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ESR बढ़ने के लक्षण; इसकी सीमाएं और उपचार

Medically Approved by Dr. Seema

Table of Contents

 

ईएसआर (ESR) का मतलब है एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट (Erythrocyte Sedimentation Rate)। ये एक प्रकार का ब्लड टेस्ट (ESR test) है जिसे आम भाषा में सेड रेट टेस्ट भी कहा जाता है। ईएसआर एक ब्लड टेस्ट है जिसके जरिए शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) की जांच करके शरीर की सूजन या संक्रमण की स्थिति का आकलन किया जाता है। ये टेस्ट मापता है कि लाल रक्त कोशिकाएं कितनी तेजी से सैटल होती हैं। आमतौर पर लाल रक्त कोशिकाओ की सेटिंग काफी धीमी गति से होती है। अगर अगर ईएसआर (ESR test)में लाल रक्त कोशिकाओं का सेटलिंग का रेट हाई है तो इसका मतलब है कि शरीर में कोई परेशानी पनप रही है। हाई ईएसआर रेट आमतौर पर शरीर में सूजन, संक्रमण या अन्य किसी मेडिकल कंडीशन की तरफ इशारा करता है। इस लेख में जानते हैं कि ईएसआर के लक्षण क्या हैं और एक टेस्ट के रूप में इसकी सीमाएं क्या हैं। साथ ही जानेंगे ईएसआर की मदद से किस तरह संभावित परेशानियों का उपचार किया जा सकता है।

ईएसआर टेस्ट क्या होता है?

ईएसआर एक ब्लड टेस्ट (ESR test) है जिसे सेड रेट टेस्ट कहा जाता है। इस टेस्ट में लाल रक्त कोशिकाओं की सैटलिंग की जांच की जाती है। इस टेस्ट (ESR test) के तहत ये देखा जाता है कि लाल रक्त कोशिकाएं टेस्ट ट्यूब के तल पर यानी सरफेस पर कितनी तेजी से गिरकर सैटल होती हैं। अगर लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य स्तर से ज्यादा तेज गति से टेस्ट ट्यूब के सरफेस पर गिरती हैं तो इससे शरीर में किसी जगह पर सूजन होने के संकेत मिलते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक विशेष लाल प्रोटीन जो लाल रक्त कोशिकाओं को आपस में एक साथ चिपकाते हैं, उनमें असंतुलन होने लगता है. ऐसे में जब शरीर सूजन या किसी बीमारी से लड़ता है तो लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से जम कर जल्दी सैटल होने लगती हैं। आपको बता दें ईएसआर का बढ़ा हुए रेट (ESR test) हालांकि किसी खास बीमारी (ईएसआर बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है) का इशारा नहीं करता है लेकिन ये संकेत (ईएसआर बढ़ने से क्या होता है )जरूर देता है कि शरीर में कहीं कुछ गड़बड़ है, जैसे सूजन या कोई इंफेक्शन। इस टेस्ट (ESR test) के बाद डॉक्टर शरीर के दूसरे संकेतों पर ध्यान देते हैं औऱ कुछ अन्य टेस्ट का परामर्श देते हैं।

ईएसआर बढ़ने के लक्षण किस तरह दिखते हैं?

बढ़ा हुआ ईएसआर (ईएसआर बढ़ने के लक्षण)शरीर में कुछ खास स्थितियों की ओर इशारा करता है। इसके बढ़ने पर शरीर में कुछ इस तरह के (ईएसआर बढ़ने के लक्षण)लक्षण दिखते हैं –

 

  1. बुखार (Fever)– व्यक्ति को बार बार बुखार होने लगता है।
  2. थकान महसूस होना (fatigue) -व्यक्ति को बिना काम किए भी थकावट महसूस होने लगती है।
  3. शरीर के अंगों में दर्द होना (Body aches) शरीर के कुछ अंगों में बिना किसी कारण दर्द हो सकता है।
  4. जोड़ों में दर्द होना (unexplained joint pain) – शरीर के कुछ जोड़ों में दर्द महसूस हो सकता है।
  5. अचानक वजन में गिरावट आना (Sudden weight loss without trying) – बिना कोई प्रयास किए व्यक्ति का वजन एकाएक कम होने लगता है।
  6. शरीर के कुछ अंगों पर लालिमा छाना (redness in parts of the body) – शरीर के कुछ हिस्सों में लालिमा दिखने लगती है।
  7. शरीर के कुछ अंगों पर सूजन दिखना (Swelling in some parts of the body) – शरीर के कुछ अंगों पर सूजन भी दिख सकती है।
  8. बार बार सिर में दर्द होना (Recurring headaches) – व्यक्ति के बार बार सिर में दर्द होता है और सिर में भारीपन महसूस होता है।
  9. सांस लेने में तकलीफ होना (breathing issues) – व्यक्ति की सांस फूलती है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। वो सांस लेने के दौरान हांफने लगता है.

