कोलेस्ट्रॉल परीक्षण क्या है और यह क्यों जरूरी है?
- 25 Nov, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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शरीर को स्वस्थ रखने के इसमें सही अनुपात में कोलेस्ट्रॉल होना काफी महत्वपूर्ण कहा जाता है। कोलेस्ट्रॉल (cholesterol in hindi meaning)दरअसल शरीर की कोशिकाओं में पाई जाने वाली वो वसा यानी फैट है जो शरीर के विकास और जरूरी कामकाज के लिए काफी मायने रखती है। कोलेस्ट्रॉल (cholesterol in hindi meaning) दो प्रकार का होता है। एलडीएल और एचडीएल। एचडीएल गुड कोलेस्ट्रॉल है और एलडीएल बैड कोलेस्ट्रॉल कहलाता है। अगर शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाए तो दिल और कई दूसरी गंभीर बीमारियों की खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल की निगरानी के लिए कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test) की सलाह दी जाती है। कोलेस्ट्रॉल टेस्ट जिसे लिपिड प्रोफाइल भी कहा जाता है, खून में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइइड्स के स्तर की जांच करने वाला ब्लड टेस्ट है। कोलेस्ट्रॉल परीक्षण (cholesterol test)की मदद से मरीज के शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच के साथ साथ दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। इस लेख में जानते हैं कि कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test in hindi) क्या होता है और ये क्यों जरूरी होता है। साथ ही जानेंगे कोलेस्ट्रॉल लेवल (cholesterol total normal in hindi) क्या होना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट क्या है?
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट ऐसा ब्लड टेस्ट है जो शरीर के खून में टोटल कोलेस्ट्रॉल की जांच करता है। अगर शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा है तो इसे हाई कोलेस्ट्रॉल (cholesterol in hindi meaning) कहा जाता है। हाई कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए मोटापा, दिल के दौरे, स्ट्रोक, हाई बीपी के लिए जिम्मेदार माना जाता है। आपको बता दें कि कोलेस्ट्रॉल (high cholesterol in hindi) काफी साइलेंट तरीके से शरीर में बढ़ता है और अक्सर लोग इसके लक्षणों को नजरंदाज कर बैठते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल कई गंभीर बीमारियों को न्यौता देता है जिसमें स्ट्रोक भी शामिल है। ऐसे में समय समय पर कोलेस्ट्रॉल टेस्ट के जरिए कोलेस्ट्रॉल के बढ़ते स्तर की निगरानी की जा सकती है। कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test)को लिपिड प्रोफाइल कहते हैं। ये टेस्ट कोलेस्ट्रॉल के स्तर को मापने के साथ साथ पहले से मौजूद बीमारियों की निगरानी और इलाज के प्रोग्रेस का भी सही अंदाजा लगाने में मददगार साबित होता है।
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट क्यों जरूरी है?
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test) की मदद से शरीर में एलडीएल और एचडीएल के स्तर की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट की मदद से ह्रदय संबंधी खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल टेस्ट शरीर में वसा के स्तर को मापने के साथ साथ ब्लड वैसल्स यानी रक्त धमनियों में ब्लॉकेज और संकुचन का भी पता लगाता है। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर हाई है तो इस टेस्ट की मदद से डॉक्टर उसे दवा और लाइफस्टाइल संबंधी बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं।
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट की मदद से केवल दिल की बीमारियां ही नहीं डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हाई बीपी जैसे लंबी बीमारियों के मैनेजमेंट में भी सहायता मिलती है।
हाई कोलेस्ट्रॉल के खतरे क्या हैं?
अगर शरीर में कोलेस्ट्रॉल (cholesterol test) ज्यादा हो जाए तो शरीर की रक्त धमनियों में रुकावट आ सकती है। एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल (cholesterol in hindi meaning) रक्त धमनियों में जम जाता है जिससे धमनियों में बहने वाले खून के प्रवाह में रुकावट आती है। इससे स्ट्रोक औऱ दिल संबंधी बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। एलडीएल (high cholesterol in hindi)जहां धमनियों में जमा होकर दिल के लिए खतरा बनता है वहीं एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल बैड कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने का काम करता है। ऐसे में जरूरी है कि शरीर में एचडीएल की मात्रा कम न हो और एलडीएल की मात्रा ज्यादा न हो।
हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण क्या है?
अक्सर कोलेस्ट्रॉल (cholesterol in hindi meaning)बिना किसी खास लक्षण के बढ़ता है। हाई कोलेस्ट्रॉल (high cholesterol in hindi) के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं –
- सीने में भारीपन महसूस होना
- सांस फूलना
- हाथ पैरों में झुनझुनाहट
- थकान
- कमजोरी महसूस होना
- आंखों के आस पास पीले धब्बे
- बीपी हाई रहना
- छाती में दर्द महसूस होना
- पैरों में दर्द होना
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट किस तरह किया जाता है?
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol in hindi meaning) में बांह में सिरींज के जरिए खून का सैंपल लिया जाता है। इस सैंपल को लैब में भेजा जाता है और इस सैंपल के जरिए शरीर में टोटल कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल, एचडीएल और ट्राईग्लिसराइड्स के स्तर की जांच की जाती है। आमतौर पर इस टेस्ट से 9 से 12 घंटे पहले पानी के अलावा कुछ भी न खाने या पीने का निर्देश दिया जाता है। इसे कोलेस्ट्रॉल टेस्ट फास्टिंग कहते हैं।
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट की नॉर्मल रेंज क्या है?
इस टेस्ट में कोलेस्ट्रॉल (cholesterol total normal in hindi)की कुल रेंज मिलीग्राम/डीएल के तौर पर मापी जाती है। शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल (cholesterol total normal in hindi)200 मिलीग्राम/डीएल होना चाहिए। टेस्ट में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल लेवल 40 से अधिक होना चाहिए। वहीं एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल 100 मिलीग्राम/डीएल से कम होना चाहिए। कुल ट्राईग्लिसराइड्स 150 मिलीग्राम/डीएल से कम होना चाहिए।
देखा जाए तो कोलेस्ट्रॉल (cholesterol test)शरीर के लिए महत्वपूर्ण वसा है लेकिन इसकी अधिकता कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। अगर किसी व्यक्ति हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी सलाह लें। डॉक्टरी सलाह के बाद कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test in hindi) के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करें। शैडयूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट क्या होता है?
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test)की मदद से शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल की जांच की जाती है। इसके आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि मरीज को दिल संबंधी बीमारियों का कितना रिस्क है।
कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कब करवाना चाहिए?
25 साल के बाद हर व्यक्ति को हर पांच साल में कोलेस्ट्रॉल टेस्ट (cholesterol test in hindi) करवाना चाहिए। जो लोग मोटापा, डायबिटीज, हाई बीपी या दिल की बीमारियों के शिकार हैं उन्हें डॉक्टरी सलाह पर साल में दो बार कोलेस्ट्रॉल टेस्ट करवाना चाहिए।








