ऑस्टियोपोरोसिस क्या होता है: ऑस्टियोपोरोसिस किसकी कमी से होता है?
- 27 Nov, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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शरीर के स्वास्थ्य और मजबूती के लिए हड्डियों का मजबूत रहना काफी जरूरी माना जाता है। लेकिन पोषण की कमी और बढ़ती उम्र और कुछ दूसरे कारणों चलते अक्सर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। हड्डियों से जुड़ी ऐसी ही एक बीमारी है जिसे ऑस्टियोपोरोसिस (meaning of osteoporosis in hindi) कहा जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इस बीमारी में हड्डियां के अंदर खनिज की डेंसिटी यानी घनत्व और द्रव कम होने लगता है जिससे हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती है। हड्डियों के कमजोर होने पर इनके टूटने और क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है। आपको बता दें कि ऑस्टियोपोरोसिस का रोग धीरे धीरे डेवलप होता है और मरीज को इसके लक्षण तब दिखाई देते हैं जब उसकी हड्डियां किसी छोटी चोट से भी टूट जाती हैं। इस लेख में जानते हैं कि ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis in hindi) क्या होता है और ऑस्टियोपोरोसिस के कारण क्या हैं। साथ ही जानेंगे ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के बारे में सब कुछ।
ऑस्टियोपोरोसिस क्या होता है?
ऑस्टियोपोरोसिस (meaning of osteoporosis in hindi) हड्डियों से जुडी बीमारी है जिसमें हड्डियों के अंदर का द्रव्यमान और खनिज कम होने लगते हैं। जब हडिडयों का घनत्व और मास कम होता है तो हड्डियां कमजोर और पतली होने लगती हैं। ये इतनी भंगुर यानी कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं कि छोटी सी चोट या झटके से भी टूटने लगती हैं। इस स्थिति में मरीज की रीढ़ की हड्डी, कलाई, घुटने या कूल्हे की हड्डियों पर ज्यादा बुरा असर पड़ता है।
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण क्या हैं?
ऑस्टियोपोरोसिस (meaning of osteoporosis in hindi) कई कारणों से हो सकता है। ज्यादातर मामलों में उम्र बढ़ने के साथ साथ हड्डियों की डेंसिटी कम होने पर हडिडयां कमजोर होती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis in hindi) के मुख्य कारण इस प्रकार हैं –
- बढ़ती उम्र – उम्र बढ़ने के साथ साथ शरीर की हड्डियों का घनत्व और दृव्यमान कम होने लगता है जिससे हडिड्यां कमजोर होने लगती हैं।
- रजोनिवृति के बाद – महिलाओं में रजोनिवृति के बाद शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है जिससे हडिडयां कमजोर होने लगती हैं। कुछ ऐसा ही पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के कम होने पर होता है।
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी – जो लोग फिजिकल एक्टिविटी कम करते हैं, उन्हें ये बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है।
- विटामिन डी की कमी – विटामिन डी की कमी से कैल्शियम का अवशोषण कम होने लगता है जिससे हडिडयों में कमजोरी आती है।
- डाइट में कैल्शियम की कमी – आहार में कैल्शियम युक्त आहार की कमी से भी हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
- स्मोकिंग या अल्कोहल के ज्यादा सेवन – ज्यादा धूम्रपान करने वाले और ज्यादा शराब पीने वालों की हड्डियां भी ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis in hindi) के चलते कमजोर होने लगती हैं।
- पारिवारिक इतिहास – ऐसे लोग जिनके परिवार में पहले से कमजोर हड्डियों का इतिहास रहा है, इसकी चपेट में जल्दी आते हैं।
- कुछ दवाओं का सेवन – लंबे समय तक कुछ खास दवाओ के सेवन से भी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
- कुछ बीमारियां – कुछ बीमारियां जैसे मेटाबॉलिक डिस्ऑर्डर, रूमेटी गठिया या कैंसर जैसी बीमारियां भी इस रोग का कारण बन सकती हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस किसकी कमी से होता है?
