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सीटी स्कैन क्या है और यह कैसे काम करता है?

Medically Approved by Dr. Seema

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सीटी स्कैन क्या है

 

सीटी स्कैन (CT scan) एक ऐसा इमेजिंग टेस्ट है जिसके जरिए शरीर के अंदरूनी अंगों की डिटेल तस्वीरें बनती हैं। सामान्य एक्सरे की तुलना में ज्यादा विस्तृत और सटीक और 3D तस्वीरें देने के मामले में सीटी स्कैन (ct scan in hindi) बेस्ट तकनीक कही जाती है। सीटी स्कैन दर्दरहित और बिना चीरफाड़ के किया जाने वाला ऐसे टेस्ट है जिसके जरिए शरीर के अंदर की कई बीमारियों का समय रहते पता चल सकता है। सीटी स्कैन फुल फॉर्म में कंप्यूटेड टोमोग्राफी (computed tomography) कहा जाता है। कई छोटी और बड़ी बीमारियों का पता लगाने के साथ साथ सीटी स्कैन (ct scan in hindi) की मदद से मरीज के इलाज की प्रोग्रेस भी सटीक तरीके से जानी जा सकती है। इस लेख में जानते हैं कि सीटी स्कैन क्या होता है और सीटी स्कैन कैसे होता है। इसके साथ साथ जानेंगे सीटी स्कैन के प्रकार और सीटी स्कैन के नुकसान के बारे में सब कुछ।

 

सीटी स्कैन क्या होता है?

सीटी स्कैन (ct scan in hindi)एक बेहद उन्नत और सटीक डायग्नोस्टिक तकनीक है जिसमें कंप्यूटर के जरिए शरीर के अंदरूनी अंगों की डिटेल, क्रॉस सेक्शनल और 3D तस्वीरें ली जाती हैं। इस इमेजिंग टेस्ट की मदद से शरीर के अंदर की बीमारियों और चोटों को बारीकी और विस्तार से देखा जा सकता है। ये स्कैन मल्टीपल एक्सरे फोटोज और खास कंप्यूटर की मदद से शरीर के अंगों, टिश्यू, हड्डियों और यहां तक कि ब्लड वैसल्स की भी डिटेल इमेजेस मुहैया कराता है। इस टेस्ट के दौरान अलग अलग एंगल से शरीर के अंदरूनी अंगों की मल्टीपल एक्सरे फोटोज ली जाती हैं। इसके बाद एक कंप्यूटर पर इन सभी एक्सरे फोटोज को कंबाइन करके एक खास थ्री डी इमेज बनाई जाती है। इस थ्री इमेज की मदद से डॉक्टर शरीर के अंदर चोट और बीमारी का सही आकलन कर पाते हैं। सीटी स्कैन ये भी बताता है कि किसी खास इलाज से मरीज की स्थिति सुधर रही है या और खराब हो रही है। खासतौर पर कैंसर की स्टेज और इलाज की प्रगति जानने के लिए इस टेस्ट को काफी लाभदायक माना जाता है।

 

सीटी स्कैन के जरिए डॉक्टर कई तरह के कैंसर की पहचान कर सकते हैं। निमोनिया, पथरी, बाउल सिंड्रोम, टूटी हड्डी, दिल की बीमारी, ब्लड क्लॉटिंग, ब्रेन इंजुरी, स्पाइल कॉर्ड इंजुरी, अंदरूनी ब्लीडिंग का पता करने के लिए भी सीटी स्कैन किया जाता है।

 

सीटी स्कैन कैसे होता है?

सीटी स्कैन (ct scan in hindi) की प्रोसेस और समय इसके प्रकार और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। इसमें मरीज को एक टेबल पर लिटाया जाता है। इसके बाद ये टेबल और गोल से स्कैनर के भीतर भेजी जाती है। स्कैनर के चारों तरफ एक्सरे बीम घूमती है और डिफरेंट एंगल से एक्सरे निकालती है। इस प्रोसेस के दौरान मरीज को शांत और स्थिर रहने की सलाह दी जाती है। अगर स्कैन के दौरान कंट्रास्ट डाई का इस्तेमाल किया जा रहा है तो स्कैन से पहले डॉक्टर मरीज की बांह में आईवी के जरिए डाई इंजेक्ट करते हैं। कई बार मरीज को डाई पीने के लिए दी जाती है जो स्वाद में धातु जैसी होती है। सीटी स्कैन के कुछ घंटे पहले मरीज को कुछ न खाने पीने की सलाह दी जाती है, खासतौर पर पेट के सीटी स्कैन से पहले।

 

सीटी स्कैन कितने प्रकार का होता है?

