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शुगर के लिए HbA1c टेस्ट : महत्व , लक्ष्य और रिजल्ट

Medically Approved by Dr. Seema

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hba1c-testमधुमेह यानी डायबिटीज (Diabetes), जिसे शुगर भी कहा जाता है, दरअसल लाइफस्टाइल संबंधी ऐसी बीमारी है जो बहुत तेजी से दुनिया में फैलती जा रही है। समय पर शुगर की पहचान और जांच इसे रोकने और इसके मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभाती है। शुगर के मैनेजमेंट और निगरानी के लिए ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट यानी एचबीएवनसी (HbA1c Test) टेस्ट काफी महत्वपूर्ण साबित होता है। इस टेस्ट के जरिए मरीज के शरीर में ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन में पाई जाने वाली शुगर को मापा जाता है।

 

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है जो ऑक्सीजन को शरीर के दूसरे कई हिस्सों में पहुंचाने का काम करता है। एक रेगुलर ब्लड टेस्ट से अलग HbA1c टेस्ट के जरिए पिछले दो से तीन माह में व्यक्ति के शरीर के खून में औसत ग्लूकोज का लेवल मापा जाता है। इस टेस्ट के जरिए ही हेल्थ प्रोफेशनल किसी मरीज की डायबिटीज को लेकर अपनी राय बनाते हैं औऱ फिर मरीज के लिए दवाइयां औऱ इसके मैनेजमेंट के अन्य तरीके निर्धारित किए जाते हैं। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि HbA1c टेस्ट क्या है, इसे कब और कैसे किया जाता है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है।

 

जाने मधुमेह क्या है

 

HbA1c टेस्ट कब करवाया जाता है? (When is the HbA1c Test Done?)

किसी व्यक्ति में डायबिटीज के लक्षण दिखने पर संबंधित डॉक्टर HbA1c टेस्ट करवाने का परामर्श दे सकते हैं। मरीज के शरीर पर दिखने वाले लक्षण इस प्रकार हैं –

  1. बार बार प्यास लगना (Intense thirst)
  2. बार बार पेशाब जाना (Frequent need to urinate)
  3. धुंधला दिखना (Blurry vision)
  4. अचानक वजन में गिरावट आना (Unexpected weight loss)
  5. त्वचा का रूखापन (Dry skin)

HbA1c टेस्ट की फ्रीक्वेंसी किसी मरीज की स्थिति पर निर्भर करती है। ये इस प्रकार है –

 

1. डायबिटीज के हाई रिस्क वाले लोग (At-risk Individuals)

 डायबिटीज के हाई रिस्क वाले लोगों को बार बार HbA1c टेस्ट करवाना चाहिए। डायबिटीज के हाई रिस्क में आने वाले लोग इस प्रकार हैं –

  1. ऐसे लोग जिनके परिवार में पहले से ही लोगों को डायबिटीज रही है।
  2. ऐसे लोग जिनका लाइफस्टाइल असंतुलित है।
  3. ऐसे लोग जो फिजिकली एक्टिव नहीं रहते हैं।
  4. ऐसे मरीज जिनका वजन काफी बढ़ा हुआ है।

2. डायबिटीज के मरीज (Diabetics)

  1. अगर मरीज की डायबिटीज स्थिर रहती है तो ऐसे मामले में मरीज को साल में दो बार HbA1c टेस्ट करवाना चाहिए।
  2. ऐसे लोग जिनका ट्रीटमेंट चल रहा है, इन्हें हर तीन महीने में HbA1c टेस्ट करवाना चाहिए।

 

3. सामान्य हेल्थ की निगरानी के लिए (General Health Monitoring)

  1. ऐसे लोग जिनका मेटाबॉलिज्म कमजोर है या जिन्हें मेटाबॉलिक डिस्ऑर्डर है।
  2. ऐसे लोग जिनका ब्लड शुगर बिलकुल सीमा पर रहता हो।

HbA1c टेस्ट की जरूरत क्यों पड़ती है? (Why is the HbA1c Test Required?)

 

किसी व्यक्ति को HbA1c टेस्ट की जरूरत इन स्थितियों में पड़ती है –

 

  1. शुरूआती पहचान (Early Detection)

मरीज के लक्षणों के आधार पर प्रीडायबिटीज को जांचने के लिए और डायबिटीज की जांच के लिए HbA1c टेस्ट की जरूरत पड़ती है।

 

  1. ब्लड शुगर के लेवल पर निगरानी के लिए (Tracking Blood Sugar Trends)

समय समय पर मरीज के ब्लड शुगर को मैनेज करने के लिए और ब्लड शुगर को ट्रैक करने के लिए HbA1c टेस्ट की जरूरत पड़ती है।

 

  1. इलाज के प्रभाव को जानने के लिए (Assessing Treatment Effectiveness)

लाइफस्टाइल में संतुलित बदलाव, दवाओं और इंसुलिन थेरेपी किस तरह काम कर रही हैं, उनका प्रभाव जानने के लिए भी HbA1c टेस्ट की जरूरत पड़ती है।

HbA1c टेस्ट किस तरह किया जाता है? (How to Interpret HbA1c Test Results?)

