बीटा HCG टेस्ट क्या है और क्यों किया जाता है
- 17 Sep, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Shuchi
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मां बनना एक महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल होता है। प्रेग्नेंसी का पीरियड अपने आप में बहुत खास होता है उतनी ही खास प्रेग्नेंसी की पुष्टि मानी जाती है। प्रेग्नेंसी की पुष्टि करने के लिए बीटा HCG टेस्ट (beta hcg test in hindi) को एक महत्वपूर्ण टेस्ट कहा गया है। ये एक खास डायग्नोस्टिक टेस्ट है जिसके जरिए न केवल प्रेग्नेंसी की पुष्टि होती है बल्कि भ्रूण की उम्र और उसके संभावित विकार और गर्भपात की भी संभावना का पता चल सकता है। इस लेख में जानते हैं (beta hcg test in hindi) कि बीटा HCG टेस्ट क्या होता है और बीटा HCG टेस्ट की नॉर्मल रेंज क्या होती है।
बीटा HCG टेस्ट क्या होता है?
बीटा HCG टेस्ट आमतौर पर प्रेग्नेंसी की पुष्टि के लिए किया जाने वाला ब्लड टेस्ट beta hcg test in hindi) है। इस टेस्ट के जरिए महिला के खून में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) नामक हार्मोन की मात्रा मापी जाती है। गर्भ धारण के 10 से 12 दिन के पश्चात ये हार्मोन प्लेसेंटा के अंदर बनना शुरू हो जाता है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में, खासतौर पर एक हेल्दी प्रेग्नेंसी के दौरान एसजीसी का लेवल बहुत तेजी से बढ़ता है, दुगनी और तिगुनी मात्रा में। अगर खून में एचसीजी का लेवल ज्यादा है तो प्रेग्नेंसी (beta hcg in pregnancy) का संकेत माना जाता है। आपको बता दें कि एचसीजी हार्मोन ही भ्रूण का निर्माण करता है और ये प्लेसेंटा के जरिए मां तक पहुंचता है। देखा जाए तो भ्रूण के बनने का ये पहला संकेत है जो बीटा HCG टेस्ट (beta hcg in pregnancy) के जरिए कंफर्म किया जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इस टेस्ट के जरिए ये भी जानकारी मिलती है कि प्रेग्नेंसी सही तरह से आगे बढ़ रही है या नहीं।
बीटा एचसीजी टेस्ट कितने प्रकार का होता है?
बीटा एचसीजी टेस्ट (beta hcg test in hindi) मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। एचसीजी क्वालिटेटिव टेस्ट और क्वांटिटेटिव बीटा एचसीजी। पहला टेस्ट प्रेग्नेंसी को कंफर्म करता है जबकि दूसरा टेस्ट प्रेग्नेंसी के डेवलपमेंट को ट्रैक करता है। ये दोनों टेस्ट इस प्रकार हैं:
- एचसीजी क्वालिटेटिव टेस्ट (The hCG Qualitative Test): इस टेस्ट में खून में एचसीजी हार्मोन के लेवल को मापा जाता है। ये देखा जाता है कि एचसीजी हार्मोन खून में है या नहीं है। अगर ये हार्मोन खून पाया जाता है तो प्रेग्नेंसी को कंफर्म कर दिया जाता है।
- क्वांटिटेटिव बीटा एचसीजी (Quantitative (Beta) hCG Testt): इस टेस्ट के जरिए खून में एचसीजी हार्मोन की मात्रा और लेवल की जांच का जाती है। एक बार प्रेग्नेंसी कंफर्म होने के बाद शुरुआती हफ्तों में प्रेग्नेंसी के विकास को इसी टेस्ट के जरिए ट्रैक किया जाता है।
बीटा HCG टेस्ट कब करवाना चाहिए?
बीटा HCG टेस्ट गर्भधारण के 11 से 15 दिन के भीतर करवाना चाहिए। इसके बाद प्रेग्नेंसी (beta hcg in pregnancy) के शुरुआती हफ्तों में भ्रूण के विकास की निगरानी के लिए इसे कई बार किया जाता है। लेकिन इसके लिए डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिए।
बीटा HCG टेस्ट किस तरह किया जाता है?
