क्या है पेरिमेनोपॉज, जानिए इसके लक्षण और स्टेज
- 9 Apr, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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अमूनम हर महिला के जीवन में मासिक चक्र यानी मेंस्ट्रुअल पीरियड का एक खास दौर होता है। मेंस्ट्रुल पीरियड्स (menstrual cycles) खत्म होने के दौर में हर महिला के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं। इसी में से एक है पेरिमेनोपॉज (Perimenopause)। पेरिमेनोपॉज दरअसल मेनोपॉज का वो शुरुआती दौर (around menopause) है जब महिला के मेंस्ट्रुल पीरियड कम होने लगते हैं और उसकी गर्भधारण की क्षमता खत्म होने लगती है। पेरिमेनोपॉज को बदलाव का वो दौर कह सकते हैं जिसमें महिलाओं के शरीर में प्रजनन के लिए जरूरी कहे जाने वाले एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर धीरे धीरे कम होने लगता है। ये दौर कई सालों तक चलता है जब तक पूरी तरह से मेनोपॉज नहीं आ जाता और मेंस्ट्रुअल पीरियड्स आने बंद नहीं हो जाते हैं। इस दौर में ओवरी यानी गर्भाशय़ में एस्ट्रोजन (estragon) हार्मोन का उत्पादन कम होने लगता है जिसके कई तरह के रिजस्ट शरीर पर दिखते हैं। आमतौर पर पेरिमेनोपॉज 45 साल के आस पास का वक्त कहलाता है लेकिन कई महिलाओं में ये 40 साल या उससे पहले भी शुरू हो सकता है। पेरिमेनोपॉज के दौर में अनियमित पीरियड्स के साथ साथ महिलाओं का शरीर कई तरह के फिजिकल और इमोशनल बदलाव झेलता है। चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि पेरिमेनोपॉज क्या है, इसके लक्षण क्या हैं औऱ साथ ही साथ इसके स्टेज कितने तरह के होते हैं ताकि इस दौरान महिलाओं की सेहत को सही तौर पर मेनेज करने में मदद मिल सके।
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पेरिमेनोपॉज के कितने चरण होते हैं? (What are the Stages of Perimenopause?)
पेरिमेनोपॉज का लंबा दौर आमतौर पर दो चरणों में आता है। प्रारंभिक पेरिमेनोपॉज यानी (early perimenopause ) अर्ली पेरिमेनोपॉज और देर से आने वाला पेरिमेनोपॉज यानी (late perimenopause ) लेट पेरिमेनोपॉज। देखा जाए तो दोनों ही चरणों में महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोरेन नामक हार्मोन में उतार चढ़ाव देखने को मिलते हैं।
प्रारंभिक पेरिमेनोपॉज (early perimenopause ) अर्ली पेरिमेनोपॉज में पीरियड्स यानी मासिक धर्म अनयमित होने लगते हैं। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर में भी बदलाव होने लगता है।
लेट पेरिमेनोपॉज (late perimenopause ) लेट पेरिमेनोपॉज वो दौर है जब 12 महीने तक या इससे ज्यादा समय तक पीरियड्स नहीं आते हैं। ये लेट पेरिमेनोपॉज का संकेत है जो बताता है कि अब शरीर में मेनोपॉज का दौर आ गया है। लेट पेरिमेनोपॉज के दौरान शरीर में पेरिमेनोपॉज के लक्षण ज्यादा दिखते हैं।
पेरिमेनोपॉज के लक्षण क्या हैं? (What are the Symptoms of Perimenopause?)
