एचबीए1सी टेस्ट : डायबिटीज की जांच और मॉनिटर करने वाला ब्लड टेस्ट
- 8 Jun, 2025
- Written by Team Dr Lal PathLabs
Medically Approved by Dr. Seema
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डायबिटीज लाइफस्टाइल से जुड़ी ऐसी बीमारी है जिसके चलते शरीर में ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित होता रहता है। ये बीमारी एक मेटाबॉलिक डिस्ऑर्डर है जो शरीर में इंसुलिन के कम उत्पादन के चलते होती है। इस बीमारी में खान पान पर खासा ध्यान देने की जरूरत होती है। डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए इसकी नियमित जांच और मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ती है। एचबीए1सी टेस्ट एक ऐसा ब्लड टेस्ट है जिसके जरिए डायबिटीज की नियमित निगरानी और जांच की जाती है। एचबीए1सी टेस्ट को ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कहा जाता है। डायबिटीज में नियमित तौर पर किए जाने वाले सामान्य ब्लड टेस्ट से अलग एचबीए1सी टेस्ट तीन महीने के अंतराल पर किया जाता है और ये तीन महीनों में शरीर में एवरेज शुगर के स्तर का आकलन करके मरीज की मेडिकल कंडीशन को स्पष्ट करता है। इस लेख में जानते हैं कि एचबीए1सी टेस्ट क्या (hba1c test in hindi) है, इसकी जरूरत क्यों पड़ती है और साथ ही जानेंगे इसकी पूरी प्रोसेस के बारे में सब कुछ।
एचबीए1सी परीक्षण की सलाह कब दी जाती है?
जिन लोगों के शरीर में डायबिटीज के लक्षण दिखते हैं, या जो डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें एचबीए1सी टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। डायबिटीज के सामान्य लक्षण कुछ इस तरह दिखते हैं –
- बार बार प्यास लगना
- बार बार यूरिन आना
- बिना किसी कारण एकाएक वजन में कमी
- थकान हावी होना
- नजर धुंधली होना
- त्वचा पर रूखापन आना
- घावों के भरने में देर लगना
- बार बार इंफेक्शन होना
- स्किन पर खुजली होना
- मूड में लगातार बदलाव होना
हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि ऊपर दिए लक्षण ही hba1c परीक्षण करवाने का एकमात्र कारण नहीं हैं। hba1c परीक्षण की जरूरत मरीज की मेडिकल कंडीशन के साथ साथ कुछ दूसरे कारणों पर भी निर्भर करती है। ये कारण इस प्रकार हैं –
- हाई रिस्क वाले लोग – ऐसे लोग जिनके परिवार में सदस्यों को डायबिटीज और मोटापे की समस्या पहले से हो, उन्हें समय समय पर ये टेस्ट करवाना चाहिए।
- डायबिटीज रोगी – डायबिटीज रोगियों को स्थिर कंडीशन में साल में दो बार एचबीए1सी टेस्ट करवाना चाहिए। वो लोग जिनका उपचार चल रहा है, उन्हें हर तीन महीने में एक बार hba1c परीक्षण करवाना चाहिए।
- सामान्य जांच – जिन लोगों की डायबिटीज सामान्य सीमा के आस पास रहती है या फिर जिन्हें मेटाबॉलिक डिस्ऑर्डर है, ऐसे लोगों को भी एहतियात के तौर पर एचबीए1सी टेस्ट करवाना चाहिए।
Hba1c परीक्षण क्यों जरूरी है?
डायबिटीज की जांच और नियमित निगरानी के लिए hba1c परीक्षण काफी (hba1c बढ़ने से क्या होता है) जरूरी कहा जाता है। इसकी जरूरत के लिए ये वजहें हैं –
- शुरूआती पहचान – डायबिटीज की प्रारंभिक पहचान के लिए एचबीए1सी टेस्ट जरूरी है। डायबिटीज के लक्षणों के खराब होने से पहले इस टेस्ट की मदद से प्री डायबिटिक और डायबिटीज की पहचान होती है। इस टेस्ट की मदद से डायबिटीज के बिगडऩे की संभावना कम ही जा सकती है।
- ब्लड शुगर के ट्रेंड पर नजर रखने के लिए – आमतौर पर डायबिटीज मरीज के शरीर में ब्लड शुगर का लेवल लगातार बदलता रहता है। सटीक इलाज के लिए दो से तीन महीनों में ग्लूकोज के स्तर की सटीक जांच के लिए hba1c परीक्षण काफी महत्वपूर्ण साबित होता है।
- इलाज के प्रभाव की जांच के लिए – एचबीए1सी टेस्ट के जरिए मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर इलाज के प्रभाव को समझ पाते हैं। इस टेस्ट के मदद से डॉक्टर ये निर्धारित कर पाते हैं कि क्या लाइफस्टाइल में बदलाव, दवाएं, डाइट और इंसुलिन थैरेपी सही तरीके से काम कर रही है।
- फास्टिंग के बिना टेस्ट – hba1c परीक्षण करवाने से पहले फास्टिंग यानी भूखे रहने की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में डायबिटीज के मरीज इसे किसी भी समय करवा सकते हैं।
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Hba1c परीक्षण की प्रक्रिया क्या है?
