जल जनित बीमारियां: कारण,लक्षण, असर और बचाव
- 8 Jun, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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पानी को जीवन कहा गया है क्योंकि इसके बिना शरीर कुछ घंटों तक ही स्वस्थ रह सकता है। 2022 में आई नेशनल हेल्थ प्रोफाइल की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षित और शुद्ध पेयजल (Safe Drinking Water) एक स्वस्थ समाज के लिए बहुत जरूरी है लेकिन फिर भी भारत जैसे देश में जल जनित बीमारियां (Waterborne Diseases) हर साल लाखों लोगों को बीमार कर डालती हैं। जल जनित बीमारियों के चलते भारत में हर साल 600 मिलयन डॉलर का आर्थिक बोझ पड़ता है। देखा जाए तो जल जनित बीमारियां सेहत के लिए बड़ा खतरा तो हैं ही, साथ ही देश की हेल्थ सर्विस के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। जल जनित बीमारियां (water borne diseases in hindi) गंभीर हो जाएं तो शरीर को दूसरी कई गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। ऐसे में समय रहते जल जनित बीमारियों को सही तरीके से समझना जरूरी है ताकि इनसे सही बचाव और इनका सटीक मैनेजमेंट संभव हो सके। इस लेख में जानते हैं कि जल जनित बीमारियां क्या हैं और इनके कारण और लक्षण क्या हैं। साथ ही जानेंगे इनके दुष्प्रभाव और इनसे बचाव के तरीकों के बारे में सब कुछ।
जल जनित बीमारियां क्या हैं
जल जनित बीमारियां (water borne diseases in hindi) दूषित जल के सेवन या उसके संपर्क में आने के बाद होती हैं। ये बीमारियां, दूषित पानी को पीने, इसे छूने, इसके इस्तेमाल और यहां तक कि इस पानी से नहाने से भी फैल सकती हैं। जल जनित बीमारियां बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और दूसरे सूक्ष्म कीटाणुओं के चलते फैलती हैं जो दूषित पेयजल, खऱाब सीवेज व्यवस्था, पशु पक्षियों के मल वाले जल के माध्यम से स्वस्थ शरीर में घुस जाते हैं।आपको बता दें कि दूषित पानी के चलते (दूषित जल से होने वाली बीमारी) डायरिया यानी हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस ई, एक्यूट डायरिया यानी पेचिश, गियार्डियासिस, और क्राइप्टोस्पोरिडियोसिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। भारत जैसे देश में जहां अभी भी एक बड़ी आबादी को साफ और शुद्ध पेयजल मिलना मुश्किल है, वहां जल जनित बीमारियां पब्लिक हेल्थ से जुड़ी चिंता का मुद्दा बन चुकी है। खासतौर पर ऐसे इलाके जहां सीवेज व्यवस्था दुरुस्त नहीं रहती और पीने का साफ पानी मुहैया नहीं हो पाता, जल जनित बीमारियों का अड्डा बन जाते हैं। ऐसे में जल जनित बीमारियों के सटीक इलाज के लिए इसके लक्षणों की समय रहते पहचान करना काफी जरूरी हो जाता है।
जल जनित बीमारियों के लक्षण क्या हैं?
जल जनित बीमारियों (water borne diseases in hindi) के लक्षण उम्र और मेडिकल कंडीशन के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं। जल जनित बीमारियों के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –
- दस्त
- उल्टी
- मतली
- पेट में दर्द
- पेट में ऐंठन
- बुखार
- ठंड लगना
- पीलिया
- डिहाइड्रेशन
- थकावट
- कमजोरी
- खूनी पेचिश
- भूख कम लगना
- चक्कर आना
- सिर में लगातार दर्द होना
- मांसपेशियों में दर्द
- यूरिन का गहरा रंग
जल जनित बीमारियों का क्या कारण है?