पेरिमेनोपॉज के लक्षण इसके दोनों चरणों की अवधि और शरीर पर निर्भर करते हैं।
प्रारंभिक पेरिमेनोपॉज – इस स्टेज में शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। हालांकि इस दौरान मेंस्ट्रुअल पीरियड्स समय पर होते हैं लेकिन शरीर में कुछ बदलाव दिखने लगते हैं। इस दौरन दिखने वाले लक्षण इस प्रकार हैं –
- हमेंस्ट्रुअल पीडियड्स में अनियमितता – पीरियड्स का समय बदल सकता है। इनकी अवधि लंबी या छोटी हो सकती है।
- हॉट फ्लेशेज – इस दौरान रात में अचानक नींद खुलती है और पसीना आने लगता है। अचानक गर्मी महसूस होती है, शरीर पर लालिमा आती है और शरीर पसीने से तरबतर हो जाता है। ये अक्सर रात के समय होता है।
- लेट पेरिमेनोपॉज– जैसे जैसे शरीर में मेनोपॉज का समय आता है, एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। ऐसे में पेरिमेनोपॉज के लक्षण ज्यादा दिखने लगते हैं।
इसके लक्षण इस प्रकार हैं –
- अनियमित पीरियड्स और स्किप्ड पीरियडस् – पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं औऱ इनके बीच 60 दिनों का अंतर आने लगता है। यानी एक माह की बजाय पीरियड्स दो माह के अंतराल पर आने लगते हैं।
- वेजाइना में सूखापन – इस दौरान संभोग के दौरान वेजाइना में सूखापन महसूस होता है और बैचेनी महसूस होती है।
इनके अलावा कुछ अन्य लक्षण हैं जो सामान्य तौर पर दिखाई देते हैं। ये लक्षण इस प्रकार है।
- वेजाइना में सूखापन आना
- पीरियडस् की अवधि में अंतर आना
- पीरियड्स कभी ज्यादा तो कभी कम आना
- बार बार पेशाब निकलने की आशंका होना
- यूरिन इंफेक्शन
- हॉट फ्लेश की परेशानी
- रात को नींद न आने की परेशानी
- संभोग में दिलचस्पी कम होना
- चिड़चिड़ापन
- उदासी
- शरीर में बार बार ऐंठन महसूस होना
- डिप्रेशन यानी तनाव में रहना
- शरीर का एकाएक वजन बढ़ना
- मूड स्विंग की परेशानी
- कंधों में और पीठ में लगातार दर्द रहना
- बालों का ज्यादा गिरना
- त्वचा पर रूखापन और इसकी लोच में कमी आना
- त्वचा पर खुजली और रेशेज होना
- हड्डियों का कमजोर होना
- इमोशनल स्ट्रेस बढ़ना
पेरिमेनोपॉज से जुड़े रिस्क क्या हैं ? (What are the Risks Associated with Perimenopause?)
पेरिमेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से हड्डियों में कमजोरी आने लगती है। इससे हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है जिससे ओस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है और हड्डियों के फ्रैक्चर का रिस्क भी बढ़ जाता है। इस दौरान प्रजनन क्षमता कम होने लगती है जिससे इस दौर में कंसीव करने की उम्मीद कम हो जाती है।
पेरिमेनोपॉज के लक्षणों को समय रहते पहचान कर इसके लक्षणों को सही से मैनेज किया जा सकता है। हालांकि पेरिमेनोपॉज के लिए कोई निश्चित इलाज नहीं है लेकिन इसके लक्षणों को सटीक उपचार के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। शरीर में हार्मोन के गिरते स्तर की जांच के लिए हेल्थ प्रोफेशनल ब्लड टेस्ट की सलाह देते हैं। सटीक और विश्वसनीय ब्लड टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स में टेस्ट बुक कर सकते हैं। ध्यान रहे कि इससे पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
FAQ
पेरिमेनोपॉज कितने समय तक चलता है? (How long does perimenopause last?)
पेरिमेनोपॉज आमतौर पर चार से आठ साल तक रहता है। लेकिन कई बार यह अलग अलग महिलाओं में शरीर की अवस्था, हार्मोन के स्तर के चलते अलग अलग हो सकता है।
क्या पेरिमेनोपॉज के दौरान गर्भधारण किया जा सकता है? (Can you get pregnant during perimenopause?)
हालांकि पेरिमेनोपॉज के दौरान गर्भधारण क्षमता कम हो सकती है लेकिन फिर भी महिला का इस दौरान गर्भवती होना संभव है।
पेरिमेनोपॉज की जांच कैसे की जाती है? (How is perimenopause diagnosed?)
हपेरिमेनोपॉज की जांच आमतौर पर इसकी स्टेज और इसके लक्षणों की पहचान के आधार पर की जाती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को मापने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। इसमें फॉलिकेट स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) और एस्ट्रोजन का स्तर मापने में मदद मिलती है।