बीटा HCG टेस्ट की प्रक्रिया बहुत ही आसान है। एक हेल्थ प्रोफेशनल के जरिए बांह की नस से ब्लड का सैंपल लिया जाता है। फिर इस सैंपल को लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजा जाता है। इस सैंपल में एचसीजी हार्मोन के स्तर की जांच की जाती है। आमतौर पर बीटा HCG टेस्ट (beta hcg test in hindi) का रिजल्ट कुछ घंटों में सामने आ जाता है। ये बताता है कि महिला प्रेग्नेंट है या नहीं। इसके साथ साथ इस टेस्ट से हेल्दी प्रेग्नेंसी (beta hcg in pregnancy) की भी जांच होती है। बीटा एचसीजी टेस्ट भ्रूण के संभावित विकार के साथ साथ गर्भपात के खतरे, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, जुड़वां या तिड़वां भ्रूण की जानकारी भी देता है।
बीटा HCG टेस्ट नॉर्मल रेंज क्या है?
बीटा HCG टेस्ट का रिजल्ट mIU/mL यानी इंटरनेशनल यूनिट प्रति मिलीलीटर (International Units per milliliter) के संदर्भ में देखा जाता है। अगर इस टेस्ट के रिजल्ट में रिजल्ट 25 mIU/mL आ रहा है तो इसका मतलब है कि खून में एचसीजी हार्मोन का स्तर ज्यादा है, ये प्रेग्नेंसी (beta hcg test in hindi) का संकेत है। अगर किसी महिला के टेस्ट की रिपोर्ट में एचसीजी का स्तर 5 mIU/mL से कम आ रहा है तो इसका मतलब है कि खून में एचसीजी हार्मोन स्तर कम है और महिला प्रेग्नेंट नहीं है।
बीटा HCG टेस्ट नॉर्मल रेंज इस प्रकार है –
- 5 mIU/mL से कम – नॉन प्रेग्नेंसी यानी गर्भधारण नहीं हुआ है।
- 4-24 mIU/mL से ऊपर – अनिश्चित रिजल्ट, इसके बाद डॉक्टर इस टेस्ट को दोबारा करने की सलाह देते हैं।
- 25 mIU/mL से ऊपर – प्रेग्नेंसी कंफर्म यानी महिला गर्भवती है।
- 40 mIU/mL से ऊपर – महिला प्रेग्नेंट है और ये एक से ज्यादा बच्चों (जुड़वां या तीन बच्चे) का संकेत है।
बीटा hcg टेस्ट प्रेग्नेंसी (beta hcg test in hindi) की पहली तिमाही में कई बार किया जाता है ताकि प्रेग्नेंसी के विकास की सटीक जानकारी मिल सके।
बीटा hcg टेस्ट नॉर्मल रेंज (पहली तिमाही)
- प्रेग्नेंसी के पहले तीन हफ्ते – 5-50 mIU/mL
- प्रेग्नेंसी का चौथा हफ्ता – 5-426 mIU/mL
- प्रेग्नेंसी का पांचवां हफ्ता – 18-7,340 mIU/mL
आपको बता दें कि अगर महिला के खून में एचसीजी हार्मोन का स्तर हर घंटे में दुगना हो रहा है तो ये एक हेल्दी और सेफ प्रेग्नेंसी (beta hcg test in hindi) का संकेत माना जा सकता है। अगर खून में इस हार्मोन का स्तर बहुत ज्यादा है यानी एक्यूट हाई लेवल है तो ये माना जाता है कि जुड़वा या तीन बच्चे पैदा हो सकते हैं। हालांकि एचसीजी का ज्यादा स्तर कुछ तरह के कैंसर जैसे ट्रोफोब्लास्टिक डिजीज की तरफ भी इशारा करता है।
बीटा HCG टेस्ट (beta hcg test in hindi) गर्भावस्था की पुष्टि करने के साथ साथ सुरक्षित और स्वस्थ गर्भावस्था की निगरानी करने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। बबीटा HCG टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
1.बीटा HCG टेस्ट क्यों किया जाता है?
प्रेग्नेंसी को कंफर्म करने और प्रेग्नेंसी के डेवलपमेंट की निगरानी के लिए शुरूआती हफ्तों में बीटा HCG टेस्ट किया जाता है।
2.बीटा HCG टेस्ट कब किया जाता है?
बीटा HCG टेस्ट गर्भधारण करने के 11 से 15 दिन के भीतर किया जाता है। इसके बाद प्रेग्नेंसी की निगरानी के लिए इसे प्रेग्नेंसी के तीसरे, चौथे और पांचवें सप्ताह में किया जाता है।