डायबिटीज या प्रीडायबिटीज के लक्षण पाए जाने के बाद हेल्थ केयर प्रोफेशनल आमतौर पर मरीज के हाथ की नस में ब्लड लेने वाली छोटी सिरींज डालकर ब्लड सैंपल लेता है। इसके बाद ब्लड सैंपल को लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजा जाता है। HbA1c टेस्ट का रिजल्ट आमतौर पर कुछ घंटों या एक दिन के भीतर ही मिल जाता है।

HbA1c टेस्ट के लिए किस तरह की तैयारी की जाती है? (How to Prepare for the HbA1c Test?)

 

देखा जाए तो HbA1c टेस्ट के लिए किसी भी खास तरह की तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके लिए भूखा रहने यानी फास्टिंग करने की भी जरूरत नहीं होती है। इस टेस्ट को दिन के किसी भी वक्त किया जा सकता है। टेस्ट से पहले मरीज को अपने हेल्थ केयर प्रोफेशनल को अपनी वर्तमान मेडिकल कंडीशन, किसी दवा से रिएक्शन और चल रही दवाओं की जानकारी जरूर देनी चाहिए, क्योंकि ये सब टेस्ट को प्रभावित कर सकते हैं।

HbA1c टेस्ट के रिजल्ट को किस तरह समझा जाता है? (How to Interpret HbA1c Test Results?)

HbA1c टेस्ट का रिजल्ट आमतौर पर परसेंटेज यानी फीसदी में निकाला जाता है। इसके रिजल्ट को इस तरह समझा जा सकता है –

  1. 5 फीसदी से कम – सामान्य ब्लड शुगर लेवल (Normal blood sugar levels)
  2. 5फीसदी – प्रीडायबिटीज (Prediabetes, indicating a higher risk of developing diabetes), ये जल्द ही डायबिटीज डेवलप होने के रिस्क को दिखाता है।
  3. 6 फीसदी या इससे ऊपर – डायबिटीज (Diabetes), ये हाई HbA1c लेवल है जो दिल की बीमारी, नर्वस सिस्टम के खराब होने या इस जैसी दूसरी हेल्थ परेशानियों का संकेत देता है। इसके लिए मरीज की सही देखभाल, सही परहेज, संतुलित लाइफस्टाइल और सही डाइट को फॉलो करने की जरूरत होती है।

शुगर के मामलों में तेजी से हो रहे इजाफे के बीच इसका समय रहते पता लगाना और सही समय पर इसका मैनेजमेंट करना बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। HbA1c टेस्ट लंबे समय के लिए ब्लड शुगर लेवल को ट्रैक करने का एक इफेक्टिव तरीका प्रदान करता है।

 

देखा जाए तो HbA1c टेस्ट शुगर के इलाज और मैनेजमेंट के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि इससे ब्लड शुगर को लंबे समय तक ट्रैक करने में मदद मिलती है। अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है, या कोई व्यक्ति पहले से ही डायबिटीज की दवाएं ले रहा है तो उसे इस संबंध में डॉक्टरी परामर्श लेना चाहिए। डायबिटीज मैनेजमेंट हेतू HbA1c टेस्ट के लिए डा। लाल पैथलेब्स की वेबसाइट पर विजिट करना चाहिए।

FAQs

1. HbA1c टेस्ट क्या है और इसकी क्या अहमियत है?

HbA1c टेस्ट के जरिए पिछले दो से तीन महीने के औसत ब्लड शुगर का लेवल जांचा जा सकता है। इससे शुरुआती डायबिटीज का पता लगाने में मदद मिलती है। साथ ही साथ इसकी मदद से डायबिटीज रोगी अपने ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करके अपने इलाज और शुगर मैनेजमेंट की जांच कर सकते हैं।

2. क्या HbA1c टेस्ट से पहले उपवास यानी फास्टिंग की जरूरत होती है

नहीं, HbA1c टेस्ट से पहले मरीज को फास्टिंग की जरूरत नहीं होती है। इसे किसी भी समय करवाया जा सकता है।

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