40 की उम्र के बाद पुरुषों को करवाने चाहिए ये मेडिकल टेस्ट
- 9 Jun, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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चालीस साल की उम्र किसी भी पुरुष के जीवन में एक टर्निंग पॉइन्ट (40 के बाद पुरुष के शरीर में परिवर्तन)की तरह होती है जिससे उसके स्वास्थ्य में कई तरह के बदलाव आते हैं। भले ही कई लोग इस उम्र में भी अपने आप को स्वस्थ और फिट महसूस करते हैं लेकिन जीवन के इस दौर में मेटाबॉलिज्म (metabolism), दिल (heart health) और हार्मोनल बैलेंस hormonal balance) में कई बदलाव (40 के बाद पुरुष के शरीर में परिवर्तन)होने लगते हैं। ऐसे में चालीस साल के बाद शरीर को नियमित मेडिकल जांच की जरूरत पड़ने लगती है। ऐसी कई बीमारियां हैं जो पुरुषों में चालीस साल की उम्र के बाद अपने लक्षण दिखाने लगती हैं। इसलिए चालीस साल की उम्र के बाद नियमित फिजिकल टेस्ट कई बीमारियों का शुरुआत में ही पता लगाकर उनसे बचाव और उनके मैनेजमेंट में मददगार साबित हो सकते हैं। इस लेख में उन पांच महत्वपूर्ण और जरूरी टेस्ट के बारे में बात करते हैं जो हर पुरुष को चालीस साल की उम्र के बाद जरूर करवाने चाहिए।
- लिपिड प्रोफाइल स्क्रीन (Lipid Profile Screen)- चालीस साल की उम्र के बाद पुरुषों को लिपिड प्रोफाइल स्क्रीनिंग टेस्ट जरूर करवाना चाहिए क्योंकि ये दिल संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक के खतरों का आकलन करने में मदद करता है। इस टेस्ट में शरीर में लिपिड यानी वसा की जांच की जाती है। इस टेस्ट के जरिए खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर (एलडीएल और एचडीएल ) और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की जांच की जाती है। एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ दिल संबंधी बीमारियों को जन्म देता है। ये टेस्ट बताता है कि दिल के दौरे या स्ट्रोक का रिस्क है या नहीं। जिन लोगों की फैमिली हिस्ट्री में दिल संबंधी बीमारियां रही हैं, उन्हें खास तौर पर ये टेस्ट नियमित तौर पर करवाना चाहिए। इस टेस्ट में हाथ की नस से खून लेकर लेब में भेजा जाता है। इस टेस्ट से पहले फास्टिंग जरूरी है और इसे करने से 8 से 12 घंटों के बीच कुछ नहीं खाना चाहिए।
- थायरॉइड प्रोफाइल (Thyroid Profile) – आमतौर पर ये धारणा है कि थायरॉइड औरतों को ही होता है लेकिन सच ये है कि पुरुष भी इसके शिकार बनते हैं। खासकर उम्र बढ़ने के साथ साथ पुरुष इस बीमारी की चपेट में आने लगते हैं। यदि किसी पुरुष के शरीर में थायॉइड के हार्मोन कम हैं तो वो हाइपोथायरॉडिज्म का शिकार हो सकता है। ऐसे में वजन बढ़ता है और व्यक्ति थका महसूस करता है। यदि थायरॉइड के हार्मोन ज्यादा बन रहे है तो व्यक्ति हायपरथायरॉडिज्म का शिकार हो सकता है। इसमें वजन तेजी से गिरता है और व्यक्ति के दिल की धड़कन तेज होने लगती है। ऐसे में चालीस की उम्र के बाद हर पुरुष को थायरॉइड प्रोफाइल टेस्ट करवाना चाहिए ताकि थायऱॉइड असंतुलन का पता जल्द चल सके और सही उपचार में मदद मिल सके।
- कंप्लीट ब्लड काउंट (Complete Blood Count (CBC)- चालीस साल की उम्र के बाद पुरुषों के लिए कंप्लीट ब्लड काउंट भी काफी अहम होता है। इस टेस्ट के जरिए शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स के स्तर की संपूर्ण जांच की जाती है। इससे ब्लड हेल्थ की सही जानकारी मिल पाती है और एनीमिया और ब्लड रिलेटेड कई बीमारियों का समय रहते पता चलने में मदद मिलती है। अगर चालीस साल के बाद कोई पुरुष बहुत ज्यादा थकावट, कमजोरी महसूस करता है तो ये ब्लड रिलेटेड समस्या का संकेत हो सकता है। सीबीसी टेस्ट के जरिए इन छिपी हुई ब्लड रिलेटेड समस्याओं का पता चलता है और इनके सटीक उपचार में मदद मिलती है।
