हार्ट हेल्थ में इको टेस्ट का महत्व: जानें कैसे काम करता है
- 19 Dec, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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शरीर के सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है कि ह्रदय यानी हार्ट की हेल्थ हमेशा सही बनी रहे। स्वस्थ दिल व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी कहा जाता है लेकिन बदलते दौर में हार्ट हेल्थ से जुड़ी कई बीमारियां हैं जो दिल को बीमार बना रही हैं। एक संतुलित लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और नियमित तौर पर ह्रदय की जांच के जरिए दिल के दौरे, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी अन्य कई बीमारियों को दूर रखा जा सकता है। ऐसे में इको टेस्ट (इको टेस्ट क्या होता है) काफी कारगर कहा जाता है। इको टेस्ट (हार्ट इको टेस्ट) को इकोकार्डियोग्राम या इको कहा जाता है। ये एक तरह का अल्ट्रासाउंड टेस्ट होता है जो साउंड वेव्स यानी ध्वनि तरंगों की मदद से हार्ट की लाइव इमेजेस बनाता है। इको टेस्ट इसलिए महत्वपूर्ण कहा जाता है क्योंकि डॉक्टर इसी टेस्ट (इको टेस्ट क्या होता है) की मदद से दिल की संरचना, उसके ब्लड पंप करने की ताकत, दिल की कार्यप्रणाली और दिल के आस पास की रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वैसल्स की जांच कर पाते हैं। दिल की कई बीमारियों की सटीक जांच के लिए इस टेस्ट को काफी मददगार कहा जाता है। इस लेख में जानते हैं कि इको टेस्ट क्या होता है और इको टेस्ट क्यों किया जाता है। इसके साथ साथ जानेंगे इको टेस्ट कैसे होता है और इको टेस्ट कब करना चाहिए।
इको टेस्ट क्या होता है?
इको टेस्ट (इको जांच क्या होती है) दरअसल दिल संबंधी असामान्यताओं की जांच का एक कारगर और सटीक जरिया है। ये एक अल्ट्रासाउंड टेस्ट है जिसमें साउंड वेव्स यानी ध्वनि तरंगों की मदद से कंप्यूटर के जरिए दिल की चलती फिरती यानी लाइव फोटोज ली जाती हैं। इन इमेजिंग के जरिए डॉक्टर दिल के आकार, दिल की संरचना, दिल की दीवारों की मोटाई, खून पंप करने की क्षमता, हार्ट वाल्व के कामकाज और दिल की मांसपेशियों की स्थिति का आकलन करते हैं। इसके साथ साथ इस टेस्ट की मदद से कई तरह के ह्रदय रोग जैसे हार्ट फेलियर और दिल से जुड़ी जन्मजात बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है। इको टेस्ट ये बताता है कि क्या रक्त धमनियों में कोई रुकावट या ब्लॉकेज है या नहीं। आमतौर पर दिल संबंधी बीमारियों के लक्षणों जैसे दिल के दौरे, हार्ट फेलियर के बाद (इको टेस्ट क्यों किया जाता है) ये टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा दिल की सर्जरी से पहले और बाद की स्थिति के आकलन के लिए भी इको टेस्ट किया जाता है। सीने में दर्द, दिल की अनियमित धड़कन, या सांस फूलने के लक्षणों के चलते भी इको टेस्ट करवाने (इको टेस्ट कब करना चाहिए) की सलाह दी जाती है। देखा जाए तो इको टेस्ट ऐसा टेस्ट है जिसके जरिए डॉक्टर दिल की स्थिति की सटीक जांच कर पाते हैं।
इको टेस्ट कैसे होता है?
इको टेस्ट में मरीज की छाती पर जेल और ट्रांसड्यूसर की मदद से दिल की लाइव तस्वीरें ली जाती हैं। इसके लिए बाकायदा एक प्रशिक्षित तकनीशियन की मदद ली जाती है। मरीज को कमर से ऊपर के वस्त्र हटाकर टेबल पर लिटाया जाता है। इसके बाद उसकी छाती पर खास तरह का जेल लगाया जाता है। छड़ी जैसा दिखने वाला ट्रांसड्यूसर छाती पर घुमाया जाता है जो छाती के अंदर साउंड वेव्स भेजता है। ये साउंड वेव्स दिल से टकराकर वापस लौटती हैं और उनकी गूंज कंप्यूटर में रिकॉर्ड की जाती है। यही गूंज यानी तरंगें कंप्यूटर स्क्रीन पर 2डी और 3डी वीडियो फोटोज में बदल जाती हैं। इस बीच मरीज को सांस रोकने औऱ करवट बदलने का निर्देश दिया जा सकता है ताकि हार्ट की अच्छी और अलग अलग तस्वीरें मिल सकें। आमतौर पर इको टेस्ट में आधा घंटा से लेकर दो घंटे तक का समय लग सकता है।
इको टेस्ट को लेकर बहुत लोग सवाल पूछते हैं कि क्या इको टेस्ट खाली पेट होता है। इसका जवाब है कि नहीं। इको टेस्ट के लिए खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती है। हालांकि ट्रांसएसोफेजियल इको के तहत गले में ट्यूब डालकर दिल की ज्यादा क्लीयर तस्वीरें ली जाती हैं जिसके लिए मरीज को खाली पेट (इको टेस्ट खाली पेट होता है) रहने की हिदायत दी जाती है। वहीं सामान्य इको टेस्ट जिसे ट्रांसथोरेसिक इको कहते हैं, इसमें छाती पर जेल लगाकर तस्वीरें ली जाती हैं, इसके लिए खाली पेट रहना जरूरी नहीं होता है।
इको टेस्ट की नॉर्मल रिपोर्ट क्या होती है?
इको टेस्ट की नॉर्मल रिपोर्ट का मतलब है कि आपका दिल स्वस्थ है। इको टेस्ट नॉर्मल रिपोर्ट में दिल की ब्लड पंप करने की क्षमता से 50-70 % दिखाता है जो सामान्य रेंज कही जाती है। इको टेस्ट नॉर्मल रिपोर्ट हार्ट चैंबर का आकार और दिल की दीवार की मोटाई भी सामान्य होनी चाहिए। इसके अलावा ऑरटिक रूट डायमीटर 2.0-3.7 सेमी और मिट्रल वॉल्व एरिया का आकार 4.0-6.0 सेमी² सामान्य रेंज के अंतर्गत आता है।
आपको बता दें कि दिल संबंधी कई असमान्यताओं का पता लगाने में और दिल की सटीक स्थिति का आकलन करने में इको टेस्ट काफी कारगर कहा जाता है। अगर किसी व्यक्ति में दिल की बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टरी परामर्श करें। डॉक्टरी परामर्श के बाद इको टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
1.क्या इको टेस्ट खाली पेट होता है?
इको टेस्ट दो तरह से किया जाता है। पहला ट्रांसएसोफेजियल इको और दूसरा ट्रांसथोरेसिक। ट्रांसएसोफेजियल इको में चूंकि गले में ट्यूब डाली जाती है, इसलिए मरीज को खाली पेट रहने की सलाह दी जाती है। वहीं ट्रांसथोरेसिक इको कहते हैं में छाती पर जेल लगाकर इमेजेस ली जाती हैं जिसके लिए खाली पेट रहने की हिदायत नहीं दी जाती है।
2.इको टेस्ट कब करवाना चाहिए?
अगर दिल संबंधी असामान्यताएं जैसे दिल की धड़कन अनियमित होना, सांस फूलना, सीने में दर्द आदि दिख रही हैं तो इको टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा हार्ट सर्जरी से पहले और बाद में ये टेस्ट किया जाता है।








