली महसूस होती है।
- चेहरे, धड़ और कुछ अंगों पर लाल दाने (red rashes) – मरीज के शरीर पर लाल रंग के दाने दिखते हैं।
- जोड़ों पर लालिमा और सूजन (Redness and swelling of the joints) – जोड़ों पर लालिमा और सूजन आ जाती है।
- दस्त (Diarrhea) – कुछ मामलों में मरीज को पतले दस्त लग सकते हैं।
- सांस फूलना (Shortness of breath) – मरीज की सांस फूलती है और सांस लेने में दिक्कत आती है।
- डिहाइड्रेशन (Dehydration) – मरीज के शरीर में पानी की कमी होती है और उसका मुंह सूखने लगता है।
चिकनगुनिया के क्या कारण है?
चिकनगुनिया के कारण मुख्य रूप से मच्छर हैं. इन मच्छरों की पहचान एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस के रूप में की गई है। ये मच्छर डेंगू और जीका वायरस जैसे संक्रमण को फैलाने के लिए भी जिम्मेदार कहे जाते हैं। ये मच्छर आमतौर जमा और स्थिर पानी में पनपते है और दिन के समय काटते हैं।मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटकर उसका संक्रमण स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंचाते हैं। आपको बता दें कि चिकनगुनिया का वायरस संक्रमित व्यक्ति की लार या फ्लुइडस (छींकने या खांसने) से नहीं फैलता है, ये वायरस मच्छर के जरिए या फिर संक्रमित रक्त के जरिए ही एक से दूसरे इंसान में फैल सकता है।
चिकनगुनिया की जांच कैसे की जाती है?
चिकनगुनिया का टेस्ट संक्रमण के पहले हफ्ते में मरीज के शरीर से लिए गए ब्लड सैंपल के जरिए किया जा सकता है। चिकनगुनिया का टेस्ट इस प्रकार किया जाता है –
- सीरम या प्लाज्मा टेस्ट (Serum or Plasma Test) – इस टेस्ट के जरिए संक्रमित व्यक्ति के खून में मौजूद सीरम या प्लाज्मा के अंदर वायरस की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।
- वायरल कल्चर (Viral Culture) – इस टेस्ट के जरिए संक्रमण होने के पहले तीन दिनों के भीतर खून में वायरस की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलती है।
चिकनगुनिया से बचाव कैसे किया जा सकता है?
चिकनगुनिया को रोकने के लिए जरूरी है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। चिकनगुनिया को फैलने से रोकने के लिए इस तरह के उपाय (चिकनगुनिया उपाय ) किए जा सकते हैं –
- रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना।
- घर के आस पास पानी जमा होने से रोकना।
- घर से बाहर निकलते समय मच्छर पूरी बांह और पैर ढकने वाले कपड़े पहनना।
- मच्छर भगाने वाली क्रीम, रेपेलेंट। स्प्रे, पैचेज और दूसरे तरीकों का प्रयोग करना।
देखा जाए तो चिकनगुनिया (chikungunya in hindi) एक ऐसी वायरल बीमारी है जो मच्छर काटने से फैलती है। हालांकि ज्यादातर मामलों में संक्रमित मरीज एक से तीन सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस मामले में जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। चिकनगुनिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों से बचाव है। मच्छरों से बचाव करके, आस पास सफाई की व्यवस्था करके, जमा पानी का निपटान करके इस बीमारी से बचा जा सकता है। सही समय पर इस बीमारी के लक्षणों को पहचान कर इसका सटीक उपचार (चिकनगुनिया के इलाज के बारे में जानकारी) संभव है। अगर किसी व्यक्ति में चिकनगुनिया के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉ. लाल पैथलैब्स के साथ चिकनगुनिया का टेस्ट शैड्यूल करवाएं। टेस्ट शैड्यूल करने के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
क्या चिकनगुनिया संक्रामक बीमारी है?
Is chikungunya contagious?
चिकनगुनिया का वायरस मच्छर के काटने से फैलता है। हालांकि ये वायरस मरीज की लार, फ्लुइड यानी खांसने और छींकने से नहीं फैलता है। लेकिन ये खून के माध्यम से फैल सकता है।
चिकनगुनिया कितने समय तक रहता है ?
How long does chikungunya last?
चिकनगुनिया के अधिकतर मरीज संक्रमण के एक से दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। हालांकि उनके जोड़ों में लंबे समय तक दर्द का अनुभव हो सकता है।