सीटी स्कैन (ct scan in hindi) कई प्रकार का होता है। मरीज की बीमारी के आधार पर शरीर का आकलन करने के लिए कई तरह के सीटी स्कैन उपलब्ध हैं। सीटी स्कैन के प्रकार इस तरह हैं –

 

  1. नॉन कंट्रास्ट – नॉन कंट्रास्ट सबसे आम सीटी स्कैन है जिसमें डाई का प्रयोग नहीं किया जाता है। नॉन कंट्रास्ट सीटी स्कैन हडडियों और फेफड़ों की संरचना और उनके भीतर छिपी बीमारी का आकलन करता है।
  2. कंट्रास्ट – कंट्रास्ट सीटी स्कैन में शरीर के अंदर टिश्यू, ऑर्गन, या ब्लड वैसल्स को ज्यादा बारीकी से देखने के लिए डाई इंजेक्ट की जाती है। डाई आयोडीन से बनी होती है और नस के जरिए इंजेक्ट की जाती है। कई बार डॉक्टर ये डाई मरीज को पीने के लिए भी देते हैं।
  3. इलेक्ट्रॉन बीम – इस स्कैन का मकसद दिल की ब्लड वैसल्स में कैल्शियम की मात्रा की जांच करना है।
  4. सीटी एंजियोलॉजी – इस स्कैन के जरिए ब्लड वैसल्स की जांच की जाती है ताकि धमनियों में किसी तरह की रुकावट, ब्लॉकेज या चोट का पता चल सके।
  5. मल्टी स्लाइस – इस तरह के स्कैन में एक ही बार में कई तरह के स्कैन किए जा सकते हैं।
  6. वर्चुअल कोलोनोस्कोपी – इस स्कैन की मदद से बड़ी आंत के अंदर किसी प्रकार के कैंसर या पॉलीप्स का पता लगाया जा सकता है।

 

सीटी स्कैन के नुकसान क्या हैं?

हालांकि एक सटीक डायग्नोस्टिक टूल होने के कारण सीटी स्कैन काफी फायदेमंद है लेकिन सेहत को इससे कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। सीटी स्कैन के नुकसान इस प्रकार हैं –

 

  1. कैंसर का रिस्क – सीटी स्कैन करते समय एक विशेष प्रकार की कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है। कई बार ये डाई नस के जरिए शरीर में डाली जाती है और कई बार मरीज को पीने के लिए दी जाती है। ये डाई आयोनाइजिंग रेडिएशन करती है औऱ इसके लगातार एक्सपोजर से शरीर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का शिकार हो सकता है। हालांकि एक या दो बार सीटी स्कैन कराने से रेडिएशन का खतरा नहीं होता है लेकिन बार बार और लगातार सीटी स्कैन से कैंसर का रिस्क पैदा हो सकता है।
  2. एलर्जी – कंट्रास्ट डाई कई लोगों के शरीर में जाकर एलर्जी का कारण बन जाती है। इससे स्किन पर खुजली, पित्त, चकत्ते और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण उभर कर आ सकते हैं।
  3. किडनी की दिक्कत – लगातार कंट्रास्ट डाई के संपर्क में आने से किडनी की कई दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
  4. प्रेग्नेंसी संबंधित रिस्क – प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सीटी स्कैन न कराने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशू को नुकसान हो सकता है।

 

देखा जाए तो सीटी स्कैन शरीर की अंदरूनी बीमारियों और चोटों का आकलन करने के लिए बेहद सटीक डायग्नोस्टिक टूल है। अगर किसी मरीज में अंदरूनी चोट या बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी परामर्श लें। डॉक्टरी परामर्श के बाद डॉ. लाल पैथलैब्स में सीटी स्कैन बुक कराएं। टेस्ट बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

सीटी स्कैन फुल फॉर्म क्या है?
सीटी स्कैन फुल फॉर्म कंप्यूटेड टोमोग्राफी (computed tomography) है। इसे आम भाषा में सीटी स्कैन ही कहा जाता है।

सीटी स्कैन के नुकसान क्या हैं?
सीटी स्कैन में शरीर मे डाली जाने वाली कंट्रास्ट डाई लगातार एक्सपोजर के चलते शरीर के लिए नुकसानदेय होती है। इसके लगातार एक्सपोजर से कैंसर, एलर्जी, किडनी संबंधित बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है।

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