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डायबिटीज, थायरॉइड और कोलेस्ट्रॉल: कब और क्यों करवाने चाहिए ये टेस्ट

Medically Approved by Dr. Seema

Table of Contents

 

शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए जरूरी है कि समय समय पर उसकी नियमित जांच होती रहे। नियमित टेस्ट के जरिए शरीर में होने वाली लंबी और पुरानी बीमारियों को पहचान कर उन्हें रोका जा सकता है। नियमित टेस्ट के जरिए कई ऐसी बीमारियों को शुरू होने से पहले ही रोका जा सकता है, जो आगे जाकर गंभीर स्थितियां पैदा कर सकती हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा सुझाए जाने वाले टेस्ट हैं ब्लड शुगर टेस्ट, (Blood Sugar Test) थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (Thyroid Test) और कोलेस्ट्रॉल लेवल टेस्ट (Cholesterol Test)। डायबिटीज, थायरॉइड और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल आज के दौर में आम बीमारियां बन चुके है, जो ज्यादातर लोगों को अपना शिकार बना रही हैं। ऐसे में नियमित अंतराल पर या कुछ खास लक्षण दिखने पर इन टेस्ट को करवाने की सलाह दी जाती है। इन टेस्ट के जरिए डायबिटीज, थायरॉइड बीमारी और कोलेस्ट्रॉल के घटते या बढ़ते स्तर की जानकारी मिलती है और इन बीमारियों को जोखिमों को कम करने के साथ साथ इन बीमारियों को मैनेज करने में भी मदद मिलती है। इस लेख में जानते हैं कि ये टेस्ट किसी व्यक्ति की सेहत को लेकर क्या बताते हैं और इन्हें करवाना क्यों जरूरी कहा जाता हैं और साथ ही जानेंगे कि किसी व्यक्ति को ये टेस्ट कब करवाने चाहिए।

ब्लड शुगर टेस्ट क्या है?

शुगर टेस्ट (Sugar Test) किसी व्यक्ति के शरीर में प्री डायबिटीज और डायबिटीज की कंडीशन की जांच के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए शरीर के खून में ग्लूकोज के स्तर (Sugar Test) का आकलन किया जाता है। आपको बता दे कि ग्लूकोज शरीर को एनर्जी प्रदान करने वाला एक अहम सोर्स है और शरीर में इसके स्तर का कम या ज्यादा होने की जानकारी ब्लड शुगर टेस्ट (Sugar Test)के जरिए ही मिलती है। अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर टेस्ट न किया जाए (शुगर की बीमारी क्यों होती है) तो हाई ब्लड शुगर दिल, गुर्दे, आंखों और नर्व को नुकसान पहुंचा सकता है। ब्लड शुगर टेस्ट की जरूरत इन स्थितियों में पड़ती है-

 

  1. बार बार प्यास लगना।
  2. थकान हावी होना।
  3. नजर धुंधली होना।
  4. बार बार यूरिन आना।
  5. शरीर में कमजोरी महसूस होना।
  6. हाथ पैरों में झुनझुनाहट होना।
  7. घाव भरने में देर लगना।
  8. वजन में गिरावट आना।
  9. ऐसे लोग जिनके परिवार में लोगों को डायबिटीज रही हो।
  10. 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को।
  11. 30 साल के ज्यादा उम्र का व्यक्ति जिसका वजन बहुत कम या ज्यादा हो।
  12. प्रेगनेंट महिला को प्रेगनेंसी पीरियड के दौरान।

थायरॉइड फंक्शन टेस्ट क्या है?

थायरॉइड फंक्शन टेस्ट थायरॉइड की जांच (thyroid test)और इसके स्तर का पता करने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के दौरान इस बात का पता किया जाता है कि थायरॉइड ग्लैंड यानी ग्रंथि सही तरीके से काम कर रही है या नहीं। इसका मूल्यांकन करने के लिए कुछ ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। जैसे टी3 (T3) टी4 (T4) और टीएसएच (TSH)। थायरॉइड ग्रंथियां इन्ही हॉर्मोन के जरिए शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती हैं। थायरॉइड फंक्शन टेस्ट ( thyroid test)में इन हॉर्मोन के स्तर की जांच की जाती है। इस आधार पर व्यक्ति के शरीर में हाइपोथायरायडिज्म (अंडरएक्टिव थायरॉयड) या हाइपरथायरायडिज्म (ओवरएक्टिव थायरॉयड) की संभावना का पता लगाया जाता है। थायरॉइड फंक्शन टेस्ट इन संकेतों (थायराइड लक्षण)के दिखने पर करवाना चाहिए –

