दिमाग में खून का थक्का कैसे पता चलता है? ज़रूरी टेस्ट और डायग्नोसिस
- 22 Apr, 2026
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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स्वस्थ शरीर के लिए मस्तिष्क यानी दिमाग का स्वस्थ और मजबूत रहना काफी महत्वपूर्ण कहा जाता है। दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है ब्रेन क्लॉट (blood clotting in hindi)। ब्रेन क्लॉट में दिमाग में खून का थक्का जम जाता है। इसे सेलेब्रल थ्रोम्बोसिस भी कहा जाता है। ब्रेन क्लॉट (blood clotting in hindi) यानी दिमाग में खून का थक्का जमने पर दिमाग में खून और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है और अन्य पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। देखा जाए तो दिमाग में खून का थक्का जमना एक गंभीर औऱ जानलेवा स्थिति है जो स्ट्रोक का कारण बन सकती है और इसमें सही समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की मौत तक हो सकती है। ब्रेन क्लॉट (blood clotting in hindi) के कई कारण हो सकते हैं और इस स्थिति से बचाव के लिए समय रहते ब्रेन में क्लॉट के लक्षण को पहचानना काफी जरूरी है। इस लेख में जानते हैं कि दिमाग में खून का थक्का जमने पर क्या होता है और दिमाग में खून की कमी के लक्षण (brain clot symptoms in hindi ) क्या हैं। इसके साथ ही जानेंगे ब्रेन क्लॉट की जांच और दिमाग में खून जमने के इलाज के बारे में सब कुछ।
दिमाग में खून जमने से क्या होता है?
दिमाग में खून का थक्का जमना (blood clotting in hindi) काफी गंभीर कहा जाता है। दिमाग में खून का थक्का तब जमता है जब दिमाग में खून और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली वैसल्स यानी धमनियां अवरुद्ध होकर संकरी होने लगती हैं। कई बार संकरी होकर ये धमनियां टूट जाती हैं इनमे भरा खून कोशिकाओं में ही जम जाता है। इससे दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई अवरुद्ध होने लगती है। इसे ब्रेन क्लॉट कहते हैं। दिमाग में खून जमने से दिमाग की कोशिकाओं को बहुत नुकसान पहुंचता है और स्ट्रोक (दिमाग में खून जमने से क्या होता है)
आमतौर पर ब्रेन क्लॉटिंग (blood clotting in hindi) को गंभीर मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है जिसके लिए तुरंत डॉक्टरी सहायता का जरूरत होती है। ब्रेन क्लॉट दो प्रकार का होता है – थ्रोम्बोसिस और एम्बोलिज्म।
दिमाग में खून जमने के कारण क्या हैं?
- ब्रेन क्लॉटिंग के कई कारण हैं। ये कारण इस प्रकार हैं –
- हाई ब्लड प्रेशर
- डायबिटीज की स्थिति
- बढ़ा हुआ वजन
- ज्यादा स्मोकिंग करना या ज्यादा शराब का सेवन
- बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
- हार्मोन संबंधी दवाओं का लगातार सेवन
- एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में फैट जमना)
- दिमाग में चोट लगना
- ब्लड रिलेटेड डिस्ऑर्डर
- लंबी यात्रा
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- ह्रदय संबंधी रोग जैसे एट्रियल फिब्रिलेशन
- वंशानुगत स्थितियां
दिमाग में खून की कमी के लक्षण क्या होते हैं?
ब्रेन में क्लॉट के लक्षण (brain clot symptoms in hindi) आमतौर पर बहुत ही कम और देर से दिखते हैं। कई बार लोगों को बिना लक्षण के भी ब्रेन क्लॉटिंग (blood clotting in hindi) हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि इसके सभी लक्षणों को समय रहते पहचाना जाए। ब्रेन में क्लॉट के लक्षण (brain clot symptoms in hindi) इस प्रकार हैं –
- सिर में तेज दर्द – मरीज के सिर में बार बार और तेज सिर में दर्द होता है।
- नजर धुंधली होना – मरीज की नजर धुंधली हो जाती है।
- सांस फूलना – बिना कामकाज किए भी मरीज की सांस फूलने लगती है।
- भ्रम की स्थिति पैदा होना – मरीज को सोचने समझने में दिक्कत होती है और भ्रम होने लगता है।
- चक्कर महसूस होना – मरीज को चक्कर आने लगते हैं और जो गंभीर हादसे और चोट का कारण बन सकते हैं। मरीज को संतुलन बनाए रखने में दिक्कत होने लगती है।
- अचानक बोलने में कठिनाई होना – मरीज को बोलने में दिक्कत आने लगती है और उसकी जुबान लड़खड़ाने लगती है।
- कंपन और झटके महसूस होना – मरीज के हाथ पैरों में अचानक कंपन होने लगता है और उसके हाथ पैरों में झटके लगने लगते हैं।
- दौरे आना – मरीज को दौरे आ सकते हैं।
- लकवा मारना – कई मामलों में मरीज को लकवा यानी पैरालिसिस का अटैक आ सकता है। शरीर के किसी भी हिस्से में लकवा मार सकता है।
दिमाग में खून का थक्का जमने की जांच किस तरह होती है?
ब्लड क्लॉटिंग (blood clotting in hindi) की जांच कई तरह से की जाती है। इसमें पहले डॉक्टर मरीज से लक्षणों की जानकारी लेते हैं। इसके बाद मरीज की वंशानुगत और मेडिकल हिस्टरी पूछी जाती है। इसके बाद कुछ डायग्नोस्टिक टेस्ट की सलाह दी जाती है। ये टेस्ट इस प्रकार हैं –
- ब्लड टेस्ट – ब्लड क्लॉटिंग की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट जैसे डी डाइमर, पीटी/पीटीटी, आईएनआर और प्लेटटेट काउंट किया जाता है।
- इमेजिंग टेस्ट – इस बीमारी की सटीक जांच के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई की जाती है।
- एंजियोग्राफी – ब्लड क्लॉटिंग की जांच के लिए एंजियोग्राफी की जाती है। इससे पता चलता है कि मरीज के दिमाग के किस हिस्से में क्लॉट हुआ है।
दिमाग में खून जमने का इलाज क्या है?
दिमाग में खून जमने (blood clotting in hindi) पर दवाओं के साथ साथ सर्जरी और कैथेटर आधारित फिल्टर के जरिए भी किया जाता है। इसके साथ साथ मरीज के लाइफस्टाइल को संतुलित करना भी जरूरी होता है।
देखा जाए तो दिमाग में खून जमने (blood clotting in hindi) से मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में इसके सही मैनेजमेंट के लिए समय रहते इसके लक्षणों (brain clot symptoms in hindi) की पहचान करना और सटीक जांच काफी महत्वपूर्ण है। सटीक जांच के जरिए ही मरीज का सही इलाज संभव है। अगर किसी व्यक्ति में ब्लड क्लॉटिंग के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। ब्लड क्लॉटिंग संबंधी टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
1.दिमाग में खून जमने से क्या होता है?
दिमाग में खून जमने यानी ब्लड क्लॉटिंग से दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है जिससे मरीज को स्ट्रोक आ सकता है और स्थिति जानलेवा हो सकती है।
2.दिमाग में खून की कमी के लक्षण क्या हैं?
दिमाग में खून की कमी के लक्षण (brain clot symptoms in hindi) सिर में तेज दर्द, धुंधली नजर, हाथ पैरों का सुन्न होना, दौरे, चक्कर, लकवा आदि हैं।








