इंसुलिन प्रतिरोध क्या है? कारण, लक्षण और इलाज
- 14 Feb, 2026
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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दुनिया भर में करोड़ों लोग डायबटीज जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे हैं। डायबिटीज का मुख्य कारण इंसुलिन प्रतिरोध यानी इंसुलिन रेसिस्टेंस (insulin resistance meaning in hindi) कहा जाता है। देखा जाए तो इंसुलिन प्रतिरोध शरीर में मेटाबॉलिज्म से जुड़ी एक मेडिकल कंडीशन है। इस स्थिति में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन (insulin resistance in hindi) हार्मोन के प्रति सही प्रकार से रिएक्ट नहीं कर पाती हैं। इंसुलिन का सही अवशोषण नहीं होने पर शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और इससे प्री डायबिटीज या डायबिटीज टाइप टू का खतरा बढ़ जाता है। इंसुलिन(insulin resistance in hindi) की बात करें तो ये ऐसा हार्मोन है जो पैनक्रियाज यानी अग्नाशय में बनता है। इंसुलिन का मुख्य काम खून में मौजूद ग्लूकोज यानी शर्करा को नियंत्रित करना है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन को सही तौर पर अवशोषित नहीं कर पाती तो शरीर में इंसुलिन के उत्पादन में अव्यवस्था पैदा होने लगती है। ऐसे में या तो इंसुलिन (insulin resistance in hindi)का उत्पादन कम होता है और शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है। इससे शरीर डायबिटीज का शिकार होने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि इंसुलिन रेजिस्टेंट टेस्ट (insulin resistance test) के जरिए शरीर में इंसुलिन की स्थिति का पता लगाया जाए ताकि सही समय पर इलाज संभव हो सके। इंसुलिन रेजिस्टेंस टेस्ट ये बताता है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति किस तरह का और कितना प्रतिरोध पैदा कर रही हैं। इस लेख में जानते हैं कि इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance meaning in hindi) क्या होता है और इंसुलिन प्रतिरोध किस वजह से होता है। साथ ही जानेंगे इंसुलिन प्रतिरोध के लक्षण और इंसलिन रेसिस्टेंस टेस्ट (insulin resistance test) के बारे में सब कुछ।
इंसुलिन प्रतिरोध क्या है?
इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance meaning in hindi) यानी इंसुलिन रेरिस्टेंस वो स्थिति है जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति सही से रिएक्शन यानी प्रतिक्रिया करना कम कर देती हैं। जब कोशिकाएं इंसुलिन को लेकर सही प्रतिक्रिया नहीं करती तो शरीर में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है जिसके चलते अग्नाशय को मजबूरन ज्यादा इंसुलिन का उत्पादन करना पड़ता है। इंसुलिन का शरीर में असंतुलन डायबिटीज को जन्म देता है जो अपने आप में एक गंभीर स्थिति है। देखा जाए तो डायबिटीज ऐसी स्थिति है जो कई सारी शारीरिक जटिलताओं को जन्म देती है। इसमें मोटापा और हार्ट डिजीज शामिल हैं। इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance meaning in hindi) को पहचानने के लिए समय पर इंसुलिन रेरिस्टेंस टेस्ट (insulin resistance test)करवाने की सलाह दी जाती है ताकि पता चल सके कि कोशिकाएं इंसुलिन को लेकर किस तरह रिएक्ट कर रही हैं।
इंसुलिन प्रतिरोध के कारण क्या हैं?
इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance meaning in hindi)तब होता है जब शरीर की मांसपेशियों के साथ साथ लिवर और फैट की कोशिकाएं उसके लिए सही से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। ऐसे में ग्लूकोज खून में जमा होने लगता है। इंसुलिन रेसिस्टेंस (insulin resistance meaning in hindi) के कई कारण हैं जो लाइफस्टाइल से भी जुड़े हो सकते हैं। इसके कारण इस प्रकार हैं –
- ज्यादा वजन – जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है,उन लोगों के शरीर में इंसुलिन रेसिस्टेंस होने का खतरा ज्यादा होता है।
- असंतुलित डाइट – ज्यादा तला भुना, प्रोसेस्ड भोजन इंसुलिन रेसिस्टेंस की वजह कहा जाता है। इसके साथ साथ ज्यादा कैलोरी युक्त भोजन भी इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ाता है।
- एक्सरसाइज की कमी – फिजिकल एक्टिविटी की कमी होने के चलते भी कोशिकाएं इंसुलिन (insulin resistance in hindi) के लिए कम रिएक्शन देने लगती हैं।
- तनाव – ज्यादा स्ट्रेस और नींद की कमी भी इंसुलिन प्रतिरोध के खतरे को जन्म देती है।
- जेनेटिक – इंसुलिन प्रतिरोध आनुवांशिक भी हो सकता है,यानी अगर परिवार में माता पिता या भाई बहन को ये दिक्कत है तो इसका खतरा बढ़ सकता है।
- हार्मोन असंतुलन – जिन लोगों के शरीर में हार्मोन असंतुलन है, वहां इंसुलिन रेसिस्टेंस (insulin resistance in hindi) होने के रिस्क बढ़ जाते हैं।
- कुछ खास दवाएं – कुछ खास दवाएं जैसे स्टेरॉइड आदि के लगातार सेवन से भी ये स्थिति पैदा हो सकती है।
इंसुलिन प्रतिरोध के लक्षण क्या हैं?
