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इंप्लांटेशन ब्लीडिंग के लक्षण: कैसे पहचानें यह प्रेग्नेंसी का संकेत है या नहीं

Medically Approved by Dr. Seema

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इंप्लांटेशन ब्लीडिंग

 

मां बनना लगभग हर महिला के जीवन का महत्वपूर्ण पल होता है। प्रेग्नेसी का पीरियड शुरू होने पर महिलाओं की योनि से इंप्लांटेशन ब्लीडिंग होती है। कई महिलाएं इंप्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding) होने पर घबरा जाती हैं कि कहीं प्रेग्नेंसी फेल तो नहीं हो गई है, या फिर ये पीरियड्स का इशारा तो नहीं है। लेकिन दरअसल देखा जाए तो इंप्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding in hindi) प्रेग्नेंसी को कंफर्म करने वाला हल्का रक्तस्राव है। आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी (pregnancy test) के शुरूआती दिनों में हल्की ब्लीडिंग होना आम बात है। इंप्लांटेशन ब्लीडिंग सामान्य तौर पर गर्भावस्था का पहला संकेत माना जाता है। जब भ्रूण गर्भाशय में प्रवेश करके उसकी परत से जुड़ता है तो महिलाओं की योनि से बेहद हल्का से रक्तस्राव होता है जिसे इंप्लांटेशन ब्लीडिंग कहा जाता है। इस लेख में जानते हैं कि इंप्लांटेशन ब्लीडिंग क्या है और इंप्लांटेशन ब्लीडिंग के लक्षण क्या होते हैं। साथ ही जानेंगे कि इंप्लांटेशन ब्लीडिंग के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट (pregnancy test) करवाना चाहिए।

 

क्या है इंप्लांटेशन ब्लीडिंग?

जब कोई महिला गर्भधारण करती है तो कुछ दिनों के अंतराल पर उसकी योनि से हल्का गुलाबी या गहरा भूरा रक्तस्राव होता है। ये रक्तस्राव सामान्य मासिक चक्र की ब्लीडिंग से अलग होता है। कभी कभी ये रंग में गहरा और जंग की तरह दिखता है। इस तरह की ब्लीडिंग (implantation bleeding in hindi) काफी कम होती है और कुछ धब्बे आमतौर पर नजर आते हैं। इंप्लांटेशन ब्लीडिंग गर्भधारण करने के 10 से 14 दिन (implantation bleeding kab hoti hai) के भीतर होता है। इसकी अवधि कुल एक से दो दिन तक होती है। इंप्लांटेशन ब्लीडिंग गर्भावस्था का एक सामान्य चरण है जो संकेत देता है कि अंडा निषेचित होने के बाद गर्भाशय की परत से चिपक चुका है। जब भ्रूण गर्भाशय की परत में प्रवेश करता है तो इस दौरान कुछ रक्त कोशिकाएं टूटती हैं जिनकी वजह से इंप्लांटेशन ब्लीडिंग होती है। हालांकि ज्यादातर मामलों में इंप्लांटेशन ब्लीडिंग चिंता की बात नहीं मानी जाती है। ये इस बात का इशारा करती है कि भ्रूण का विकसित होना शुरू हो चुका है।

 

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग के लक्षण किस तरह दिखते हैं?

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग में महिला की योनि से हल्का गुलाबी रंग का या गहरे भूरे रंग के ब्लड स्पॉट्स दिखते हैं। ये ब्लीडिंग स्पॉट्स यानी धब्बों के रूप में होती है जो कुछ घंटों से लेकर दो दिन (implantation bleeding kab hoti hai) तक रहती है। इस दौरान महिला के शरीर में कुछ लक्षण दिखते हैं जो इस प्रकार हैं –

