एंटीरियर vs पोस्टीरियर प्लेसेंटा: गर्भावस्था में इनमें क्या फर्क होता है?
- 22 Dec, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है जहां वो हर पल गर्भाशय में पल रहे शिशु के भीतर होने वाले बदलावों को महसूस करती है। गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा (placenta meaning in hindi) की पोजिशन काफी मायने रखती है। प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर होने वाली मां को प्लेसेंटा की पोजिशन के बारे में बताते हैं कि वो एंटीरियर (placenta anterior meaning in hindi) है या पोस्टीरियर। लेकिन अधिकतर लोग शुरूआत में इसका मतलब नहीं समझ पाते हैं। प्लेसेंटा (placenta meaning in hindi) दरअसल गर्भाशय में पल रहे भ्रूण को ऑक्सीजन मुहैया कराने कराने वाला अस्थाई अंग है और इसी के जरिए शिशु तक पोषक तत्व भी पहुंचते हैं। कुछ महिलाओं के गर्भाशय में प्लेसेंटा की पोजिशन एंटीरियर होती है और कुछ के गर्भाशय में इसकी पोजिशन पोस्टीरियर। हालांकि प्लेसेंटा की ये दोनों ही पोजिशन सामान्य हैं लेकिन फिर भी इनमें थोड़ा सा अंतर होता है। चलिए इस लेख में जानते हैं कि प्लेसेंटा क्या होता है (placenta meaning in hindi) और एंटीरियर और पोस्टीरियर प्लेसेंटा (placenta posterior meaning in hindi) का मतलब क्या होता है। साथ ही जानेंगे इन दोनों के बीच का फर्क।
प्लेसेंटा क्या होता है?
प्लेसेंटा (placenta meaning in hindi) प्रेग्नेंसी के दौरान यूटरस यानी गर्भाशय में बनने वाला वो अस्थाई अंग है जो गर्भनाल के जरिए मां और भ्रूण को आपस में जोड़ता है। प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से चिपका होता है। आपको बता दें कि प्लेसेंटा प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत ही महत्वपूर्ण अंग माना जाता है क्योंकि इसी के जरिए पेट में पल रहे शिशु को मां के खून से ऑक्सीजन और ग्लूकोज के साथ साथ विकसित होने के लिए अन्य पोषक पदार्थ मिलते हैं। प्लेसेंटा अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है और इसी की मदद से शिशु को लाइफ सपोर्ट सिस्टम मिलता है। प्लेसेंटा ही वो अस्थाई अंग है जिसकी मदद से शिशु के ककिडनी, फेफड़े और पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है। प्लेसेंटा का दूसरा काम प्रेग्नेंसी के दौरान जरूरी हार्मोन के स्तर को बनाए रखना भी है। यही नहीं प्लेसेंटा प्रेग्नेंसी के दौरान शिशु को हानिकारक पदार्थों और कई तरह के इंफेक्शन से भी बचाता है। देखा जाए तो पूरी प्रेग्नेंसी में शिशु के विकास और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार प्लेसेंटा (placenta meaning in hindi) बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। प्लेसेंटा प्रेग्नेंसी की शुरूआत में बनता है और बच्चे के जन्म के कुछ देर बाद गर्भाशय से बाहर निकल जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान प्लेसेंटा की पोजिशन गर्भाशय में अलग अलग हो सकती है। प्लेसेंटा गर्भाशय में दो पोजिशन में होता है। एक है एंटीरियर प्लेसेंटा (placenta anterior meaning in hindi)और दूसरा है पोस्टीरियर प्लेसेंटा (placenta posterior meaning in hindi)। हालांकि प्लेसेंटा (anterior and posterior) की पोजिशन भले ही अलग होती है लेकिन इन दोनों ही पोजिशन को आमतौर पर सामान्य कहा जाता है।
पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है?
पपोस्टीरियर प्लेसेंटा का मतलब है पिछली दीवार से जुड़ा प्लेसेंटा। ये (placenta posterior meaning in hindi) तब होता है जब प्लेसेंटा गर्भाशय की पिछली दीवार यानी मां की रीढ़ की तरफ की दीवार पर जुड़ा होता है। ये एक सामान्य पोजिशन है लेकिन इस दौरान मां को शिशु की हलचल ज्यादा महसूस होती है। इस पोजिशन में जब अल्ट्रासाउंड होता है तो बच्चे के शरीर और चेहरे की साफ स्क्रीनिंग हो पाती है। इस पोजिशन (पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है) में बच्चे के दिल की धड़कन भी डॉप्लर की मदद से साफ सुनाई देती है। इसका कारण ये है कि पिछली दीवार से जुड़ा होने के कारण बच्चे को हाथ पैर हिलाने में किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ता है और उसकी लातें ठीक मां की पीठ पर महसूस होती हैं।
एंटीरियर प्लेसेंटा क्या होता है?