एचबीए1सी टेस्ट (hba1c test in hindi)की प्रोसेस बहुत ही आसान है। इस टेस्ट के तहत व्यक्ति के हाथ की नस से ब्लड का सैंपल लिया जाता है। इस सैंपल को जांच के लिए विशेष लैब में भेजा जाता है। सैंपल का रिजल्ट कुछ घंटों में ही आ जाता है।
इस टेस्ट को करने से पहले व्यक्ति को किसी खास तरह की तैयारी करने की जरूरत नहीं होती है। इस टेस्ट को करने से पहले व्यक्ति को डॉक्टर द्वारा बताई जा रही किसी दवा के सेवन की जानकारी देनी जरूरी है। इसके अलावा अगर व्यक्ति किसी खास मेडिकल कंडीशन से पीड़ित है तो उसे ये जानकारी भी टेस्ट करने वाले टैक्नीशियन को बतानी चाहिए। कुछ खास दवाएं और मेडिकल कंडीशन hba1c परीक्षण के रिजल्ट की सटीकता पर असर डाल सकते हैं।
एचबीए1सी टेस्ट का रिजल्ट किस तरह देखा जाता है?
एचबीए1सी टेस्ट के नतीजे प्रतिशत यानी फीसदी के रूप में सामने आते हैं। ये नतीजे (hba1c नॉर्मल रेंज)लंबे समय तक शरीर में ब्लड शुगर के उतार चढ़ाव की जानकारी देते हैं।
- 5.7% से कम – ये रिजल्ट नॉर्मल (hba1c नॉर्मल रेंज)ब्लड शुगर का स्तर कहलाता है।
- 5.7% से 6.4% के बीच – ये रिजल्ट प्रीडायबिटीज का संकेत देता है। इस रिजल्ट के जरिए डायबिटीज के डेवलपमेंट के हाई रिस्क का पता चलता है।
- 6.5% या उससे ज्यादा – ये रिजल्ट मरीज को डायबिटीज होने की जानकारी देता है।
एचबीए1सी टेस्ट के रिजल्ट में जितना अधिक लेवल आता है, मरीज के शरीर में दिल संबंधी रोग, किडनी की परेशानी, और नर्व डैमेज का उतना ही ज्यादा खतरा होता है। ऐसे में जरूरी है कि हेल्दी, एक्टिव और लंबा जीवन जीने के लिए एचबीए1सी टेस्ट में रिजल्ट सामान्य स्तर पर ही बना रहना चाहिए।
एचबीए1सी टेस्ट लंबे समय के लिए ब्लड शुगर को ट्रैक करने का एक सुरक्षित और प्रभावी जरिया है। ऐसे में ये टेस्ट डायबिटीज की जांच और नियमित निगरानी के साथ साथ डायबिटीज के सटीक मैनेजमेंट के लिए भी जरूरी हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज है या किसी व्यक्ति में डायबिटीज के लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टरी परामर्श करना चाहिए। डॉक्टरी परामर्श के बाद एचबीए1सी टेस्ट के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स में शैड्यूल बुक करना चाहिए। शैड्यूल बुक करने के लिए डॉ. लाल पैथलैब्स का ऐप डाउनलोड करें।
FAQ
Q1. क्या एचबीए1सी टेस्ट से पहले फास्टिंग की जरूरत है?
नहीं, एचबीए1सी टेस्ट से पहले उपवास यानी फास्टिंग की जरूरत नहीं है। इसे किसी भी दिन और किसी भी समय किया जा सकता है।
Q2. एचबीए1सी टेस्ट में हाई लेवल का क्या मतलब है?
एचबीए1सी टेस्ट में हाई लेवल का मतलब है कि पिछले तीन महीनों में शरीर में ब्लड शुगर हाई रहा है, ये डायबिटीज और शुगर कंट्रोल में विफलता का संकेत है।








