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लो BP क्यों होता है और इससे बचाव के आसान तरीके

Medically Approved by Dr. Shuchi

Table of Contents

Low BP in Hindi

ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप का सामान्य रहना किसी भी स्वस्थ शरीर के लिए काफी जरूरी माना जाता है। लेकिन कई लोग हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन Hypertension) और लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) की समस्या का शिकार हो जाते हैं। बढ़ता तनाव, असंतुलित डाइट, मिनरल्स और दूसरे पोषक तत्वों की कमी के चलते शरीर में ब्लड का फ्लो कम होता है और ब्लड प्रेशर लो (low bp range) हो जाता है जिससे कई दूसरी हेल्थ संबंधी दिक्कतें पैदा होती हैं। इस लेख में जानते हैं कि बीपी लो क्यों होता है और बीपी लो होने से क्या नुकसान होते हैं। इसके साथ साथ जानेंगे कि लो बीपी कितना (low bp range) होता है और लो बीपी कैसे ठीक होता है।

 

बीपी लो क्यों होता है?

 

बीपी लो होने के एक नहीं कई कारण होते हैं। तेज गर्मी, तनाव, पोषण की कमी और दूसरे कई कारण ब्लड प्रेशर को लो कर डालते हैं। बीपी लो होने के कारण इस प्रकार हैं –

 

  1. मौसम में बदलाव – ज्यादा गर्म मौसम में जब शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसे डिहाइड्रेशन कहते हैं। शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड का फ्लो कम होता है और बीपी लो (low bp range) होने लगता है।
  2. शरीर में खून की कमी – अगर शरीर में आयरन और विटामिन बी 12 की कमी (symptoms of vitamin b12 deficiency) हो जाए तो लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है जिससे ब्लड फ्लो कम होता है और बीपी लो (low bp range) होने लगता है।
  3. पोषक तत्वों की कमी – लंबे समय तक भूखे रहने, पानी न पीने, सोडियम यानी नमक और दूसरे मिनरल्स की कमी से भी ब्लड प्रेशर लो होने के खतरे बढ़ जाते हैं।
  4. प्रेग्नेंसी के दौरान – प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के चलते शरीर के ब्लड फ्लो पर असर पड़ता है और बीपी कम हो सकता है।
  5. संक्रमण – शरीर जब किसी संक्रमण की चपेट में आए जैसे सैप्सिस (Sepsis), ऐसे में रक्त धमनियां फैल जाती हैं जिससे बीपी कम (low bp range) हो जाता है।
  6. ह्रदय संबंधी दिक्कतें – दिल संबंधी कई बीमारियां जैसे धीमी हार्ट बीट या हार्ट के वॉल्व की समस्या भी ब्लड प्रेशर के लो होने का कारण बन सकती है।
  7. एंक्रोडाइन डिस्ऑर्डर – थायरॉइड या एडिसन जैसे एंक्रोडाइन डिस्ऑर्डर भी ब्लड प्रेशर के लो होने का कारण बन सकते हैं।
  8. अचानक खड़े होना – अगर कोई व्यक्ति लेटा या बैठा है और वो अचानक खड़ा होता है तो उसका रक्त पैरों की तरफ चला जाता है जिससे दिमाग में खून का फ्लो कम हो जाता है जिससे बीपी कम होने के खतरे बढ़ जाते हैं।
  9. दवाएं – कुछ लोग जो लगातार हाई बीपी या डिप्रेशन की दवा खाते आ रहे हैं, उनका ब्लड प्रेशर भी अक्सर लो हो जाता है।

 

बीपी लो होने के लक्षण क्या हैं?

 

बीपी कम होने के लक्षण (बीपी लो लक्षण) अक्सर कमजोरी से जुड़े होते हैं। बीपी लो होने के लक्षण (bp low symptoms in hindi) इस प्रकार हैं –

 

  1. थकान महसूस होना
  2. कमजोरी महसूस होना
  3. चक्कर आना
  4. धुंधली नजर
  5. मतली और उल्टी महसूस होना
  6. बेहोशी छाना
  7. ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत
  8. दिल की धड़कन अनियमित या धीमी होना
  9. ठंडा पसीना आना
  10. घबराहट महसूस होना
  11. सीने में दर्द या भारीपन महसूस होना
  12. सांस लेने में ताकत लगाना
  13. सिर में दर्द महसूस होना

 

बीपी लो होने के नुकसान क्या है?