एंटीरियर प्लेसेंटा (placenta anterior meaning in hindi) का मतलब है कि प्लेसेंटा गर्भाशय में सामने की तरफ यानी पेट की तरफ की दीवार से जुड़ा है। हालांकि एंटीरियर प्लेसेंटा की पोजिशन भी पूरी तरह सामान्य है लेकिन इस दौरान मां बच्चे की शुरुआती हलकतें देर से महसूस कर पाती हैं। इस दौरान जब बच्चा मूवमेंट करता है या हाथ पैर चलाता है तो पेट की दीवार बीच में कुशन की तरह आती है और मां को बच्चे की मूवमेंट ज्यादा महसूस नहीं होती हैं। एंटीरियर प्लेसेंटा की पोजिशन में अल्ट्रासाउंड के दौरान बच्चे की सटीक इमेजिंग करने में कुछ दिक्कतें आती हैं। एंटीरियर प्लेसेंटा की पोजिशन में एक रिस्क यही है कि इस दौरान प्लेसेंटा प्रीविया का खतरा हो सकता है। ये वो स्थिति है जब प्लेसेंटा पेट की सर्विक्स को ढक लेता है। देखा जाए तो पोस्टीरियर की तरह एंटीरियर प्लेसेंटा की पोजिशन भी मां और बच्चे के लिए पूरी तरह सामान्य है। लेबर और डिलीवरी की बात करें तो दोनों ही स्थितियां सामान्य मानी जाती हैं।
फंडो पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है?
फंडो पोस्टीरियर प्लेसेंटा वो स्थिति है जब प्लेसेंटा गर्भाशय के सबसे ऊपरी हिस्से जिसे फंडस कहते हैं और पीछे की दीवार से जुड़ा होता है। ये पोजिशन एक भी एक आदर्श पोजिशन कही जाती है और बिलकुल सामान्य स्थिति कहलाती है। इस दौरान मां को बच्चे की मूवमेंट जल्दी पता चलती हैं औऱ अल्ट्रासाउंड में भी बच्चे की स्थिति सही पता चलती है।
एंटीरियर और पोस्टीरियर प्लेसेंटा में क्या फर्क है?
देखा जाए तो एंटीरियर और पोस्टीरियर प्लेसेंटा की पोजिशन सामान्य होती हैं। प्रेग्नेंसी और प्रसव यानी डिलीवरी पर इनका कोई खास असर नहीं होता है। एंटीरियर प्लेसेंटा की पोजिशन में मां को फेटल मूवमेंट (बच्चे की हलचल )का कम और देर से अनुभव होता है जबकि पोस्टीरियर प्लेसेंटा (पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है) में फेटल मूवमेंट सटीक और ज्यादा महसूस होती हैं। पोस्टीरियर प्लेसेंटा में अल्ट्रासाउंड और डॉप्लर टेस्ट का रिजल्ट ज्यादा सटीक आता है। लेकिन इस पोजिशन में शिशु की लातों के चलते मां को ज्यादा कमर दर्द का अहसास होता है। एंटीरियर प्लेसेंटा (anterior and posterior)में फेटल मूवमेंट कम और देर से महसूस होती हैं। इस पोजिशन में अल्ट्रासाउंड में शिशु के अंगों की साफ तस्वीर लेने में कुछ दिक्कतें आती हैं। लेकिन इस पोजिशन में चूंकि शिशु की लातें मां को कम लगती हैं इसलिए इस दौरान मां को कमर में दर्द के कम चांस होते हैं।
सामान्य तौर पर प्रेग्नेंसी के 18वें से लेकर 22वें हफ्ते के दौरान एनाटॉमी स्कैन के दौरान प्लेसेंटा की स्थिति की जानकारी मिलती है। सटीक औऱ सुरक्षित एनाटॉमी स्कैन के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
1.पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है?
पपोस्टीरियर प्लेसेंटा वो स्थिति है जब प्रेग्नेंसी के दौरान प्लेसेंटा गर्भाशय की पिछली दीवार यानी पीठ की तरफ जुड़ता है।
2.एंटीरियर प्लेसेंटा क्या होता है?
एंटीरियर प्लेसेंटा में प्लेसेंटा गर्भाशय की सामने की दीवार यानी पेट की तरफ जुड़ता है। इस दौरान मां को बच्चे की हलचल और मूवमेंट देर से पता चलती हैं।