ऑस्टियोपोरोसिस (meaning of osteoporosis in hindi) मुख्य रूप से कैल्शियम की कमी से होता है। अगर डाइट में कैल्शियम की कमी हो रही है या फिर विटामिन डी की कमी है तो हड्डियों पर बुरा असर होता है। विटामिन डी की कमी से शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में दिक्कत आती है और हड्डियों कमजोर होती हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण क्या हैं?
ऑस्टियोपोरोसिस (meaning of osteoporosis in hindi) ऐसी बीमारी है जिसे साइलेंट डिजीज यानी मूक बीमारी के तौर पर जाना जाता है। इसके लक्षण शुरूआत में नहीं दिखते हैं। ये बीमारी बहुत धीरे धीरे डेवलप होती है। अक्सर मरीज की हड्डी टूटने पर ही इसके बारे में पता चल पाता है। ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण इस प्रकार हैं –
- पीठ में दर्द होना – मरीज की पीठ में अक्सर दर्द रहने लगता है। कई बार रीढ़ की हड्डी में एकाएक तेज दर्द उठता है और फिर लगातार बना रहता है।
- हड्डियों का टूटना – छोटी सी चोट लगने, भारी वजन उठाने या फिर झटने से उठने बैठने पर भी हड्डियां टूटने लगती हैं।
- पोस्चर में बदलाव – मरीज के पोस्चर यानी मुद्रा में बदलाव आने लगता है। मरीज की पीठ में कूबड़ निकल सकता है।
- सांस लेने में तकलीफ – हड्डियों के संकुचित और सिकुड़ने से फेफड़ों पर दबाव बनता है जिससे अक्सर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
ऑस्टियोपोरोसिस की जांच किस तरह होती है?
ऑस्टियोपोरोसिस (meaning of osteoporosis in hindi) की जांच के लिए डॉक्टर ब्लड और यूरिन टेस्ट के साथ साथ हडिडयों के एक्स रे का तरीका अपनाते हैं। इसकी जांच इस प्रकार होती है –
- बोन डेंसिटी टेस्ट – इस टेस्ट में हड्डियों में मौजूद घनत्व मापा जाता है। इसे DEXA (Dual-Energy X-ray Absorptiometry) भी कहा जाता है।
- क्वांटिटेटिव अल्ट्रसाउंड – ऑस्टियोपोरोसिस के शुरूआती लक्षणों को समझने के लिए अक्सर अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
- ब्लड और यूरिन टेस्ट – अगर कुछ खास परिस्थितियां हड्डियों का घनत्व कमजोर कर रही हैं तो उनका पता लगाने के लिए ब्लड और यूरिन टेस्ट की सलाह दी जाती है।
ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के तरीके क्या हैं?
ऑस्टियोपोरोसिस (meaning of osteoporosis in hindi) की रोकथाम संभव है। इस बीमारी को मैनेज करने के लिए स्वस्थ लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट और शराब और स्मोकिंग पर रोक लगाना महत्वपूर्ण हैं। अपनी डाइट में कैल्शियम युक्त आहार को शामिल करें। कैल्शियम के सही अवशोषण के लिए विटामिन डी लें। इसके लिए नियमित तौर पर कुछ देर धूप का एक्सपोजर मददगार साबित हो सकता है। नियमित तौर पर एक्सरसाइज करें। अपने वजन पर कंट्रोल बनाए रखें क्योंकि ज्यादा वजन हड्डियों पर अतिरिक्त जोर डालता है।
देखा जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी बीमारी है जो हड्डियों को कमजोर करके पूरे शरीर पर असर डालती है। लेकिन इसके सही मैनेजमेंट की मदद से इसे समय पर रोका जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति में ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी परामर्श लें। डॉक्टरी परामर्श के बाद संबंधित ऑस्टियोपोरोसिस टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
ऑस्टियोपोरोसिस किसकी कमी से होता है?
ऑस्टियोपोरोसिस आमतौर पर कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से होता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने पर शरीर में एस्ट्रोजम और टेस्टोस्टेरोन की कमी भी इसकी वजह बनती है।
ऑस्टियोपोरोसिस की जांच किस तरह की जाती है?
ऑस्टियोपोरोसिस की जांच के लिए डॉक्टर DEXA स्कैन की सलाह देते हैं। इस टेस्ट में हड्डियों के अंदर का घनत्व मापा जाता है।