- विटामिन बी12 टेस्ट (Vitamin B12) – जैसे जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, उनके शरीर की भोजन से विटामिन बी12 को अब्जॉर्व यानी अवशोषित करने की क्षमता कमजोर होने लगती है। जब पर्याप्त तौर पर विटामिन बी12 का अवशोषण नहीं होता तो शरीर इसकी कमी से जूझने लगता है। इसके फलस्वरूप थकान, कमजोरी, मूड स्विंग, याद्दाश्त में कमी, डिप्रेशन और एंजाइटी जैसी परेशानियां उभरने लगती हैं। ये सभी समस्याएं शरीर में विटामिन बी12 की कमी से जुड़ी हैं। आमतौर पर लोग इन समस्याओं को उम्र बढऩे या तनाव का नतीजा मान लेते हैं लेकिन अगर ये लक्षण बढ़ते हैं तो कई गंभीर बीमारियां विकसित हो सकती हैं। इसलिए समय पर शरीर में विटामिन बी12 की जांच करवाने से इन समस्याओं के डेवलप होने से पहले ही इनको रोका जा सकता है।
- लिवर/किडनी फंक्शन टेस्ट (Liver/Kidney Function Tests) – किसी भी व्यक्ति के शरीर के लिए लिवर और किडनी का कामकाज काफी महत्वपूर्ण है। लिवर और किडनी शरीर के टॉक्सिन को फिल्टर करने यानी छानने के साथ साथ मेटाबॉलिज्म संबंधी कामकाज भी करते हैं और शरीर के कई अंगों का संतुलन भी बनाए रखते हैं। ऐसे में लिवर और किडनी का सही ढंग से काम करना और मजबूत रहना किसी भी व्यक्ति के लिए काफी जरूरी है। ऐसे में वो लोग जो लंबे समय से दवाएं खा रहे हैं, शराब का सेवन कर रहे हैं या फिर डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे हैं, उन्हें खासतौर पर चालीस साल की उम्र के बाद लिवर और किडनी का फंक्शन टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इस टेस्ट के जरिए किडनी और लिवर के संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन होता है और किसी संभावित बीमारी का समय रहते पता चलने में मदद मिलती है।
पुरुषों के लिए चालीस साल की उम्र काफी संवेदनशील होती है क्योंकि इस उम्र के आस पास उनके शरीर और उसकी क्षमताओं में काफी बदलाव होते हैं। ऐसे में उम्र बढ़ने के साथ साथ नियमित मेडिकल टेस्ट काफी महत्वपूर्ण होते हैं। खासकर ऐसे दौर में जब मामूली दिखने वाले लक्षण भी किसी ब़ड़ी बीमारी का संकेत दे सकते हैं, ये टेस्ट काफी जरूरी हो जाते हैं। अपनी फिजिकल हेल्थ को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए समय समय पर ऊपर लिखे टेस्ट करवाने से संपूर्ण सेहत सुरक्षित रहती है। ऊपर लिखे टेस्ट किसी भी बीमारी की प्रारंभिक पहचान के साथ साथ उचित देखभाल औऱ सटीक इलाज की सुविधा प्रदान करते हैं। इन डायग्नोस्टिक टेस्ट को करवाने के लिए डॉ. लाल पैथलेब्स में शैड्यूल बुक करें। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
किस उम्र के बाद पुरुषों को नियमित हेल्थ टेस्ट शुरु कर देने चाहिए?
Can lifestyle changes lower the need for medical tests?
पुरुषों को चालीस साल की उम्र के आस पास नियमित मेडिकल टेस्ट करवाने शुरु कर देने चाहिए। खासतौर पर ऐसे लोग जिनके परिवार में पुरानी बीमारियों का इतिहास रहा हो।
क्या लाइफस्टाइल में बदलाव से नियमित मेडिकल जांच की जरूरत कम हो सकती है?
At what age should men start regular health testing?
देखा जाए तो लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव बीमारियों के रिस्क कम करते हैं। लेकिन दूसरी तरफ एक खास उम्र के बाद नियमित मेडिकल टेस्ट जरूरी कहे जाते हैं क्योंकि कुछ खास स्थितियों में लक्षण गंभीर रूप लेने के बाद ही दिखते हैं।








