बुखार का सही कारण पता करने के लिए कौन सा टेस्ट करवाना चाहिए
- 24 Jun, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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बुखार (Fever) एक आम शारीरिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति के शरीर का टैंपरेचर यानी तापमान बढ़ जाता है। अंदरूनी बुखार क्यों होता है और अंदरूनी बुखार के लक्षण क्या हैं? ये सवाल अधिकतर लोगों को परेशान करते हैं | कुछ लोग बुखार को बीमारी मानते हैं तो कुछ लोग इसे शरीर में बीमारी का संकेत कहते हैं। लेकिन देखा जाए तो बुखार बहुत ही आम समस्या है जिससे हर व्यक्ति कभी न कभी जूझता है। बुखार दरअसल शरीर में किसी बैक्टीरिया या संक्रमण का संकेत है, जिसे पता करने के लिए डॉक्टरी परामर्श की सलाह दी जाती है। अंदरूनी बुखार क्यों होता है ? बुखार तब आता है जब शरीर का इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधक प्रणाली किसी संक्रमण या बीमारी के प्रति रिएक्ट करती है। ऐसे में शरीर का तापमान बढ़ जाता है जिसे बुखार कहा जाता है। हल्के बुखार को घर पर ही ठीक किया जा सकता है लेकिन ज्यादा तेज बुखार गंभीर रूप धारण कर सकता है। तेज बुखार के लिए डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है ताकि शरीर के अंदर किसी समस्या की तुरंत पहचान की जा सके। बुखार के कई कारण हो सकते हैं और अलग अलग कारणों की जांच के लिए बुखार के अलग अलग टेस्ट (fever profile test) किए जाते हैं। इस लेख में जानते हैं कि बुखार क्या है, ये कितने प्रकार का होता है। साथ ही जानेंगे इसके कारण, लक्षण और इसके लिए किए जाने वाले मेडिकल टेस्ट (fever profile test)के बारे में सब कुछ।
बुखार क्या है ?
बुखार एक ऐसी स्थिति है जब शरीर का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है। जब शरीर में किसी बैक्टीरिया या परजीवी का हमला होता है तो शरीर का इम्यून सिस्टम उससे लड़ता है और इससे पैदा होने वाला रिएक्शन बुखार कहलाता है। एक व्यक्ति का सामान्य तापमान 98.6°F (37°C) के आस पास होती है। अगर तापमान इससे ज्यादा या 100.4°F (38°C) हो जाए तो ये स्थिति बुखार कहलाती है। बुखार आने पर तापमान ज्यादा होने के साथ साथ व्यक्ति को ठंड लगती है और शरीर दर्द करता है। अगर बुखार हल्का है तो कुछ दिनों में ठीक हो सकता है लेकिन अगर बुखार ज्यादा तेज है और लंबे समय तक रहे तो इसके लिए डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
बुखार कितने प्रकार का होता है?
अंदरूनी बुखार के लक्षण क्या हैं और बुखार कितने प्रकार का होता है? आइये जानें | कारण, लक्षण और अवधि के आधार पर बुखार के कई प्रकार हो सकते हैं। बुखार इतने प्रकार का होता है –
- तेज बुखार (Acute Fever) – तेज बुखार अक्सर एक हफ्ते से कम समय तक रहता है। इसका कारण अक्सर वायरल संक्रमण या बैक्टीरिया का हमला हो सकता है।
- मध्यम तेज बुखार (Subacute Fever) – मध्यम बुखार 7 से 14 दिन तक रहता है। इसके पीछे वायरल संक्रमण और शरीर की सूजन जिम्मेदार हो सकती है।
- क्रोनिक बुखार (Chronic (or Persistent) Fever) – क्रोनिक बुखार काफी लंबे समय तक चलता है और इसकी अवधि दो हफ्ते से भी ज्यादा होती है। इसके पीछे टीबी, ऑटो इम्यून डिस्ऑर्डर या कैंसर जैसी गंभीर वजहें हो सकती हैं।
- रुक रुक कर होने वाला बुखार (Intermittent Fever) – ऐसा बुखार चढ़ता उतरता रहता है। ये बुखार 24 घंटे के भीतर आता है और फिर उतर जाता है। इसके कुछ घंटों बाद ये फिर से आता है।
- रेमिटेंट बुखार (Remittent Fever) – ऐसे बुखार में रोज टेंपरेचर में उतार चढ़ाव होता है जो सामान्य नहीं कहा जाता है।
बुखार के क्या कारण हैं?
