एनीमिया – कारण लक्षण और उपचार
Medically Approved by Dr. Shuchi
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एनीमिया (Anaemia) को आम भाषा में शरीर में खून की कमी कहा जाता है। ये एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। लाल रक्त कोशिकाएं शरीर में ऑक्सीजन को दूसरे सभी अंगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम करती हैं। जब शरीर में हीमोग्लोबिन या लाल रक्त कोशिकाएं कम हो जाती हैं तो शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई पर बुरा असर पडता है। देखा जाए तो एनीमिया क्या है – एनीमिया ऐसी स्थिति है जिसके पीछे शरीर में आयरन की कमी, ज्यादा ब्लीडिंग या दूसरी कई मेडिकल स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। भारत जैसे देश में एनीमिया बहुत लोगों को प्रभावित करता है। देश भर में किए गए पांचवें नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में कहा गया है कि पांच से कम उम्र की आयु के 67% बच्चे एनीमिया का शिकार हैं। इसके अलावा 15 से 49 साल के बीच की 57 फीसदी महिलाएं देश में एनीमिया का शिकार हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो एनीमिया देश में एक साइलेंट महामारी का रूप ले चुका है। एनीमिया क्यों होता है? एनीमिया होने पर शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है जिससे व्यक्ति थकावट महसूस करता है और कमजोरी के साथ साथ उसे सांस लेने में भी परेशानी होती है। हालांकि प्रारंभिक एनीमिया का उपचार संभव है, अगर सही समय पर जांच के बाद उपयुक्त इलाज किया जाए तो एनीमिया को रोका जा सकता है। चलिए इस लेख में जानते हैं कि एनीमिया क्या है और इसके सामान्य लक्षण यानी कि एनीमिया के लक्षण क्या हैं। साथ ही जानेंगे कि एनीमिया की जांच किस तरह होती है।
एनीमिया क्या है?
एनीमिया क्या है? एनीमिया तब होता है जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम होने लगता है। हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं का मुख्य काम ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाना है। ऐसे में जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होता है तो शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ता है। ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई के अभाव में शरीर के अंग औऱ टिश्यू सही से काम नहीं कर पाते हैं और शरीर कमजोर होने लगता है। एनीमिया किसी भी व्यक्ति के शरीर में धीरे धीरे डेवलप होता है। अक्सर शुरुआत में इस बीमारी का पता नहीं चल पाता है। अगर सही समय पर एनीमिया का इलाज न हो तो मरीज के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोध प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है और इम्यून सिस्टम गलत तरीके से रिएक्ट करने करता है। इसके अलावा मरीज थकान, कमजोरी भी महसूस करता है और रोजमर्रा के कामकाज करने में उसे दिक्कत होने लगती है। इन स्थितियों से बचाव के लिए जरूरी है कि एनीमिया के लक्षणों को जल्द पहचान कर इसकी सटीक जांच करवाई जाए।
एनीमिया के लक्षण क्या हैं?
एनीमिया के लक्षण आमतौर पर इसकी गंभीरता और इसके कारणों के प्रकार पर निर्भर करते हैं। हर मरीज में एनीमिया के लक्षण अलग अलग दिख सकते हैं। एनीमिया के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –
- सांस फूलना – खून में ऑक्सीजन की कमी के चलते सांस फूलने लगती है।
- सांस लेने में कठिनाई होना – मरीज को सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है।
- चक्कर आना – मरीज को चक्कर आने लगते हैं।
- लगातार थकावट महसूस करना – मरीज ज्यादा काम न करने के बावजूद थकावट महसूस करता है।
- कमजोरी महसूस करना – मरीज लगातार कमजोरी महसूस करता है।
- त्वचा का पीलापन – हीमोग्लोबिन की कमी से त्वचा पीली पड़ जाती है।
- हाथ और पैर ठंडे पड़ जाना – मरीज के हाथ और पैर ठंडे पड़ जाते हैं।
- दिल की धड़कन अनियमित या तेज हो जाना – मरीज के दिल की धड़कन कभी तेज होती है और कभी अनियमित हो जाती है।
- सिर में लगातार दर्द बने रहना – मरीज के सिर में दर्द रहने लगता है।
- एकाग्रता में कमी आना- मरीज किसी काम पर फोकस नहीं कर पाता है।
- अंगों में ऐंठन महसूस होना – कई अंगों में ऐंठन और दर्द होने लगता है।
- बाल झड़ना – शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से बाल गिरने लगते हैं।
- नाखून गिरना – मरीज के नाखून कमजोर होकर जल्दी टूटने लगते हैं।
- एनीमिया के गंभीर कारणों में मरीज को चक्कर के साथ बेहोशी भी आ सकती है।
एनीमिया के कारण क्या हैं?
एनीमिया क्यों होता है, इस सवाल का जवाब आयरन की कमी से जुड़ी है. एनीमिया का मुख्य कारण आमतौर पर शरीर में खून की कमी कहा जाता है। इसके कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं –
- आयरन की कमी – पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग, पेट के अल्सर या फिर कम आयरन वाले खाद्य पदार्थों के सेवन के चलते शरीर में आयरन की कमी हो जाती है जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने लगता है।
- विटामिन की कमी – विटामिन बी 12 और फोलेट की कमी के चलते शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में कमी आती है जिससे एनीमिया होता है।
- लंबी और पुरानी बीमारियां – किडनी की बीमारी, कैंसर और सूजन संबंधी पुरानी बीमारियां लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को प्रभावित करती हैं, इससे एनीमिया होने का रिस्क बढ़ जाता है।
- वंशानुगत डिस्ऑर्डर – थैलेसीमिया, सिकल सेल जैसी बीमारियां लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन पर असर डालती हैं।
- बोन मैरो या ऑटो इम्यून डिस्ऑर्डर – कुछ मामलों में बोन मैरो या ऑटो इम्यून बीमारियां भी पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाओं को नहीं बनने देती हैं।
एनीमिया की जांच कैसे होती है?
एनीमिया का पता लगाने के लिए कई तरह के ब्लड टेस्ट (anaemia test) किए जाते हैं। ये इस प्रकार है –
- कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) – इस ब्लड टेस्ट के जरिए शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं औऱ प्लेटलेट्स की संख्या की जांच की जाती है।
- हीमोग्लोबिन और हेमटोक्रिट लेवल (haemoglobin and haematocrit level) – इस टेस्ट के जरिए लाल रक्त कोशिकाओं से बने खून का प्रतिशत मापा जाता है।
- इसके अलावा पेरिफेरल ब्लड स्मीयर और फेरिटिन टेस्ट के जरिए भी एनीमिया की जांच की जाती है।
देखा जाए तो एनीमिया बहुत ही आम समस्या (एनीमिया क्या है) है। अगर इसका सही समय पर इलाज न हो तो ये रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करती है। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचान कर इसका सटीक इलाज काफी महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी व्यक्ति में एनीमिया के लक्षण दिख रहे हैं तो सीबीसी टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स में शैड्यूल बुक करना चाहिए। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
- एनीमिया का सबसे आम कारण क्या है?
आयरन की कमी एनीमिया का सबसे आम कारण है। - क्या एनीमिया का पता नहीं लगाया जा सकता है?
एनीमिया शरीर में धीरे धीरे डेवलप होता है, इसलिए इसके शुरूआती लक्षण पता नहीं चल पाते। थकान, सांस फूलना,पीली त्वचा इसके शुरूआती लक्षण हैं।