 

ओवरएक्टिव थायरॉइड बीमारी के लक्षण (थायराइड लक्षण) दिखें जैसे – 

 

  • वजन एकाएक कम होना
  • दिल की धड़कन अनियमित होना
  • घबराहट
  • सोने में दिक्कत
  • बाल तेजी से गिरना
  • त्वचा का रूखापन

 

अंडरएक्टिव थायरॉइड के लक्षण (थायराइड लक्षण) दिखें जैसे –

 

  • थकान हावी होना
  • एकाएक वजन तेजी से बढ़ना
  • त्वचा का रूखापन
  • ठंड ज्यादा लगना
  • परिवार में किसी को ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर रहा हो
  • प्रेगनेंट महिला या फिर कंसीव करने की कोशिश कर रही महिलाएं (आपको बता दें कि प्रेगनेंट महिला को होने वाली थायरॉइड बीमारी उसके साथ साथ उसके होने वाले बच्चे की सेहत को भी प्रभावित करता है)।

कोलेस्ट्रॉल टेस्ट क्या है ?

कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test)में शरीर में वसा यानी लिपिड की मात्रा और स्तर को मापा जाता है। आपको बता दें कि वसा (cholesterol in hindi)ही शरीर में दिल की सेहत को नियंत्रित करने का काम करती है। अगर वसा की मात्रा शरीर में ज्यादा हो रही है तो दिल की सेहत को कई तरह के रिस्क पैदा हो सकते हैं। यदि खून में कोलेस्ट्रॉल (cholesterol in hindi) या दूसरी वसा का स्तर ज्यादा हो गया है तो ये ब्लड वैसल्स यानी रक्त धमनियों में रुकावट का कारण बन सकता है। रक्त धमिनयों में रुकावट आने पर दिल के दौरे या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दिल की सेहत का आकलन करने के लिए कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test)की सलाह दी जाती है।

कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test)में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल और एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल के साथ साथ ट्राइग्लिसराइड्स (cholesterol total normal in hindi)के स्तर की जांच की जाती है। एलडीएल का स्तर ज्यादा होने पर व्यक्ति के दिल की सेहत को सीधा खतरा होता है। ऐसे लोगों को इन परिस्थितियों में कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test)करवाना चाहिए –

 

  1. नियमित जांच के तौर पर।
  2. ऐसे लोग जिनके परिवार में दिल संबंधी बीमारियों या हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा है।
  3. अगर शरीर पर ज्यादा मोटापा है।
  4. अगर लाइफस्टाइल के रिस्क देखकर डॉक्टर सलाह दे।
  5. अगर कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए पहले से दवा खा रहे हैं तो इलाज की प्रगति जानने के लिए।
  6. अगर लाइफस्टाइल असंतुलित है या फिर फिजिकल एक्टिविटी कम है।

 

देखा जाए तो शरीर की समूची सेहत की देखभाल और संभावित बीमारियों का पता लगाने के लिए नियमित तौर पर ब्लड शुगर टेस्ट, थायरॉइड फंक्शन टेस्ट और कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol in hindi)काफी महत्वपूर्ण साबित होते हैं। इनके जरिए कोई भी व्यक्ति सेहत संबंधी जोखिमों से दूर रह सकता है। ब्लड शुगर टेस्ट, थायरॉइड फंक्शन टेस्ट और कोलेस्ट्रॉल टेस्ट को आसानी से बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।

FAQ

  1. किसी व्यक्ति को कितनी बार अपना ब्लड शुगर टेस्ट करवाना चाहिए?
    डायबिटीज जैसी बीमारी के रिस्क कुछ खास चीजों जैसे उम्र, वजन, फैमिली हिस्टरी, लाइफस्टाइल और आदतों के आधार पर निर्भर करते हैं। आमतौर पर तीस साल के ज्यादा उम्र के लोगों या ऊपर लिखे रिस्क में आने वाले लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह पर नियमित तौर पर ब्लड शुगर टेस्ट करवाना चाहिए।
  2. थायरॉइड फंक्शन टेस्ट किन संकेतों के आधार पर करवाना चाहिए?
    वजन में बदलाव, थकान, मूड स्विंग, सेंसेटिविटी और दिल की धड़कन में असंगति के संकेतों को देखते हुए थायरॉइड फंक्शन टेस्ट करवाना चाहिए।
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