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गर्भाशय खराब होने के शुरुआती लक्षण जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें

Medically Approved by Dr. Shuchi

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uterus in hindi
महिलाओं की प्रजनन प्रक्रिया में गर्भाशय (uterus in hindi) की मुख्य भूमिका होती है। गर्भाशय महिलाओं के पेल्विस एरिया यानी पेट के निचले हिस्से में मौजूद नाशपाती के आकार का एक खोखला अंग है। इसे प्रजनन की प्रक्रिया में बहुत ही अहम माना जाता है क्योंकि इसी अंग (uterus in hindi) में ही निषेचित अंडा विकसित होता है। इसी गर्भाशय के अंदर भ्रूण को पूरे प्रेगनेंसी पीरियड में सुरक्षा और पर्याप्त पोषण प्राप्त होता है और इसी के अंदर वो पूरी तरह विकास करता है। आम भाषा में गर्भाशय को बच्चेदानी भी कहा जाता है। कई बार गर्भाशय अगर खराब हो जाए या उसका आकार (गर्भाशय का आकार कितना होना चाहिए) बदल जाए, या वो अपने स्थान से खिसक जाए तो प्रजनन और मासिक धर्म की प्रक्रिया में दिक्कतें पैदा होने लगती है। गर्भाशय के साथ ऐसी दिक्कतें होने पर डॉक्टर इससे जुड़े कुछ टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इस लेख में जानते हैं कि गर्भाशय क्या होता है और गर्भाशय का आकार कितना होना चाहिए। इसके साथ साथ जानेंगे गर्भाशय (uterus in hindi) के खराब होने के लक्षणों औऱ उपाय के बारे में सब कुछ।

 

गर्भाशय किसे कहते हैं?

गर्भाशय (uterus in hindi) को आम भाषा में कोख या बच्चेदानी कहा जाता है। महिलाओं की प्रजनन प्रणाली में गर्भाशय का अहम योगदान होता है। श्रोणि यानी पेल्विस के नीचे मांसपेशियों का एक अंग जो अंदर से खोखला होता है, गर्भाशय कहलाता है। देखा जाए तो गर्भाशय प्रेगनेंसी के दौरान निषेचित हुए अंडाणु को धारण करता है और इसी स्थान पर अंडाणु का पोषण होता है और अंडे से बना भ्रूण शिशु के रूप में विकसित होता है। गर्भाशय (uterus in hindi) (गर्भाशय किस साइड होता है ) पेट के निचले और खाली हिस्से जिसे पेल्विक केविटी कहा जाता है, के ठीक बीच में स्थित होता है। एक उल्टी नाशपाती की तरह दिखने वाले गर्भाशय के आगे रेक्टल एरिया यानी मलाशय होता है और पीछे पर ब्लैडर यानी मूत्राशय होता है।

 

गर्भाशय के आकार (गर्भाशय का आकार कितना होना चाहिए) की बात करें तो सामान्य समय की अपेक्षा प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय (uterus in hindi) का आकार बदल जाता है। एक सामान्य महिला में गर्भाशय का आकार एक नाशपाती के बराबर होता है।

 

प्रेगनेंसी के दौरान चूंकि गर्भाशय में भ्रूण का विकास होता है, इसलिए इस दौरान गर्भाशय का आकार बदल जाता है। कई बार शरीर में हार्मोनल बदलावों के चलते भी गर्भाशय का आकार बदल जाता है। कुछ महिलाओं के शरीर में बल्की यानी भारी यूटरस होता है यानी उनके शरीर में गर्भाशय का आकार सामान्य से अधिक होता है, लेकिन ये सामान्य कहलाता है। इसके अलावा मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलावों के चलते भी गर्भाशय के आकार में कमी दिखती है।

 

गर्भाशय खराब होने के लक्षण और उपाय

कई बार खराब लाइफस्टाइल, संक्रमण, फाइब्राइड या फिर हार्मोनल संबंधी समस्याओं के चलते गर्भाशय (uterus in hindi) खराब हो जाता है। गर्भाशय खराब होने पर पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द होता है और कई अन्य लक्षण उभरते हैं। गर्भाशय (uterus problems in hindi) खराब होने के लक्षण इस प्रकार हैं –

 

  1. पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
  2. पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द होना
  3. पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होना
  4. योनि से व्हाइट डिस्चार्ज होना
  5. पीठ और पैरों में दर्द होना
  6. गर्भधारण करने में दिक्कत होना
  7. इंटीमेशन के दौरान योनि में दर्द महसूस होना
  8. पेट में सूजन आना
  9. कमजोरी और थकावट महसूस होना
  10. बार बार यूरिन आना
  11. यूरिन करते वक्त जलन महसूस होना

गर्भाशय (uterus in hindi) खराब होने से बचने के लिए कई तरह के उपाय और उपचार किए जा सकते हैं। महिलाओं को गर्भाशय को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ लाइफस्टाइल का पालन करना चाहिए। इसमें सही वजन और पर्सनल हाईजीन काफी महत्वपूर्ण कही जाती है। इसके अलावा संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और अल्कोहल से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। संतुलित डाइट की बात करें तो इसमें फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन करना और हरी सब्जियों और फलों का सेवन करना चाहिए।

 

अगर गर्भाशय (uterus in hindi) में किसी प्रकार का संक्रमण या गांठ है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर किसी महिला को लगातार पेट के निचले हिस्से में दर्द हो रहा हो या फिर पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग हो रही हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा यूरिन में जलन, यूरिन करते समय दर्द या थकान और कमजोरी है तो भी गर्भाशय से जुड़ी दिक्कत हो सकती है।

 

गर्भाशय की जांच किस तरह होती है?

गर्भाशय के खिसकने, संक्रमण होने या गर्भाशय से जुड़ी अन्य दिक्कतों के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. इनमें सबसे प्रमुख है टीवीएस (hsg). टीवीएस (ट्रांस वेजाइनल अल्ट्रासाउंड) एक अल्ट्रासाउंड है जिसमें वेजाइना के जरिए गर्भाशय में सूजन, रसौली या फाइब्रॉइड की जांच की जाती है। इसके अलावा हिस्टेरोकोपी (Hysteroscopy) या एचएसजी (HSG – Hysterosalpingography) एक्सरे के तहत भी गर्भाशय की जांच की जाती है।

 

स्वस्थ प्रजनन प्रणाली के लिए गर्भाशय को स्वस्थ रखना बहुत महत्वपूर्ण कहा जाता है। अगर किसी महिला में गर्भाशय खराब होने के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टरी सलाह के बाद गर्भाशय की सटीक जांच के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

  1. गर्भाशय किस साइड होता है?
    गर्भाशय पेट के निचले हिस्से में बिलकुल बीच में स्थित होता है। इसके आगे मलाशय और पीछे की तरफ मूत्राशय होता है। गर्भाशय का सामान्य आकार प्रेगनेंसी या मेनोपॉज के बाद अक्सर बढ़ जाता है।
  2. गर्भाशय की जांच किस तरह की जाती है?
    गर्भाशय की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है जिसे टीवीएस कहते हैं। इसके अलावा गर्भाशय की दूरबीन विधि और एक्सरे के जरिए भी सटीक जांच की जाती है।
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