बुखार चूंकि शरीर में किसी बीमारी के खिलाफ प्रतिक्रिया का लक्षण है, इसलिए इसके कई कारण हो सकते हैं। हर तरह का बुखार अलग अलग समस्या पर इम्यून सिस्टम का रिएक्शन है। बुखार के सामान्य कारण इस प्रकार हैं-
- संक्रमण (Infections) – कई तरह के बाहरी संक्रमण बुखार का कारण हो सकते हैं। जैसे वायरल, बैक्टीरियल, परजीवी या फंगल इंफेक्शन।
- ऑटो इम्यून बीमारियां (Autoimmune diseases) – कुछ खास ऑटो इम्यून बीमारियां जैसे ल्यूपस या अर्थराइटिस जिसे गठिया कहते हैं, इस बुखार की वजह हो सकते हैं।
- दवाएं (Medications) – कुछ दवाएं भी ऐसी होती हैं जिनके सेवन के बाद इम्यून सिस्टम रिएक्ट करता है और व्यक्ति को बुखार आ जाता है।
- वैक्सिनेशन (Vaccines) – कुछ मामलों टीका लगने यानी वैक्सिनेशन के बाद बुखार आना काफी सामान्य है। खासकर बच्चों को लगने वाले अधिकतर इंजेक्शन के बाद बुखार आता है।
- हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) – कई बार तेज गर्मी के संपर्क में आने के बाद भी शरीर का तापमान ज्यादा हो जाता है। ऐसे में बुखार आता है।
बुखार के लक्षण क्या हैं?
बुखार के लक्षण शरीर में छिपी बीमारी और समस्या के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं। बुखार के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –
- शरीर का तापमान बढ़ना
- ठंड लगना
- कंपकंपी आना
- सिर में दर्द
- पसीना आना
- मांसपेशियों में दर्द
- डिहाइड्रेशन
- मुंह कड़वा होना
- भूख कम होना
- जी मिचलाना
- थकावट और कमजोरी
बुखार गंभीर हो जाए तो मरीज दस्त, गले में खराश, चक्कर, दिल की धड़कन तेज होना, उल्टी मतिभ्रम औऱ बेहोशी का भी शिकार हो सकता है।
बुखार के लिए कौन कौन से टेस्ट करवाए जाते हैं?
बुखार के सही कारण को समझने के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्टरी को देखकर अलग अलग टेस्ट (fever profile test)की सलाह दे सकते हैं। ये टेस्ट इस प्रकार हैं –
- सीबीसी टेस्ट (Complete Blood Count) – इस टेस्ट के जरिए व्यक्ति के शरीर के खून की पूरी जांच की जाती है, जिससे खून में संक्रमण, सूजन या अन्य दिक्कतों का पता चल सकता है।
- ब्लड कल्चर टेस्ट (Blood Culture Test) – ब्लड कल्चर टेस्ट के जरिए खून में बैक्टीरिया या फंगस की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। खासतौर पर अगर सैप्सिस हो गया है या बुखार काफी लंबे समय से है।
- यूरिन एनालिसिस (Urine Analysis) – इस टेस्ट के जरिए यूरिन ट्रेक्ट के संक्रमण या किडनी के संभावित संक्रमण की पहचान की जाती है।
- छाती का एक्सरे (Chest X-ray) – निमोनिया, फेफड़ों की दिक्कत या सांस संबंधी दिक्कतों का पता लगाने के लिए छाती का एक्सरे किया जाता है।
- मलेरिया टेस्ट (Malaria Test) – अगर व्यक्ति ने किसी मलेरिया संक्रमित क्षेत्र की यात्रा की है तो पेरिफेरल ब्लड स्मीयर और रेपिड एंटीजन टेस्ट करके खून में मलेरिया के परजीवी की जांच की जाती है।
- डेंगू, टाइफाइड और कोविड 19 टेस्ट (Dengue, Typhoid, and COVID-19 Tests)- शरीर में डेंगू NS1 एंटीजन, टाइफाइड के लिए विडाल टेस्ट या COVID-19 यानी कोरोना वायरस की पहचान के लिए RT-PCR जैसे टेस्ट कराए जाते हैं।
- लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट (Liver and Kidney Function Tests) – अगर बैक्टीरिया या परजीवी के हमले के चलते लिवर और किडनी को क्षति हुई है तो इस टेस्ट के जरिए लिवर और किडनी की कार्यक्षमता की जांच की जाती है।
बुखार होने की स्थिति में अगर लक्षण अस्पष्ट हैं और कारण समझ से बाहर हैं तो गंभीर स्थितियों से बचने के लिए डॉक्टरी परामर्श लें और डॉ. लाल पैथलैब्स में फीवर पैनल टेस्ट (fever profile test) करवाएं। टेस्ट का शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
क्या बुखार का एकमात्र कारण संक्रमण होता है?
नहीं बुखार केवल संक्रमण नहीं बल्कि कुछ ऑटो इम्यून बीमारियों, गर्मी, या कुछ खास दवाओं के चलते भी हो सकता है।
क्या टेस्ट के जरिए वायरल और बैक्टीरियल बुखार में अंतर किया जा सकता है?
हां, सीबीसी टेस्ट और ब्लड कल्चर के जरिए वायरल और बैक्टीरियल बुखार में अंतर किया जा सकता है।