जल जनित बीमारियों के मूल कारण में दूषित जल छिपा है। दूषित औऱ संक्रमित पानी का किसी भी प्रकार से सेवन जल जनित बीमारियों का कारण बनता है क्योंकि इसी दूषित पानी के जरिए हानिकारक बैक्टीरिया, परजीवी और दूसरे हानिकारक कीटाणु स्वस्थ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं –
- इंसानी या पशु मल से दूषित पानी
- खुले में शौच करने की आदत
- खराब सीवेज व्यवस्था
- गंदे बर्तनों का उपयोग
- गंदे माहौल में भोजन पकाना
- गंदे पानी से सब्जियां धोना और पकाना
- बाढ़, जल भराव औऱ सीवेज के पानी का पेयजल सिस्टम में मिल जाना
- गंदे तालाब, तालाब या ठहरे पानी में नहाना
- सड़क किनारे बिकने वाला अशुद्ध जल पीना
जल जनित बीमारियों का क्या दुष्प्रभाव होता है?
जल जनित बीमारियों के लक्षण भले ही कुछ दिनों में ठीक हो जाते हों लेकिन इसके साइड इफेक्ट शरीर पर लंबे समय तक रहते हैं और काफी नुकसानदाय साबित होते हैं। जल जनित बीमारियों का शरीर पर इस तरह असर पड़ता है-
- बच्चों में कुपोषण
- बच्चों के विकास में रुकावटv
- कमजोर इम्यून सिस्टम
- त्वचा का संक्रमण
- पाचन तंत्र पर बुरा असर
- दिमागी सेहत पर बुरा असर
- गंभीर डिहाइड्रेशन
- किडनी पर बुरा असर
- ब्रेन डैमेज का रिस्क
- पीलिया
- सांस संबंधी दिक्कतें
- पोलियो
- नर्वस सिस्टम की क्षति
जल जनित बीमारियों को कैसे रोका जा सकता है?
जल जनित बीमारियों को रोकने के लिए व्यक्तिगत हाइजीन यानी व्यक्तिगत स्वच्छ आदतों के साथ साथ सामाजिक स्वच्छता के प्रयास काफी जरूरी हैं। जल जनित बीमारियों को रोकने के उपाय इस प्रकार हैं –
- केवल उबला हुआ, शुद्ध और फिल्टर पानी पीना
- भोजन से पहले साबुन से हाथ धोना
- शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना
- पानी के बर्तन और प्यूरीफायर को नियमित रूप से साफ करना
- अपने आस पास सीवेज व्यवस्था को दुरुस्त रखना
- स्ट्रीट फूड, कटे हुए फल और खासतौर पर बिना ढके स्नैक्स का सेवन न करना
- घर के अंदर और आस पानी पानी की लीक पाइपों को सही करना
- पानी की टंकी को नियमित रूप से साफ करना
- यात्रा के दौरान केवल बोतल बंद पानी का सेवन करना
- घर के आस पास जमा पानी का सही निपटान करना
- प्रदूषित नदी, तालाब या ठहरे हुए पानी में नहाने से बचाव करना
- साफ पानी में सब्जियां व फल धोना
- साफ पानी में भोजन पकाना
- कच्चे और अधपके समुद्री भोजन से परहेज करना
- बाहर मिलने वाली बर्फ का सेवन न करना
- नियमित रूप से वैक्सीन लगवाना
जल जनित बीमारियों (water borne diseases in hindi)के प्रति जागरुक रहकर और स्वच्छता संबंधी उचित सावधानियां बरतकर जल जनित बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है। इन बीमारियों के सही उपचार के लिए जरूरी है कि इनके लक्षणों को समय रहते पहचाना जाए। विश्वसनीय और सटीक जांच के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में टेस्ट बुक करें। टेस्ट शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
क्या जल जनित बीमारियां संक्रामक होती हैं?
हालांकि सभी जल जनित बीमारियां संक्रामक नहीं होती हैं लेकिन खराब स्वच्छता के चलते ये तेजी से फैल सकती हैं।
क्या वैक्सीन के जरिए जल जनित बीमारियों से बचाव हो सकता है?
वर्तमान में हैजा और टाइफाइड जैसी जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए उचित वैक्सीनेशन उपलब्ध है। हालांकि ये टीके सभी तरह के जल जनित संक्रमणों से सुरक्षा नहीं कर पाते हैं, लेकिन इनकी मदद से कुछ आम और बेहद गंभीर संक्रमणों से सुरक्षा मिल सकती है।