इंसुलिन प्रतिरोध के लक्षणों में शरीर में ज्यादा थकान दिखती है। इसके अलावा इसके लक्षणों में त्वचा पर काले धब्बे, बार बार यूरिन आना,बार बार प्यास लगना, भूख बढ़ जाना, वजन में तेजी से बढ़ावा होना, धुंधली नजर शामिल हैं।
इंसुलिन रेसिस्टेंट टेस्ट का महत्व और तरीका क्या है?
शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध का पता लगाने के लिए डॉक्टर इंसुलिन प्रतिरोध टेस्ट यानी इंसुलिन रेसिस्टेंस टेस्ट (insulin resistance test)की सलाह देते हैं। इंसुलिन प्रतिरोध टेस्ट (insulin resistance test)में कई तरह के टेस्ट शामिल होते हैं जैसे होमा-आईआर टेस्ट (HOMA-IR), फास्टिंग इंसुलिन टेस्ट, ओरल ग्लूकोज और एचबीएवनसी (HbA1c)ब्लड टेस्ट।
- होमा-आईआर (HOMA-IR) – इसे होमियोस्टेटिक मॉडल एसेसमेंट ऑफ इंसुलिन रेसिस्टेंस टेस्ट कहा जाता है। इस टेस्ट में फास्टिंग यानी उपवास के दौरान शरीर का ब्लड शुगर और इंसुलिन का मापा जाता है। इस माप के आधार पर शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध की जांच की जाती है।
- फास्टिंग इंसुलिन टेस्ट – अगर उपवास के दौरान शरीर में इंसुलिन का लेवल ज्यादा है लेकिन ग्लूकोज का लेवल सामान्य है या फिर कुछ ही ज्यादा है तो ये इंसुलिन प्रतिरोध का संकेत हो सकता है।
- ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट – इस टेस्ट के तहत मरीज को ग्लूकोज मिलाकर पानी पीने को दिया जाता है। इससे पता चलता है कि शरीर किस तरह और कितनी देर में ग्लूकोज को पचा पा रहा है।
- एचबीएवनसी (HbA1c) – आम तौर पर दो से तीन माह के बीच किया जाने वाला ये ब्लड टेस्ट शरीर में ब्लड शुगर को मापने के साथ साथ ग्लूकोज के पाचन और नियंत्रण की जानकारी देता है।
इंसुलिन प्रतिरोध का पता लगाने के लिए नए दौर में इंसुलिन प्रतिरोध टेस्ट (insulin resistance test) एक कारगर परीक्षण माना जाता है। अगर शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी सलाह लें। डॉक्टरी सलाह के पश्चात डॉ. लाल पैथलैब्स में इंसुलिन प्रतिरोध टेस्ट (insulin resistance test) के लिए शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
- इंसुलिन प्रतिरोध क्या है?
इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance meaning in hindi)वो स्थिति है जब शरीर की कोशिकाएं पैनक्रियाज में बनने वाले हार्मोन इंसुलिन को लेकर सही तौर पर प्रतिक्रिया करना कम कर देती हैं। इससे शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और डायबिटीज का खतरा पैदा हो जाता है। - इंसुलिन रेसिस्टेंस टेस्ट का क्या महत्व है?
इंसुलिन रेसिस्टेंस टेस्ट (insulin resistance test)के जरिए शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध का पता लगाया जा सकता है। इस टेस्ट के तहत होमा-आईआर टेस्ट, फास्टिंग इंसुलिन टेस्ट और ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा एचबीएवनसी ब्लड टेस्ट भी इस टेस्ट का एक हिस्सा है।