 

दरअसल जब ब्लड प्रेशर कम होता है तो शरीर के अंगों तक पर्य़ाप्त खून और ऑक्सीजन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ता है। जब शरीर के अंगों तक खून और ऑक्सीजन (low bp range) नहीं पहुंच पाता तो कई गंभीर दिक्कतें पैदा हो सकती हैं जैसे किडनी फेलियर (Kidney Failure), ब्रेन डैमेज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक (बीपी लो होने के नुकसान) आदि। अगर बीपी ज्यादा समय तक कम रहता है तो मरीज कोमा में भी जा सकता है और उसकी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। अगर प्रेग्नेंसी में महिला का ब्लड प्रेशर कम होता है तो इसके चलते पेट में पल रहे भ्रूण को भी खून की सप्लाई (बीपी लो होने के नुकसान) कम होने लगती है जिससे बच्चे के ब्रेन को डैमेज और जन्म के समय ही मौत होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

लो बीपी कितना होता है?

 

आमतौर पर लोग संशय में रहते हैं कि लो बीपी कितना होता है यानी कैसे पता लगे कि बीपी कम हो रहा है। ऐसे में बीपी की सामान्य सीमा यानी सामान्य रेंज (low bp range) जानना बहुत जरूरी है। एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में ब्लड प्रेशर की नॉर्मल रेंज 120/80 mmHg होती है। इसमें 120 सिस्टोलिक प्रेशर (ऊपरी नंबर) और 80 डायस्टोलिक प्रेशर (निचला नंबर) है। अगर ब्लड प्रेशर 90/60 mmHg से कम आ रहा है तो इसे बीपी लो (low bp range) कहा जाता है। अगर ब्लड प्रेशर 90/60 mmHg से कम आ रहा है तो तुरंत डॉक्टरी परामर्श करना चाहिए। खासतौर पर बुजुर्गों और प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए कम ब्लड प्रेशर की स्थिति काफी खतरनाक हो सकती है। ऐसे में जिन लोगों का बीपी अक्सर कम (low bp range) रहता है, उन्हें समय समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करते रहना चाहिए।

 

बीपी लो कैसे ठीक होता है?

 

बीपी लो होने पर इसका सही मैनेजमेंट काफी महत्वपूर्ण साबित होता है। अगर बीपी लो रहता है तो मरीज को संतुलित डाइट और स्वस्थ लाइफस्टाइल (लो बीपी के लक्षण और इलाज) को फॉलो करना चाहिए। सोडियम और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लो बीपी में काफी कारगर साबित होती है। बीपी लो होने पर सोडियम का इनटेक बढ़ाएं यानी अपनी डाइट में नमक का सेवन ज्यादा करें। डाइट में पोटेशियम और मैग्नीशियम से भरपूर फूड्स को शामिल करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। बीपी लो होने पर नारियल पानी, छाछ, लस्सी, नमक चीनी का घोल या बाजार में मिलने वाला इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक पिएं।

 

शरीर के स्वस्थ रहने के लिए बीपी का सामान्य रेंज में रहना काफी जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति में लो बीपी के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी परामर्श करें। डॉक्टरी परामर्श के बाद जरूरी टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

 

1.बीपी लो के लक्षण किस तरह दिखते हैं?

लो बीपी के लक्षणों में चक्कर आना, कमजोरी, थकावट, मतली, सिर में दर्द, बेहोशी आदि शामिल हैं।

 

2.लो बीपी कितना होता है?

बीपी की सामान्य रेंज 120/80 mmHg मानी जाती है। अगर बीपी की रेंज 90/60 mmHg (low bp range) से कम होती है तो इसे बीपी लो होना कहते हैं।

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