ईएसआर की सीमाएं क्या हैं?

हालांकि शरीर की संभावित कंडीशन बताने के लिए ईएसआर टेस्ट (ESR test)काफी उपयोगी साबित होता है, लेकिन फिर भी ये एक गैर विशिष्ट यानी नॉन स्पेसेफिक टेस्ट है। ये टेस्ट बताता है कि शरीर में कहीं कुछ समस्या है, लेकिन ये नहीं बता पाता है कि समस्या क्या है औऱ कहां पर स्थित है। ईएसआर टेस्ट (ESR test) की कुछ सीमाएं हैं –

 

  1. जिन लोगों की उम्र ज्यादा होती है, उनके शरीर का ईएसआर अक्सर बढ़ा हुआ आता है।
  2. प्रेगनेंसी में आमतौर पर ईएसआर बढ़ा हुआ आता है।
  3. ईएसआर टेस्ट एनीमिया के प्रभाव से बढ़ा हुआ आता है।
  4. कुछ खास दवाओं के सेवन से भी ईएसआर बढ़ा हुआ आ सकता है।
  5. ईएसआर बीमारी की गंभीरता का संकेत नहीं दे पाता है।
  6. सामान्य ईएसआर का मतलब हमेशा ये नहीं होता है कि टेस्ट करवाने वाला व्यक्ति स्वस्थ है।

हाई ईएसआर की जांच कैसे की जाती है?

अक्सर हेल्थ प्रोफेशनल शरीर में पल रही किसी बीमारी का पता लगाने के लिए ईएसआर टेस्ट (ESR test )के अलावा कुछ दूसरे टेस्ट भी करवाने की सलाह देते हैं। हाई ईएसआर रेट (esr normal range in hindi) के लेवल का पता लगवाने के लिए ये टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है-

 

  1. सी रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट (C-Reactive Protein-CRP)– इस टेस्ट के जरिए शरीर में गंभीर औऱ पुरानी सूजन का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट से पुरानी सूजन और संक्रमण की गंभीरता का भी पता लगाने में आसानी होती है।
  2. सीबीसी (Complete Blood Count) – सीबीसी टेस्ट यानी पूर्ण रक्त गणना शरीर में सभी ब्लड कंपाउंड्स की जांच करता है। इस टेस्ट के जरिए खून में इंफेक्शन, एनीमिया और दूसरी ब्लड रिलेटेड दिक्कतों का पता लगाया जाता है।
  3. इमेजिंग टेस्ट (Imaging Tests) – इमेजिंग टेस्ट के तहत सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे टेस्ट आते हैं। ये टेस्ट शरीर में सूजन के छिपे हुए कारणों की जांच करते हैं, जैसे ट्यूमर या ऑर्गन रिलेटेड दिक्कतें जिन्हें केवल ब्लड टेस्ट के जरिए पहचानना संभव नहीं हो पाता है।

 

देखा जाए तो ईएसआर टेस्ट (ESR test) शरीर में सूजन या संक्रमण की पहचान करने में एक सहायक टेस्ट है। लेकिन सूजन के कारणों की पहचान करने के लिए दूसरे कुछ टेस्ट करवाने की जरूरत पड़ती है। ईएसआर (ESR test), सीआरपी, और सीबीसी टेस्ट करवाने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

FAQ

क्या हाई ईएसआर हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत देता है?
Is a high ESR always a sign of serious illness?

हालांकि हाई ईएसआर (ESR test)शरीर में सूजन और संक्रमण का संकेत देता है लेकिन कई बार उम्र बढ़ने, प्रेगनेंसी और पीरियड्स के दौरान ये नैचुरल तौर पर बढ़ा हुआ आता है।

क्या ईएसआर (ESR test)का लेवल अपने आप सामान्य हो सकता है?
Can ESR levels return to normal on their own?

जब शरीर में सूजन और संक्रमण पैदा करने वाले लक्षण और कारण खत्म हो जाते हैं तो ईएसआर का लेवल अपने आप सामान्य हो सकता है।

क्या डाइट और लाइफस्टाइल ईएसआर के लेवल पर असर डालती है?
Can diet or lifestyle affect ESR levels?

पुराना स्ट्रेस यानी तनाव, असंतुलित डाइट या फिर शरीर की सूजन ईएसआर के लेवल को प्रभावित कर सकती है।

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