  1. हल्की ब्लीडिंग (implantation bleeding in hindi)
  2. ब्लीडिंग का रंग हल्का गुलाबी या गहरा भूरा
  3. पेट में ऐंठन – महिला के पेट में हल्की ऐंठन होती है। ठीक पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन की तरह, हालांकि इसमें कम दर्द होता है।
  4. मतली – महिला को मतली का अहसास होता है
  5. मूड स्विंग – इस वजह से होने वाली मां के मूड में बदलाव आने लगते हैं।
  6. सिर में दर्द – महिला के सिर में दर्द होता है।
  7. पीठ में दर्द – पीठ और कमर में दर्द और ऐंठन होती है।
  8. स्तनों में कोमलता – स्तनों में कोमलता होने लगती है और सूजन आ जाती है।
  9. पेट फूलना – महिला का पेट फूलने लगता है, अफारा के लक्षण दिखते हैं।
  10. बार बार यूरिन जाना – इस दौरान ज्यादा यूरिनेशन होता है।
  11. थकान – महिला को थकान का अनुभव होता है।
  12. कब्ज – कब्ज का अहसास होता है।
  13. खाने को देखकर क्रेविंग या घृणा का अहसास बढ़ जाता है। implantation bleeding in hindi कोई चीज खाने का मन करता है और किसी भोजन को देखकर उबकाई आती है।

 

इंप्लांटेशन फेल होने के लक्षण क्या हैं?

कई बार इंप्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding) बहुत ज्यादा होने लगती है। अगर इस दौरान सामान्य से अधिक ब्लीडिंग होती दिखे या फिर ब्लड स्पॉट्स ज्यादा दिखें तो ये इंप्लांटेशन फेल होने के लक्षण में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है। यदि महिला के पेट में ज्यादा दर्द हो रहा है, ब्लीडिंग दो से ज्यादा दिन तक हो रही है, ब्लीडिंग का रंग लाल, चमकीला और गहरा है तो इंप्लांटेशन यानी भ्रूण के प्रत्यारोपण के फेल होने के लक्षण हो सकते हैं। इसे प्रेग्नेंसी फेल होना भी कह सकते हैं।

 

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाना चाहिए?

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग आमतौर पर ओवुलेशन के 10 से 14 दिनों के भीतर (implantation bleeding kab hoti hai)होती है। इस दौरान महिला के शरीर में एचसीजी हार्मोन (hcg test) के स्तर की जांच करके प्रेग्नेंसी (pregnancy test) को कंफर्म किया जा सकता है। अगर इंप्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding) के तुरंत बाद टेस्ट करवाया जाए तो कई बार रिजल्ट गलत भी आ सकता है। इसलिए एचसीजी टेस्ट (hcg test) करने के लिए इंप्लांटेशन ब्लीडिंग के बाद एक हफ्ते तक इंतजार करना चाहिए।

सामान्य तौर पर इंप्लांटेशन ब्लीडिंग प्रेग्नेंसी का शुरूआती चरण कहा जाता है। इंप्लांटेशन ब्लीडिंग ऐसा संकेत है कि प्रेग्नेंसी शुरू हो चुकी है और भ्रूण ने विकसित होना शुरू कर दिया है। ऐसे में प्रेग्नेंसी को कंफर्म करने के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाना चाहिए। प्रेग्नेंसी टेस्ट (pregnancy test) करवाने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

 

FAQ

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग कितनी होती है?
प्रेग्नेंसी के शुरूआती दिनों में योनि से होने वाली हल्की ब्लीडिंग को इंप्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding) कहा जाता है। ये ब्लीडिंग काफी हल्की औऱ कम होती है। कुछ घंटों से लेकर दो दिनों तक होने वाली इस ब्लीडिंग में हल्के भूरे या हल्के गुलाबी रंग के ब्लड स्पॉट्स दिखते हैं। शुरूआती पहले हफ्ते में कुछ महिलाओं को बेहद हल्की ब्लीडिंग होती है जो बेहद सामान्य कही जाती है।

 

इंप्लांटेशन ब्लीडिंग के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाना सही रहता है?
इंप्लांटेशन ब्लीडिंग (implantation bleeding) के तीन से चार दिन के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट (pregnancy test) करवाना चाहिए। अगर इससे पहले टेस्ट कराएं तो कई बार रिजल्ट गलत आता है औऱ डॉक्टर फिर से प्रेग्नेंसी टेस्ट (pregnancy test) करवाने की सलाह देते हैं।

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